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बुंदेलखंड में तालाब पुनर्जीवित हुए तो खिल उठेगा इलाका

Jun
27 2019

संदीप पौराणिक
भोपाल, 27 जून (आईएएनएस)। बुंदेलखंड कभी जल संरचनाओं के कारण पहचाना जाता था, मगर अब यही जल संरचनाओं के गुम होने से इस इलाके की पहचान समस्याग्रस्त इलाके की बन गई है। अब सैकड़ों साल पुराने तालाबों को पुनर्जीवित करने की योजना बन रही है, अगर यह ईमानदार पहल हुई तो यह इलाका खिल उठेगा, क्योंकि पानी की समस्या ने ही इस क्षेत्र को दुनिया के बदहाल इलाके की पहचान जो दिलाई है।

बुंदेला और चंदेलकालीन राजाओं के काल में बनी जल संरचनाओं की वर्तमान दौर में मौजूदगी इस क्षेत्र की समृद्धि की गवाही देते हैं। उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैले इस इलाके में नौ हजार से ज्यादा जल संरचनाएं हुआ करती थीं, मगर वर्तमान में इनमें से बड़ी संख्या मे जल संरचनाओं ने अपना अस्तित्व खो दिया है। कम ही जल संरचनाएं पानी को सहेजने की स्थिति में हैं।

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिसंबर, 2017 में इस इलाके की जल संरचनाओं के सीमांकन, चिन्हीकरण का ऐलान किया था, मगर इस दिशा में हुआ कुछ नहीं, उसके ठीक उलट बीते दो सालों में कई जल संरचनाओं का नामोनिशान ही मिटा दिया गया।

राज्य में एक बार फिर इस इलाके की जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करने की योजना पर काम शुरू हुआ है। विश्व बैंक के अधीन आने वाली '2030 वाटर रिसोर्स ग्रुप' ने इस काम को पूरा करने के लिए राज्य सरकार और सामाजिक संगठनों के साथ तालाबों को पुनर्जीवित करने की पहल तेज कर दी है।

विश्व बैंक के अधीन काम कर रहे '2030 वाटर रिसोर्स ग्रुप' से जुड़े अनिल सिन्हा और युवराज आहूजा राज्य के अधिकारियों और सामाजिक संगठनों से बुंदेलखंड के तालाबों को लेकर लगातार संवाद कर रहे हैं। '2030 डब्ल्यूआरजी' से जुड़े प्रतिनिधि का कहना है कि बुंदेलखंड के तालाबों का सर्वेक्षण कराया जाएगा, तालाबों की क्या स्थिति है, इसका आकलन किया जाएगा, उसके बाद तालाबों को पुनर्जीवित करने की योजना पर अमल होगा।

सूत्रों का कहना है कि '2030 डब्ल्यूआरजी' से जुड़े प्रतिनिधि, राज्य सरकार के अफसरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की दो दौर की बैठक हो चुकी है। इन बैठकों में बुंदेलखंड की पानी संबंधी समस्याओं पर चर्चा हुई, साथ ही तालाबों की स्थिति को लेकर उपलब्ध ब्यौरे का अध्ययन किया गया। अभी तो तालाबों की स्थिति क्या है, कितनों पर अतिक्रमण है, बारिश का जल इन तालाबों तक पहुंचता है या नहीं, सालभर जल की उपलब्धता की क्या स्थिति रहती है, इस पर भी चर्चा हुई।

बुंदेलखंड की बदहाली में सुधार लाने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2008 में विशेष पैकेज मंजूर किया गया था। राहुल गांधी ने बुंदेलखंड को बहुत करीब से देखा, जाना-समझा और गरीबों के घरों में रात्रिविश्राम किया था। उस दौरान उन्होंने यहां की गरीबी देखकर क्षेत्र, हालात बदलने की दिशा में प्रयास किए थे। लगभग एक दशक पहले उन्होंने इस क्षेत्र के लिए 7,600 करोड़ रुपये से अधिक का विशेष पैकेज मंजूर कराया था।

सामाजिक कार्यकर्ता बासुदेव सिंह का कहना है कि तालाब बुंदेलखंड की जीवन रेखा रहे हैं। यहां की जल संरचनाओं को पुनर्जीवित कर दिया जाता है तो यहां की तस्वीर ही बदल जाएगी। कहा जाए तो यह इलाका फिर खिल उठेगा। यहां समस्या है तो सिर्फ पानी की। इस समस्या का निदान हो जाए तो बेरोजगारी, पलायन आदि से मुक्ति मिल जाएगी।

मध्य प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के मौजूदा सात जिलों सागर, दमोह, छतरपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़, पन्ना और दतिया के लिए 3,860 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इसमें से सिर्फ 2100 करोड़ की राशि खर्च हो पाई है। इस राशि से जल संसाधन, कृषि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, उद्यानिकी, वन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, पशुपालन, मत्स्य-पालन, कौशल विकास आदि विभागों के जरिए सरकार को अलग-अलग काम कराने थे। लेकिन यह पैकेज जमीन पर कहीं नहीं दिखा। जो जल संरचनाएं बनीं, वे या तो एक-दो वर्ष में वस्त हो गईं या बनते ही धूल-धूसरित हो गईं।

चलाए गए गए कई अभियान :

मध्य प्रदेश में अन्य हिस्सों की तरह बुंदेलखंड में पानी संरक्षण और जल संरचनाओं को सुरक्षित रखने के लिए कई अभियान चलाए गए। दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में पानी बचाओ अभियान चला। इस अभियान में बुंदेलखंड की जल संरचनाओं के संरक्षण का अभियान चला। इसी तरह शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में जलाभिषेक अभियान चला। उसके बाद बुंदेलखंड पैकेज में जल संरचनाओं के संरक्षण के साथ नई संरचनाओं को निर्माण पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हुए, मगर यहां की तस्वीर में बदलाव नहीं आया। अब इस क्षेत्र के 1000 तालाबों को पुनर्जीवित करने का अभियान चलाया जाने वाला है।

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संदीप पौराणिक

लेखक देश की प्रमुख न्यूज़ एजेंसी IANS के मध्यप्रदेश के ब्यूरो चीफ हैं.

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