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टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में भास के नाटक उरूभंग की कक्षाभ्यास प्रस्तुति

Jan
06 2022

भोपाल : 6 जनवरी/ युद्ध कभी शांति और खुशहाली नहीं लाते। युद्ध के बाद अगर शेष रहते हैं तो वह है प्रतिहिंसा, पष्चाताप और अवसाद। महाभारत के अठ्ठारह दिन के युद्ध के बाद की कथा पर आधारित भास द्वारा रचित नाटक उरूभंग कुछ ऐसा ही संदेश देता दिखाई दिया। टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा कक्षाभ्यास प्रस्तुति के दौरान डॉ. आनंद कुमार पांडे के निर्देशन में इस नाटक का मंचन रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय स्थित नाट्य विद्यालय परिसर में किया गया। 

लगभग आधे घंटे की इस प्रस्तुति में दिखाया गया कि द्वंद्व युद्ध में जब भीम दुर्योधन की जंघा पर प्रहार कर उसे तोड़ देते है उस समय और उसके बाद की दुर्योधन की मनःस्थिति किस तरह की रहती है। युद्ध के परिणाम ने उसके मन को किस तरह बदला है। साथ ही अंधे धृतराष्ट्र और गांधारी दुर्योधन के पुत्र और उसकी रानियों के साथ उससे मिलने आते है। उसी समय अष्वत्थामा भी पांडवों से प्रतिशोध की अग्नि में तपता दुर्योधन से मिलने आता है। भीम के इस प्रकार दुर्योधन पर अनीति पूर्वक प्रहार से बलराम भी क्रोधित होकर आते है। इन्हीं सबकी मानसिक स्थित और दुर्योधन की मृत्यु तक की घटना का मंचन इस नाटक के माध्यम से किया गया। 

नाटक में पात्र कम होने के कारण विद्यार्थियों के दो समूह बनाकर प्रस्तुति की गई। नाटक में संगीत संतोष कौशक और अभि श्रीवास्तव का रहा। 

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