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राकेश सिंह जी पढ़ लीजिये, बिना पैसे लिए आपको कवरेज दे रहा हूँ

Apr
22 2018

विनय द्विवेदी

प्रिय राकेश सिंह जी,

आप चार दिन पहले ही मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष नियुक्त किये गए हैं। आप जबलपुर से तीन बार लोकसभा के सदस्य भी रहें हैं, अभी भी हैं। आपने पत्रकारों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि बिना पैसे लिए तो आप कवरेज देंगे नहीं। अब देखिए ना, आपकी इतनी सी बात पर मैं आपको इस चिट्ठी के जरिये भरपूर कवरेज दे रहा हूँ।

वैसे आपने कुछ अलहदा तो नहीं ही बोला है। आपसे पहले आपकी पार्टी के कई कद्दावर नेता मीडिया और पत्रकारों को लेकर टिप्पणियां करते रहे हैं। आपने प्रदेश सरकार के विकास और भाजपा संगठन को लेकर कोई गंभीर कार्ययोजना मीडिया के समक्ष रखने के बजाय, पत्रकारों को ही निशाने पर ले लिया।

दरअसल, इसमें गलती आपकी है भी नहीं। आपकी पार्टी हो या कांग्रेस, मीडिया को समय समय पर निशाने पर लेते रहे हैं। आपको ताज़े उदाहरण से ये बात बताने मि कोशिश करता हूँ। भाजपा के तमिलनाडु के एक बड़े नेता एस बी शेखर ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर की है जिसमें कहा गया है कि महिला बिना बड़े लोगों से हमबिस्तर हुए रिपोर्टर या एंकर बन ही नहीं सकती। और भी पुराने बहुत से उदाहरण दिए जा सकते हैं नेताओं की मीडिया को लेकर बदजुबानी के। लेकिन इससे पत्र लंबा हो जाएगा, फिर शायद आप पढ़ें ही नहीं।

खैर मुद्दे पर लौटते हैं। आपकी पार्टी की सरकार और पार्टी को पिछले 15 सालों में जो मीडिया कवरेज मिला है वो शायद मध्यप्रदेश बनने के बाद से किसी सरकार या पार्टी को नहीं मिला है। लेकिन मीडिया कवरेज की भूख होती ही ऐसी है कि जिसे ये भूख एक बार लग गई, जीवन पर्यंत मिटती ही नहीं है।

राकेश जी, अभी हाल में तो बसंत ऋतु गुजरी है। पुराने सूखे पत्तों से पेड़ों ने मुक्ति पाई है, नई कोंपलों के लिए, नई ऊर्जा के लिए। कभी सड़कों से प्रदेश के दौरे पर निकलियेगा तो देखियेगा, पेड़ों पर बौर अब फलों की शक्ल ले रहा है। प्रदेश भर में भाजपा के अंदरखाने ही बहुत निराशा और बोझिलता महसूस की जा रही थी, इसे आप सहित सभी जानते हैं। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए पार्टी आपको जब लेकर आई अध्यक्ष के तौर पर। तब कार्यकर्ताओं में बसंत ऋतु जैसा अहसास हुआ होगा। लेकिन आपने तो निवर्तमान अध्यक्ष की परंपरा को ही आगे बढ़ाना शुरू कर दिया।

अगले 6 महीने बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं और आप विपक्षी कांग्रेस के बजाय मीडिया और पत्रकारों पर निशाना साध रहे हैं। आपको एक महत्वपूर्ण बात बताता हूँ, चाहें तो इसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी से भी बात करके पुष्ट कर लीजियेगा। पिछले साल भर से प्रदेश की मीडिया और पत्रकारों के एक हिस्से के बदलते रुख से मुख्यमंत्री परेशान हैं। इससे निजात पाने के लिए एक के बाद एक जतन भी कर रहे हैं। प्रदेश के किसानों, युवाओं सहित सवर्णों में भी सरकार और मुख्यमंत्री को लेकर एंटी इनकंबेंसी हैं। इस स्थिति पर गौर कीजिए बजाय पत्रकारों के।

हमारे हर स्तर के नेताओं ने पत्रकारों को अपना दरबारी समझ लिया है। मैं मानता हूं कि बहुत से पत्रकार दरबारों में हाजिरी लगाते हैं लेकिन आपने तो सभी को एक ही लाइन में खड़ा कर दिया जैसे मोदी जी ने बैंक और ATM में जाति, पाँति से इतर लोगों को लाइन में लगा दिया था। सब दरबारी नहीं हैं, ये मैं दावे के साथ कहता हूँ। जरा पुरानी ऐसे हिसाब किताब की डायरियां निकलवा कर जांच लीजियेगा कि कितने पत्रकारों ने भाजपा से भुगतान लिया है। मैं ये मानता हूं कि जिस तरह राजनीति में अब भी ईमानदार नेता हैं वैसे ही मीडिया में बहुत से ईमानदार पत्रकार भी हैं।  

आपने इस मामले में अपनी सफाई में कहा कि ये मज़ाक था, लेकिन हर पत्रकार इसे मज़ाक नहीं समझ सकता। इस मजाक से आपको भाजपा के अंदर की गुटबाजी तो समझ आ गई होगी क्योंकि आपके ही कई नेताओं ने इसे मुद्दा बनवा कर आपको फंसवा दिया। ऑफ द रिकॉर्ड ब्रीफिंग की आपके एक पूर्व अध्यक्ष की डाली परंपरा और सत्ता की मलाई के बंटवारे ने भाजपा संगठन में गुटबाजी को बढ़ावा दिया है। आपको इस चुनौती से निपटना है तो बोलते वक़्त सावधानी तो बरतनी पड़ेगी। वैसे भी आप अध्यक्ष की कुर्सी पर अभी अभी बैठे हैं इसलिए हो सकता है कि आपको फिलवक्त रियायत मिले लेकिन चुनावी दौर तकरीबन शुरू हो गया है और ऐसे में सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी। और दुर्घटना कैसी भी हो कवरेज तो मिलेगा ही। आप मीडिया कवरेज के लिए काम करेंगे तो कवरेज जरूर मिलेगा। जैसा काम वैसा कवरेज।

और अंत में अध्यक्ष बनने पर आपको शुभकामनाओं के साथ एक मित्रवत सलाह बिना भुगतान के देता हूँ। मध्यप्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए पिछले तीन चुनावों जैसे नहीं होने वाले। इस बार चुनावी चुनौती मुश्किलों भारी होगी। इस पर ध्यान दीजियेगा क्योंकि मुख्यमंत्री की ताल से ताल मिलाते रहे आपके दो पूर्व अध्यक्षों में से एक को पोखरण विस्फोट मिला तो दूसरे को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही रुखसत होना पड़ा। फिर से ढेर सारी शुभकामनाएं आपको।

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विनय द्विवेदी

लेखक www.kharinews.com के मुख्य संपादक हैं।

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