Kharinews

शिक्षा को राज्य सूची से हटाने के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में याचिका, अदालत ने केंद्र को जारी किया नोटिस

Sep
14 2021

चेन्नई, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को अरराम सेया विरुम्बु ट्रस्ट द्वारा दायर एक रिट याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।

ट्रस्ट की ओर से मद्रास हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर शिक्षा को राज्य सूची से हटाकर समवर्ती सूची में डालने के निर्णय को चुनौती दी गई है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत से संविधान के 42वें संशोधन कानून 1976 की धारा 57 को असंवैधानिक घोषित करने का आग्रह भी किया गया है, जिसके तहत ऐसा किया गया है।

ट्रस्ट ने संवैधानिक संशोधन को इस आधार पर चुनौती दी है कि इसने संघीय ढांचे को बिगाड़ दिया है, जो संविधान की एक बुनियादी विशेषता है।

ट्रस्ट की ओर से रिट याचिका दायर करने वाले द्रमुक विधायक डॉ. इझिलन नागनाथन ने राज्य के विषय के रूप में शिक्षा की स्थिति को बहाल करने के लिए संवैधानिक संशोधन की धारा 57 को खत्म करने की मांग की।

तमिलनाडु सरकार को मामले में प्रतिवादी के तौर पर शामिल करने के बाद मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति पी. डी. औदिकेशावालु ने राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए। अदालत ने राज्य और केंद्र सरकार दोनों को आठ सप्ताह के भीतर अपने जवाबी हलफनामे दाखिल करने का आदेश दिया और कहा कि वह दस सप्ताह के बाद मामले की सुनवाई करेगी।

वरिष्ठ वकील एन. आर. एलंगो ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश होते हुए कहा कि संविधान की सातवीं अनुसूची में एक विषय को एक सूची से दूसरी सूची में ले जाना संसद द्वारा एकतरफा नहीं किया जा सकता है और इसमें राज्यों द्वारा अनुसमर्थन प्राप्त करने की एक विशेष प्रक्रिया की आवश्यकता है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल आर. शंकरनारायणन ने कहा कि संविधान में परिकल्पित संघीय ढांचे को कोई खतरा नहीं है, क्योंकि शिक्षा को राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्थानांतरित कर दिया गया है, न कि संघ सूची में। जैसे ही उन्होंने एक विस्तृत जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए समय मांगा, पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों को आठ सप्ताह के भीतर हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया।

ट्रस्ट ने यह भी तर्क दिया कि कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे बड़े लोकतंत्रों में, शिक्षा को एक राज्य/प्रांतीय विषय के रूप में माना जाता रहा है। इसने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के कार्यान्वयन से ऐसी स्थिति पैदा होगी, जिसमें स्वायत्तता की स्थिति होगी। शिक्षा के क्षेत्र में राज्य के अधिकारों को पूरी तरह से छीन लिया जाएगा। इसने तर्क दिया कि यह संघीय ढांचे की जड़ पर प्रहार करेगा।

--आईएएनएस

एकेके/एएनएम

Related Articles

Comments

 

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति बागची को कलकत्ता हाईकोर्ट में तबादले की सिफारिश की

Read Full Article

Subscribe To Our Mailing List

Your e-mail will be secure with us.
We will not share your information with anyone !

Archive