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प्रवासियों को कृषि क्षेत्र से जोड़कर रोजगार देने में जुटी झारखंड सरकार

Aug
12 2020

रांची, 12 अगस्त (आईएएनएस)। कृषि आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के लिए झारखंड सरकार महिला समूह को सब्सिडी आधारित बीज उपलब्ध करा रही है। इसके तहत खेती के मौसम को ध्यान में रखते हुए उच्च गुणवत्ता के बीज ग्रामीण इलाकों में सखी मंडल की महिलाओं को सस्ती कीमत पर वितरण किया गया है।

 

ग्रामीण विकास विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सखी मंडल की दीदियों को खरीफ फसलों से जोड़कर उनकी आजीविका को सशक्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के बीज विनिमय एवं वितरण कार्यक्रम एवं बीजोत्पादन योजना अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को सखी मंडल के जरिए 50 फीसदी सब्सिडी पर उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए गए हैं।

 

उन्होंने बताया राज्य भर में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी (जेएसएलपीएस) के जरिए अब तक करीब 2259.2 क्विंटल धान के बीज का वितरण हो चुका है। दलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 930.3 क्विंटल अरहर, 322.4 क्विंटल उड़द एवं करीब 26.5 क्विंटल मूंग के बीज का वितरण किया गया है। सखी मंडलों को आधार बनाकर कुपोषण से लड़ने में सहायक रागी एवं मूंगफली के क्रमश: 183.3 क्विंटल एवं 132.4 क्विंटल बीज वितरण किया गया है।

इसके अलावे 516.1 क्विंटल मक्के का बीज भी उपलब्ध कराया गया है। इस एवज में दीदियों से करीब 19 करोड़ रुपये का संग्रहण अंशदान के रुप में हो रहा है।

ग्रामीण विकास विभाग के विषेष सचिव राजीव कुमार ने बताया, आजीविका संवर्धन के प्रयासों के जरिए इस साल सखी मंडल से जुड़े करीब 15 लाख परिवारों को कृषि आधारित आजीविका से जोड़ा जा रहा है। जिसमें करीब 4 लाख बाहर से लौटे प्रवासियों को भी शामिल किया गया है।

हजारीबाग के दारु स्थित अपने गांव पुनई लौटे लखन राणा मुंबई में मजदूरी करते थे। कोरोना काल में ये अपने गांव लौट आए। लखन बताते हैं, मेरी पत्नी बबीता , लक्ष्मी सखी मंडल से जुड़ी है और हम मिलकर खेती में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। खरीफ में खेती के लिए अरहर, मूंग, उड़द एवं मक्का का बीज जेसएलपीएस की तरफ से उपलब्ध कराया गया है। सब्सिडी पर बीज मिलने की वजह से ही हम धान के अलावा ये खेती कर दलहन की भी खेती कर पा रहे हैं।

लखन आगे बताते है कि अब मुंबई जाने का इरादा नहीं है। हमलोग खेती में ही आगे काम करेंगे।

देवघर के मधुपुर प्रखण्ड स्थित सुगापहाड़ी गांव के रहने वाले खुर्शीद बताते हैं कि कोविड की वजह से केरल में पेंटर की नौकरी चली गई, पैसे की किल्लत है, ऐसे में मछली पालन मेरे लिए राहत का जरिया बना है।

उन्होंने कहा, मेरी मां सखी मंडल से जुड़ी हैं और मैंने 2 लाख जीरा लिया है। अब मछली के जीरा से ही तुरंत कुछ कमाई हो जाएगी , साथ ही मछली पालन से आगे और भी कमाई होगी।

राज्य में करीब 10,000 अति विशिष्ट आदिम जनजाती (पीवीटीजी) परिवारों के आजीविका प्रोत्साहन एवं कुपोषण से जंग के लिए पोषण वाटिक किट का वितरण भी किया गया है। पीवीटीजी परिवार को उपलब्ध कराए गए इस किट में कुपोषण से लड़ाई में सहायक विभिन्न साग-सब्जियों के बीज होते हैं।

जेएसएलपीएस के सीईओ राजीव कुमार का दावा है कि इससे खरीफ फसलों में राज्य के उत्पादन को बढ़ोतरी के पथ पर ले जाने में मदद मिलेगी, वहीं आपदा के इस दौर में उच्च गुणवत्ता बीज से किसानों को उत्पादों के जरिए अच्छा लाभ होगा।

--आईएएनरएस

एमएनपी-एसकेपी

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