Kharinews

कविता

 

अन्नदाता-जन्मदाता

नैना शर्माझुलस गई है धरती,आसमां बिलख कर रो गया,जो था सबका अन्नदाता,अन्नदाता,जन्मदाता,आज वो काल के गाल में सो गया।।कभी जो कारण था दूसरों की खुशियों का,आज वो अपनों के गम का कारण बन गया,जो करता...

Read Full Article
 

नया इतिहास रच दिखाऊँगी

नैना शर्मा आज संसार विमुख,मैं विरक्त हो गईं,छाई थी जो लालिमा,होकर निरक्त,मैं निशक्त हो गईं।।था बड़ा अभिमान,मुझे अपनी बुद्धि और ज्ञान पर,होकर विफ़ल,आज ख़ुद से भी त्रस्त हुई,आज संसार से विमुख,,,,,,,,,,,,,मन में है लालसा,एक ही...

Read Full Article
 

ज़िन्दगी----"कविता"

नैना शर्माआज न जाने क्यूँ मैं बंजर हो गईं,जहाँ थी कभी खिली हरियाली,वो ज़मीन आज बंजर हो गई।।कभी खिलते थे फूल यहां,आज ये जमीं काँटों से ढक गई,कभी बसन्त महकता था,सरसों के खेतों में,बौराता था...

Read Full Article
 

तपिश

अरुण कान्त शुक्ला ये तपिश सिर्फ सूर्य की तो नहीं इसमें कोई मिलावट है, यूँ लगता है जैसे कोई घाम में आग घोल रहा है,   ये थकान सिर्फ चलने की तो नहीं इसमें कोई मिलावट...

Read Full Article
 

ये रण है.......!!

नैना शर्मा अब फिर बज उठी रणभेरी,आकाश फिर नये रागों से गूँज उठा,चहुँ दिशाएँ विभिन्न रंगों से रंग गईं,कहीं केसरिया,कहीं नीली,कहीं सफ़ेद लाल हरी पताका लहर गई।।ये रण है राजनीति का,राजनीति का कूटनीति का,कहीं कुछ...

Read Full Article
 

जननी

स्मिता  कुमारीजननी -चिड़ियाँ कब होती हैं भरोसे  अपनों की,अपने पंखों के भरोसे उड़ ही जाती हैं।नदियाँ कब थमती है समुंदर से मिलकर,अपनी गति में निरंतर बहती ही जाती हैं।हवाएँ  कब रुकी हैं किसी से डर...

Read Full Article
 

"आज भी याद है वो होली "

नैना शर्मा हर तरफ गुलाल था,किसी का मुहँ पीला,किसी का अंग लाल था,हर गली में हुड़दंगों की टोली थी,गोरी की चूनर हरी,किसी की चूनर सतरंगी थी,आज भी याद है वो हुलियारों का हुड़दंग,वो प्यार का...

Read Full Article
 

चमकती हुई भाषा और अलहदा मुहावरे के कवि विमलेश – केदारनाथ सिंह

प्रस्तुति – मनोज झा नीलांबर कोलकाता द्वारा आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में 11 फरवरी को चर्चित युवा कवि कथाकार विमलेश त्रिपाठी की वाणी प्रकाशन, दिल्ली से प्रकाशित नई कविता पुस्तक ‘कंधे पर कविता’ का विमोचन...

Read Full Article
 

सपने सिर्फ देखे नहीं जाते संघर्ष कर प्राप्त किये जाते हैं

भोपाल : 26 जनवरी/ अभी 7 ही बजे हैं कि लोग भारत भवन पहुंचने लगे हैं। भारत भवन के अतरंग सभागार के बाहर कुछ खुसफुसाहट हो रही है। आवाज तो साफ़ नहीं आ रही लेकिन...

Read Full Article
 

क्यों नहीं मिटती ये परेशानियाँ...

क्यों नहीं मिटती ये परेशानियाँ...स्मिता कुमारी गई थी जिनके पास अपनी परेशानियों को साझा करने,बस जाकर पूछा उनसे,कैसे हैं आप?उन्होंने मुझे अपना समझबता दिया पहले अपनी परेशानियाँ..फिर क्या था ,वहीं मिट गई मेरी सारी परेशानियाँ...

Read Full Article


Subscribe To Our Mailing List

Your e-mail will be secure with us.
We will not share your information with anyone !

Archive