भारतीय खिलौनों के माध्यम से रचनात्मकता को बढ़ाने के प्रयास

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नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ऐसे खिलौनों व खिलौना उद्योग को बढ़ावा दे रही है, जो बच्चों को प्रेरित और शिक्षित करने में सक्षम हो। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत भी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा में खिलौनों को सीखने का माध्यम बनाया गया है।

अब केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने खिलौना उद्योग को भारतीय कारीगरों की मदद करने तथा खिलौनों के माध्यम से रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया है। खिलौने दुनिया भर के बच्चों को प्रेरित और शिक्षित करते हैं।

जितिन प्रसाद ने भारत की खिलौना निर्माण विरासत का जश्न मनाने के लिए भी प्रेरित किया। वह टॉय सीईओ मीट के दूसरे संस्करण में बोल रहे थे। जिसने भारतीय और वैश्विक खिलौना उद्योग के बीच सहयोग के लिए एक मंच प्रदान किया। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक खिलौना हब के रूप में स्थापित करने के मिशन की दिशा में काम करना है।

इस कार्यक्रम में वॉलमार्ट, अमेजन, स्पिन मास्टर, आईएमसी टॉयज आदि सहित प्रमुख वैश्विक खिलाड़ियों और सनलॉर्ड अपैरल्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, प्लेग्रो टॉयज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, आदि सहित घरेलू खिलौना उद्योग के सदस्यों ने भाग लिया।

हितधारकों के साथ चर्चा के दौरान वॉलमार्ट, आईएमसी टॉयज, स्पिन मास्टर आदि जैसे खिलौना क्षेत्र के दिग्गजों ने अपनी विकास यात्रा के बारे में बात की और भारत में अपने खिलौना व्यवसाय का विस्तार करने के लिए उत्साह व्यक्त किया।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप शिक्षा मंत्रालय द्वारा 3 से 8 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षण-अध्यापन सामग्री भी लॉन्च की जा चुकी है। राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा के तहत विकसित यह ‘जादुई पिटारा’ 13 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। जादुई पिटारा’ में यह सुनिश्चित किया गया है कि केवल किताबें ही नहीं, बल्कि सीखने और सिखाने के लिए अनगिनत संसाधनों का उपयोग किया जाना है। जैसे कि खिलौने, पहेलियां, कठपुतलियां, पोस्टर, फ्लैश कार्ड, वर्कशीट्स और आकर्षक किताबें, स्थानीय परिवेश जादुई पिटारा में ये सभी समाहित हैं।

‘जादुई पिटारा’ के अंतर्गत कक्षा 1 और 2 (उम्र 6-8 साल) के बच्चे खेलते, मजे करते हुए सीखते हैं। खास तौर पर 5 क्षेत्रों में सीखना और विकास शामिल है। इनमें शारीरिक विकास, सामाजिक-भावनात्मक नैतिक विकास, संज्ञानात्मक विकास, भाषा एवं साक्षरता विकास, सुरुचिपूर्ण एवं सांस्कृतिक विकास, सीखने की सकारात्मक आदतों को इस चरण में विकास के एक अन्य क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है। बच्चों को सिखाने और पढ़ने की इस प्रक्रिया में प्लेबुक, खिलौने, पहेलियां, पोस्टर, फ्लैश कार्ड, कहानी की किताबें, वर्कशीट के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, सामाजिक संदर्भ और भाषाओं को शामिल किया गया है।