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GST एक काला कानून जो व्यपारियों पर थोपना चाहती है मोदी सरकार

Jun
16 2017

स्नेहा शौहान

GST के लिए सरकार ने जिस तरह से व्यापारियों को उल्लू बनाना शुरू किया है वो लाजबाब है। सरकारी अधिकारी, मंत्री लोग कार्यशाला लगा के GST क्या है ये बता रहे है। लेकिन इसकी आड़ में सरकार और वित्त मंत्री ने जो व्यापार के नाम पर व्यापारी को लूटने की योजना बनाई है वो नही बता रहे। रोज इनके नए नियम आ रहे है, नई दरें। लेकिन इन सब को सरल बता के किस तरह भ्रमित किया जा रहा है वो किसीं को समझ नही आ रहा। साल में 2 रिटर्न् की बात की शुरू में अब 37। टैक्स किसी पर, सब काम ऑनलाइन होगा। घंटा होगा....!!! बैंक का सर्वर डाउन, टैक्स ऑनलाइन सर्वर डाउन। हर दुकान में कंप्यूटर रखो, या तो खुद करो या किसी को रखो। उसकी तन्खाह कौन देगा अरुण जेटली? या साहेब आप? व्यापारी स्टॉक रखे तो जुर्माना, ना रखे तो जुर्माना, ना दे तो जेल। तानाशाही ऐसी कर रहे है जैसे खुद कि पीढ़िया व्यापार करके खूब टैक्स दी हो। दूसरे देशों की नकल करने से पहले खुद के देश मे क्या क्या मुमकिन है नही है होगा तो कैसे होगा अगर वित्त मंत्री ने सोचा होता तो आज देश मे किसान को गोली नही मारनी पड़ती।

कल किसान मारा अब व्यापारियों की जान लो। जब जब किसी वकील को वित्त मंत्री बनाया है, उसने सरकार का बंटा धार किया है। अब बीजेपी की बारी है। GST को लेकर जो लोग बहुत खुश है, साहेब की तारीफ कर रहे, और इतिहास खोल के बता रहे वो भी देखे की इस तरह की सज़ा और तानाशाही इतिहास में कब हुई। मितरों, ये कारण है जिसकी वजह से GST का विरोध है। समझे और साझा करें जीएसटी को लेकर व्यापारियो को जो सबसे बड़ा डर है वह यही है।

जीएसटी कानून में विभिन्न अपराधों के तहत 21 तरह की सज़ा के प्रावधान हैं। कम कर जमा करने पर कम से कम 5000 रुपए का जुर्माना देना होगा। कर में जो रकम छुपाई गई है, उस पर भी 10 प्रतिशत के बराबर अतिक्ति जुर्माना देना होगा CGSTC की धारा 69 के तहत GST की चोरी करने वाले कारोबारी की गिरफ्तारी हो सकती है जबकि धारा 79 के तहत सरकार बकाया कर न चुकाने वाले कारोबारी का सामान और चल-अचल संपत्ति को बेचकर टैक्स की राशि वसूल सकती है धारा 171 में मुनाफाखोरी निषेध करने का प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान के तहत अगर कोई कारोबारी वस्तु और सेवा पर कर टैक्स में कटौती का लाभ उपभोक्ता तक नहीं पहुंचाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। बिना इनवॉयस के सप्लाई, गलत इनवॉयस, टैक्स लेकर 3 महीने में जमा नहीं करना, गलत तरीके से टैक्स क्रेडिट या रिफंड लेना, खातों में हेरा-फेरी, टर्नओवर कम बताना अपराध होगा। इन पर कम से कम 10,000 रु. जुर्माना। अपराध में मदद करने वालों पर 25,000 रु. तक जुर्माना। गलत जानकारी देने पर 25,000 रु. तक जुर्माना लग सकता है कहा तो यहां तक जा रहा है कि महीने में तीन रिटर्न्स भरना है और तय तारीख तक रिटर्न न भरने पर रोजाना 100 रु. और अधिकतम 5,000 रु. जुर्माना लगेगायह नया कानून तो यहां तक कहता है कि जीएसटी की चोरी करने पर दोषी व्यक्ति को पांच साल तक का कारावास भी हो सकता है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो आर्थिक चूक पर इतने कड़े कानून आज तक किसी भी देश मे लागू नही हुए है, इसलिए सभी को मिलकर इस काले कानून का विरोध करना होगा। एक आम आदमी को लग रहा है कि इन बातों से उसे क्या मतलब लेकिन उसे यह मालूम होना चाहिए कि तेल तिल्ली से निकलता है ओर तिल्ली वह खुद है, व्यापारी तो अपनी कीमत निकालना जानता है वह निकाल लेगा लेकिन अंतिम रूप में जीएसटी से जुड़े प्रक्रियागत खर्चो का भुगतान आम आदमी को ही करना है।

एक आम आदमी को लग रहा है कि इन बातों से उसे क्या मतलब लेकिन उसे यह मालूम होना चाहिए कि तेल तिल्ली से निकलता है ओर तिल्ली वह खुद है, व्यापारी तो अपनी कीमत निकालना जानता है वह निकाल लेगा लेकिन अंतिम रूप में जीएसटी से जुड़े प्रक्रियागत खर्चो का भुगतान आम आदमी को ही करना है.....।

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स्नेहा चौहान

स्नेहा चौहान सामाजिक सरोकारों को लेकर सक्रिय स्वतंत्र पत्रकार हैं.

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