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छग के मंदिरों में चढ़े फूलों से बना हर्बल गुलाल

Mar
08 2020

रायपुर, 8 मार्च (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में इस बार की होली में हर्बल गुलाल का प्रयोग किया जाएगा। इस गुलाल को महिलाओं ने मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को मिले गुलदस्तों के फूलों से बनाया है, जिसे लोगों के गालों पर तो लगाया ही जाएगा, साथ ही हुर्रियारे में भी उड़ाया जाएगा।

राज्य के कई मंदिरों में चढ़ाए गए और मुख्यमंत्री को मिले गुलदस्तों के फूलों को जमा कर महिलाओं के स्वसहायता समूहों ने हर्बल गुलाल तैयार किया है। महिलाओं ने तैयार किए गए हर्बल गुलाल का पैकेट मुख्यमंत्री बघेल को भी सौंपा है।

जानकार बताते हैं कि हर्बल गुलाल नुकसानदायक नहीं है, और इसका स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है, बल्कि यह त्वचा को ठंडक प्रदान करता है। यह अगर आंखों में चला भी गया तो इससे जलन नहीं होगा। इसके अलावा इससे त्वचा तथा बालों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। हल्दी, गेंदा, गुलाब, चुकन्दर, पालक, अनार जैसे फूलों, तत्वों और फलों से बने जैविक अथवा हर्बल गुलाल स्वास्थ्य के लिहाज से लाभकारी हैं।

बताया गया है कि रायपुर जिले के सेरीखेड़ी महिला स्व-सहायता समूह और कबीरधाम जिले के जय गंगा मईया महिला स्व-सहायता समूह ने मुख्यमंत्री को फूलों से निर्मित हर्बल गुलाल भेंट किया। होली के पर्व पर बिहान स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने कवर्धा के भोरमदेव मंदिर में चढ़े फूलों और मुख्यमंत्री निवास से प्राप्त गुलदस्तों से हर्बल गुलाल तैयार कर लोगों को हर्बल रंग से होली खेलने की सौगात दी है।

मुख्यमंत्री बघेल ने महिला समूहों को हर्बल गुलाल के निर्माण के लिए संचालित गतिविधियों पर अपनी बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने इन महिला समूहों के अभिनव पहल की खूब सराहना की। उन्होंने कहा, मुझे यह जानकर हार्दिक प्रसन्नता हुई है कि महिलाओं ने मंदिरों से पूजा के बाद निकलने वाले फूलों का सदुपयोग गुलाल बनाने में किया है। इसी तरह शादी विवाह, अन्य कार्यक्रम के साथ मुख्यमंत्री निवास से निकलने वाले फूलों का उपयोग भी हर्बल गुलाल बनाने में किया जा रहा है। इसके लिए इन सभी महिलाओं को साधुवाद देता हूं।

बताया गया है कि रायपुर जिले के सेरीखेड़ी की महिलाओं ने अभी तक आठ कुंटल गुलाल बनाया है। इतना ही नहीं ये महिलाएं गुलदस्तों के पन्नियों और रैपर का उपयोग साबुन को पैक करने में कर रही है तथा बची हुई डंडियों और पत्तों का प्रयोग वे जैविक खाद बनाने में कर रही हैं।

इसी तरह कबीरधाम जिले की जय गंगा मईया महिला स्व-सहायता समूह द्वारा छत्तीसगढ़ के खजुराहो के नाम से विख्यात भोरमदेव मंदिर में श्रद्घालुओं द्वारा चढ़ाए गए फूलों से हर्बल गुलाल बनाया जा रहा है। तैयार किए गए चार कुंटल गुलाल को बाजार में बेच कर 52 हजार रुपये की कमाई की गई है।

वहीं जय गंगा मईया महिला स्व-सहायता समूह द्वारा नौ अलग-अलग रंगों में हर्बल गुलाल तैयार किए गए हैं। श्री भोरमदेव मंदिर में श्रद्घालुओं द्वारा हर दिन करीब 200 से 300 किलो फूल चढ़ाया जाता है, जो सप्ताह के अंत में 400 से 500 किलोग्राम हो जाता है।

--आईएएनएस

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