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बुंदेलखंड : आल इज वेल को मुंह चिढाते सरकारी आंकडे, एक वर्ष मे 583 गरीब, किसान और बेरोजगार ने आत्महत्या की

Jun
15 2017

धीरज चतुर्वेदी

पिछले कुछ दिनो में बुंदेलखंड में सरकार के तरक्की के दांवो को खोखला साबित करती घटनाये सामने आई है। कफन के पैसे ना होने पर चंदा जोड दलित महिला का अंतिम संस्कार किया जाता है। वहीं अपनी पत्नी आर्थिक तंगी के चलते ईलाज ना करा पाने से मजबूर एक मजदूर आत्महत्या कर लेता है। वहीं एक युवक कर्ज के तले दबे होने पर फांसी के फंदे पर झूल गया। शायद यह घटनाये रहनुमाओ को शर्मसार कर दे। वैसे सरकार के आंकडे ही गवाह है कि सागर संभाग के पांच जिलो में एक वर्ष के दौरान गरीबी, बेरोजगारी और किसानी व्यवसाय से तंग आकर 583 लोगो ने आत्महत्या कर ली। जहां 43 किसान, 91 खेतिहर मजदूर, 240 दिहाडी मजदूर, 185 बेरोजगार, 10 गरीब एक वर्ष में आत्महत्या कर ले फिर भी कहा जाये कि देश बदल रहा है तो यह नति निर्धारको की बेशर्मी के सिवा कुछ नही।

बीती 10 जून का छतरपुर जिले के नौगांव में टीबी अस्पताल के बाहर एक वृद्ध रामरतन अहिरवार अपनी मृत पत्नी के शव को लेकर बिलखता नजर आया। हरपालपुर निवासी यह व्यक्ति आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। उसके पास शव को घर ले जाने और अंतिम संस्कार तक के लिये पैसे नही थे। नौगांव नगर के जागरूको ने चंदा एकत्रित कर महिला का अंतिम संस्कार किया। इसी तरह 9 जून की रात्रि छतरपुर के सीताराम कालोनी किराये के मकान में रहने वाले 28 वर्षीय बालचंद्र साहू ने निवासी पिपट ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी के अनुसार यह युवक दिल्ली में मजदूरी करता था। पत्नी को प्रसव कराने छतरपुर आया था। प्रसव बाद पत्नी की तबियत बिगड गई तो युवक ने खून भी दिया। डाक्टरो ने कमजोरी के कारण लगातार ईलाज कराने की सलाह दी। आर्थिक तंगी पत्नी के ईलाज में रूकावट बनी तो अततः युवक ने हालातो से तंग होकर आत्महत्या कर ली।

तीसरी घटना दमोह जिले के बटियागढ थाना के ग्राम तिदुंआ की प्रकाश मे आई। जहां 36 वर्षीय बोरे अहिरवार ने घर में ही फांसी लगा ली। कुछ दिनो पूर्व इस युवक की पत्नी शांति को मौंत हो गई थी। जिसकी तेरहवी के लिये 20 हजार का कर्ज लिया था। पैशे से मजदूर बोरेलाल पर कर्ज का बोझ इस कदर भारी पडा की उसने जिदंगी को ही खत्म कर लिया। इसी तरह 8 जून को सागर जिला मुख्यालय के शास्त्री वार्ड में रहने वाले 30 वर्षीय गोपाल यादव ने भी फांसी लगा ली। बताया गया कि यह युवक भी मजदूर था और आर्थिक हालातो से गुजर रहा था।

बुंदेलखंड मे इस तरह कि घटनाये आमतौर पर प्रकाश में आती है। जिनकी गंभीरता पर कभी पहल करने की सरकारी कोशिशे नही हुई। इधर तरक्की के दावे किये जाते। बुंदेलखंड बेरोजगारी, गरीबी, के दंश को आजादी बाद से ही झेल रहा है। कागजो में दावो की लेखनी होती है लेकिन सरकार के आंकडे ही हकीकत को बयां करते हुये अपनी गवाही देते है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकडो के अनुसार सागर संभाग के पांच जिलो सागर, छतरपुर, टीकमगढ, दमोह और पन्ना में वर्ष 2015 दौरान 1436 आत्महत्या के मामले पंजीबद्ध हुये। जिसमें गरीबी, बेरोजगारी से तंग आकर 209 लोगो ने आत्महत्या की। वहीं 374 किसान, खेतिहर मजदूर और दिहाडी मजदूरो ने मौंत को गले लगाया। बुंदेलखंड के सबसे पिछडे पन्ना जिले मे दिहाडी मजदूरो के आत्महत्या कर देने के मामले तो चितंनीय के साथ एयरकंडीशनर में योजनाये बनाने वालो के मुंह पर किसी तमाचे से कम नही। वर्ष 2015 के दौरान 106 दिहाडी मजदूरो ने आत्महत्या की। सागर संभागीय मुख्यालय वाले जिले में भी 102 दिहाडी मजदूरो ने अपनी जीवन को त्याग दिया। पूरी तरह खेती पर निर्भर रहने वाले 91 खेतिहर मजदूरो ने भी मौंत को गले लगाया। हाल ही में मध्यप्रदेश के गृहमंत्री ने किसान आंदोलन के दौरान आंकडे प्रस्तुत किये कि पिछले वर्ष 2016 दौरान मात्र 4 किसानो ने मध्यप्रदेश में आत्महत्या की। सागर जिला मुख्यालय के मूल निवासी भूपेन्द्रसिंह को सरकार के आंकडे झटका देने वाले होगे कि वर्ष 2015 के दौरान मात्र सागर संभाग में 43 किसानो ने आत्महत्या की। जिसमें उनके मूल जिले सागर मे 18, टीकमगढ में 15, पन्ना में 5, दमोह में 3 और छतरपुर जिले में 2 किसानो ने मौत को गले लगाया। सरकार की नजरो में आत्महत्या के कई कारण होते है। जो किसान कर्ज से तंग होकर आत्महत्या करता है उसके आंकडे पूरे मध्यप्रदेश में मात्र चार है। अब इन रहनुमाओ को समझना होगा कि जिदंगी को खत्म करने का फैसला आसान नही होता। गरीबी अर्थात भूखमरी से भी सागर संभाग के पांच जिलो में 10 लोगो ने आत्महत्या की तो इसे क्या सरकार की नाकामी नही माना जायेगा। अगर अभी भी कहा जाये कि या सरकार के कागज कहे कि आल इज वेल है तो स्वतः ही बेशर्म कर देने वाले है।

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धीरज चतुर्वेदी

धीरज चतुर्वेदी दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता कर रहे हैं तथा सामाजिक सरोकार को लेकर सजग और सक्रिय रहते हैं.

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