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बिहार में एससी, एसटी उद्यमी योजना की चाल धीमी

Jun
11 2019

मनोज पाठक
पटना, 11 जून (आईएएनएस)। बिहार में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के युवक-युवतियों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनी मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) उद्यमी योजना की धीमी रफ्तार के कारण सही मायने में इसका फायदा बेरोजगार युवक-युवतियों को नहीं मिल रहा है। हालांकि हाल ही में उद्योग मंत्री बने श्याम रजक कहते हैं कि इस योजना में जल्द ही तेजी लाई जाएगी।

उद्योग विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री एससी-एसटी उद्यमी योजना इस समुदाय के इंटरमीडिएट (12वीं) पास युवा और युवतियों को उद्यमी बनाने के लिए चलाई जा रही है। योजना के तहत लाभार्थी को 10 लाख रुपये दिए जाते हैं, जिसमें पांच लाख रुपये विशेष प्रोत्साहन योजना के तहत अनुदान के रूप में और शेष पांच लाख रुपये ब्याज मुक्त ऋण के रूप में दिए जाने का प्रावधान है, जिसे उन्हें 84 किस्तों में चुकाना होता है।

इस योजना का लाभ लेने के लिए बेरोजगार युवक विभाग में आवेदन जमा कर रहे हैं। विभाग के मुताबिक, पिछले वर्ष अगस्त से शुरू इस योजना के तहत 38 हजार से ज्यादा बेरोजगार युवकों के आवेदन लंबित हैं।

विभाग के एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि विभाग द्वारा 2600 से ज्यादा लाभार्थियों को प्रशिक्षण के बाद पहली किस्त दी जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने इस योजना की शुरुआत करने के दौरान कहा था कि वह चाहते हैं कि इस योजना के तहत लगातार आवेदन आते रहें और लाभार्थियों का चयन होता रहे। प्रशिक्षण की व्यवस्था भी बनी रहे, जिससे बेरोजगार युवकों को लगातार रोजगार उपलब्धत होता रहे। लेकिन आज इस योजना की धीमी गति से युवा परेशान हैं।

हाल ही में उद्योग विभाग का कार्यभार ग्रहण करने वाले मंत्री श्याम रजक कहते हैं कि इस महत्वपूर्ण योजना में गति लाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। जल्द ही इस योजना में गति दिखाई देगी। उन्होंने कहा कि इस योजना में धन की कोई नहीं है।

विभाग के कई अधिकारी इस योजना के लिए चुनाव को भी कारण मानते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के कारण योजनाओं की गति धीमी हुई है। उनका कहना है कि चुनाव के कारण अधिकारियों की व्यस्तता चुनाव कार्यो में बनी रह गई थी।

बिहार उद्यमी संघ के महासचिव अभिषेक सिंह आईएएनएस से कहते हैं कि इसमें कोई शक नहीं कि इस योजना से बेरोजगार युवकों को रोजगार मिल सकता है, लेकिन ऋण देने से पहले उन्हें व्यवसाय करने का प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत है।

सिंह का मानना है कि केवल पैसा देने से किसी भी व्यक्ति को उद्यमी नहीं बनाया जा सकता, बल्कि उसका सही तरीके से मार्गदर्शन किए जाने की जरूरत है।"

उन्होंने कहा कि बेरोजगार युवक मामूली प्रशिक्षण के बाद ऋण तो ले रहे हैं, लेकिन उन्हें व्यवसाय का ज्ञान नहीं मिल पा रहा है। व्यवसाय करने के लिए उन्हें मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है, जिस कारण व्यवसाय में उनकी असफलता की आशंका बनी रहती है।

सिंह कहते हैं कि जिन युवकों के आवदेन रद्द हो रहे हैं, उन्हें बताया जाना चाहिए कि किस कारण आवेदन रद्द हुए, ताकि अगली बार वे उसमें सुधार कर सकें। उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्होंने उद्योग मंत्री से मिलकर इन समस्याओं की ओर उनका ध्यान आकृष्ट करवाया है।

उनका कहना है कि व्यवसाय के लिए कम से कम दो-तीन सालों तक उनके साथ मिलकर काम करने की जरूरत है, तभी बेरोजगार युवक सफल उद्यमी बन सकेंगे तथा सरकार की योजना का उद्देश्य भी पूरा होगा।

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