Kharinews

विश्व रंग में वक्ताओं ने कहा, गांधी और टैगोर ने एक स्वस्थ लोकतंत्र का देखा था स्वप्न

Nov
09 2019

टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव विश्व रंग का छठा दिन, विभिन्न सत्रों में समसामयिक व ज्वलंत मुद्दों पर वक्ताओं ने रखे विचार, पद्मश्री रमाकांत गुंदेचा को दी श्रद्धांजलि

भोपाल: 09 नवंबर/ टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव विश्व रंग के छठे दिन शनिवार की शुरुआत से पहले मिंटो हॉल के सभागार में ध्रुपद गायन में विश्व कीर्तिमान स्थापित कर चुके पद्मश्री स्व. श्री रमाकांत गुंदेचा को भावपूर्ण श्रद्धाजंलि दी गई। गौरतलब है कि स्व. रमाकांत गुंदेचा का शुक्रवार को आकस्मिक निधन हो गया था। इससे पहले विश्वरंग के पांचवें दिन मंगलाचरण के दौरान उन्हें सम्मानित किया गया था। ‘गांधी और टैगोर : विरासत और लोकतंत्र पर’ हुए व्याख्यान में वक्ताओं ने कहा गांधी औऱ टैगोर ने एक स्वस्थ लोकतंत्र का स्वप्न देखा था।

मंगलाचरण : सत्येंद्र सोलंकी, भास्कर दास ने पेश की संतूर और बांसुरी की जुगलबंदी

टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव विश्वरंग के छठे दिन मिंटो हॉल के भव्य सभागार में आयोजित मंगलाचरण में सत्येंद्र सोलंकी और भास्कर दास ने संतूर और बांसुरी की जुगलबंदी के सुर और तानों के साथ आगाज किया। उन्होंने 'वैष्णव जन तो तेने कहिए, जो पीर पराई जाने' से स्व. रमाकांत गुंदेचा को श्रद्धांजलि देते हुए अपने वादन का आरंभ किया। क्रमशः एकला चलो रे, साचो तेरो नाम जैसे पदों की संगीतमय प्रस्तुति दी।

विश्वरंग : गांधी और टैगोर : विरासत और लोकतंत्र पर व्याख्यान

टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव विश्व रंग के छठे दिन के मुख्य सत्र में मिंटो हॉल के सभागार में ‘गांधी और टैगोर : विरासत और लोकतंत्र पर’ व्याख्यान हुए। इसमें डॉ नंदकिशोर आचार्य, सुधीर चंद्रा, रमेशचंद्र शाह के साथ संतोष चौबे ने अपने विचार और अनुभव साझा किए। सत्र की अध्यक्षता रमेशचंद्र शाह ने की। सत्र का कुशल संचालन विश्व रंग के निदेशक संतोष चौबे ने किया। छठे दिन के मुख्य सत्र में व्याख्यान में गांधी और टैगोर के विचारधाराओं, उनकी विरासत एवं उनके हिसाब से कल्पित लोकतंत्र की अवधारणाओं पर विचार प्रस्तुत किए गए। इस दौरान ये बातें उभरकर सामने आईं कि गांधी और टैगोर की विचारधारा एक जैसी ही थी और थोड़ी बहुत असहमतियों के साथ उन्होंने एक स्वस्थ लोकतंत्र का स्वप्न देखा था।

गांधी और टैगोर की विरासत के लिए इतिहास को खंगालना चाहिए- संतोष चौबे

टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, ख्यातिलब्ध साहित्यकार व विश्व रंग के निदेशक संतोष चौबे ने कहा कि जब हम गांधी और टैगोर की विरासत के बारे में बात करें तो हमें इतिहास को खंगालना चाहिए। क्योंकि इन सभी सवालों के जवाब हमारे इतिहास में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि गांधी और टैगोर की विचारधारा एक अंतर्राष्ट्रीय विचारधारा है। वे दोनों देश की सीमाओं से परे संपूर्ण विश्व में मानवता का स्वप्न देखते थे और इसी के लिए जीवनभर संघर्षरत रहे।

गांधी के लोकतंत्र का नाम स्वराज है - डॉ नंदकिशोर आचार्य

गांधी और टैगोर : विरासत और लोकतंत्र के सत्र की शुरुआत करते हुए गांधीवादी विचारधारा के पोषक डॉ. नंदकिशोर आचार्य ने कहा कि विरासत के माने क्या है ? जो हमारे पूर्वज अधूरा छोड़ गए हैं, उसे पूरा करना ही विरासत है। गांधी ने कभी अपने आप को किसी राजसत्ता से नहीं जोड़ा। लोकतंत्र के बारे में गांधी स्वराज को प्राथमिकता देते थे। मगर आज लोकतंत्र के नाम पर जो केंद्रीकरण हो रहा है, वह देश के लिए घातक है। गांधी के लिए सभ्यता का अर्थ सदाचार था और वहीं टैगोर मनुष्य से मनुष्य के बीच के संबंधों को सभ्यता मानते हैं।

गांधी और टैगोर के प्रति अपार श्रद्धा है -सुधीर चंद्रा

गांधी और टैगोर के प्रति अपनी अपार श्रद्धा व्यक्त करते हुए प्रख्यात इतिहासकार सुधीर चंद्रा ने कहा कि जब बड़े लोग चूक कर जाएं तो हमारी क्या बिसात। सुधीर चंद्रा का मानना है कि गांधी और टैगोर मानवतावाद के सच्चे प्रेषक हैं।

टैगोर और गांधी का एक साथ प्रकट होना भारत का सौभाग्य है - रमेशचंद्र शाह

पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात कथाकार एवं साहित्यकार के साथ-साथ अपनी आलोचनाओं से विश्व प्रसिद्ध हुए और सत्र की अध्यक्षता कर रहे रमेशचंद्र शाह ने कहा यह भारतीयों का सौभाग्य है कि इतने परस्पर वैचारिक विरोधाभास के लोग भारत में एक साथ प्रकट हुए।

अंधविश्वास पर विश्वास ना करें- सारिका घारू

टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव विश्व रंग के छठे दिन छात्रों के लिए विज्ञान कार्यशाला का आयोजन भी किया गया। इस दौरान मोहन सगोरिया, सुचि मिश्र, सारिका घारू, देवेंद्र मेवाड़े, मधु पंत, बृजेश दीक्षित के साथ डॉ. जाकिर अली ने विज्ञान के नुस्खे छात्रों को बताए। वही छात्रों के मन में उस कार्यशाला को लेकर खासा उत्साह दिखा। कार्यशाला के अंत तक सभी विशेषज्ञों ने छात्रों की जिज्ञासाओं को अपने अनुभव और विचारों से शांत किया। कार्यशाला का संचालन मोहन सागोरिया ने किया।

जो अप्राकृतिक है वह भी स्वाभाविक है- थर्ड जेंडर के कवियों का रचनापाठ,

मिंटो हॉल में ट्रांसजेंडर ने रचनाओं के माध्यम से बयां किया दर्द

टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य और कला महोत्सव 'विश्व रंग' के छठे दिन मिंटो हॉल में ट्रांसजेंडर कवियों का रचनापाठ हुआ। इसमें उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से अंतर्दवंद्व और समाज के दोहरे रवैए को व्यक्त किया। सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित चित्रा मुद्गल ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि लिंग से वंचित होने के बावजूद कभी भी अपने घर से एक बच्चे को भी नहीं छोड़ना चाहिए| हमेशा समझना चाहिए कि मानव पहले आया और धर्म बाद में। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि जो अप्राकृतिक है वह भी स्वाभाविक है। लीलाधर मंडलोई आयोजन के समन्वयक थे। शास्त्रीय नृत्यांगना ट्रांसजेंडर विप्लव घोष ने महाभारत के चरित्र अम्बा पर अपनी एक कविता को नृत्य के साथ प्रस्तुत किया, जो हाल ही में एक गीत के रूप में रिकॉर्ड किया गया था।

मैं सही लिंग में हूं लेकिन गलत दुनिया में- धनंजयसिंह चौहान

रशियन, फ्रेंच व कम्प्यूटर विज्ञान में डिप्लोमाधारी और कनाडाई वाणिज्य दूतावास, ब्रिटिश और भारत सरकार के साथ मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में काम करने वाले धनंजयसिंह चौहान ने "मैं एक औरत नहीं, एक गौरान्वित महिला हूँ" कहकर अपना व्याख्यान शुरू किया। उन्होंने विश्व रंग का धन्यवाद करते हुए कहा यह समावेश और शिक्षा का मार्ग है। उन्होंने कहा, "यह गलत नहीं है क्योंकि यह प्रकृति की विविधता है।" तीसरे लिंग का संघर्ष जन्म से शुरू होता है। समाज लिंग तय करता है, बाकी सब कुछ जैविक है और बच्चे के पास सब कुछ है लेकिन उसका अपना कुछ भी नहीं है। उन्होंने इंग्लैंड, एथेंस, फ्रांस, हॉलैंड, जर्मनी सहित कई देश-विदेश में व्याख्यान भी दिए और कई स्थानों पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया।

उन्होंने समाज में उनके संघर्ष, उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के बारे में बताते हुए कहा कि आत्मा जीती रही और मैं मरती रहती रही। उन्होंने परिवार की खातिर अपनी पहचान छिपाकर अपनी शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल की थी| धनंजय ने 2016 में पंजाब विश्वविद्यालय में अपनी शिक्षा के दौरान, एक भेदभाव रहित वातावरण के लिए शैक्षणिक संस्थान में अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। उन्होंने अपने जीवन पर एक कविता और अमीर खुसरो की कुछ काव्य पंक्तियों के साथ अपनी बात खत्म की|

एकला चलो रे… डॉ. मानबी बंदोपाध्याय

पश्चिम बंगाल से आई भारत के प्रथम ट्रांस जेंडर कॉलेज की प्राचार्य डॉ. मानबी बंदोपाध्याय ने रबींद्रनाथ टैगोर की एकला चलो रे के हिंदी संस्करण के साथ अपने कविता की शुरुआत की। वे देश की पहली पीएचडी ट्रांसजेंडर महिला हैं। उन्होंने "मैं क्या ख़ुद एक कविता हूँ, मेरा जीवन एक कठिन सा" और "मैं तृतीया" जैसी कविताओं का पाठ किया। उन्होंने टैगोर के ही एक अन्य गीत के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।

"भगवान भी भगवान हैं, वो ना तो लड़का है और ना लड़की " – देबज्योति भट्टाचार्य

कॉलेज प्रोफेसर देबज्योति भट्टाचार्य ने आदीकवि वाल्मीकि के पहले दोहे के साथ अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की और विश्व रंग को वाल्मीकि के रूप में मान्यता देने के लिए धन्यवाद दिया। उनकी पहली कविता "सपना" थी और दूसरी "सवाल- सवाल ये नहीं कि मैं कौन हूँ, सवाल ये है की मैं कौन हूँ"। उन्होंने कहा कि भगवान भी भगवान ही है वो ना तो लड़का है और ना लड़की।

प्रकृति कन्या है, मैं हूं प्रकृति कन्या : आलिया शेख

एलबीजीटी समुदाय की काउंसलर आलिया शेख ने अपनी कविता "प्रकर्ति कन्या, मैं हूँ प्रकर्ति कन्या, मैं हु एक नारी" का पाठ किया। पश्चिम बंगाल में गणित और हाई स्कूल की अध्यापिका प्रफुतिता सुगंधा ने इस निमंत्रण के लिए रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय को धन्यवाद दिया और कविता "तोफान" का पाठ किया।

आसमान का कोई लिंग नहीं : पार्थसारथी मजूमदार

ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ काम करने वाले पार्थसारथी मजूमदार ने एक कविता "प्राकृत" का पाठ किया और दूसरी कुछ पंक्तियों में कहा गया है कि "आसमान का कोई लिंग नहीं है"। इसके अलावा रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय कोलकाता से अध्ययन करने वाले रिंटू दास ने भी अपनी प्रस्तुति दी। जिन्होंने महाभारत में अर्जुन के ट्रांसजेंडर चरित्र वृहन्नला का किरदार निभाया था।

विश्व रंग की अन्य ख़बरें

विश्व रंग में प्रवासी साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से किया अभिभूत

विश्व रंग महोत्सव में उमड़े हजारों लोग, विभिन्न सत्रों में ज्वलंत मुद्दों पर वक्ताओं ने रखे विचार

विश्व रंग : मुशायरे में नामचीन शायरों ने बांधा शमा, राहत इंदौरी की आत्मकथा का विमोचन

विश्व रंग : कला और संस्कृति देती है जीवन जीने की कला - संतोष चौबे

अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव विश्वरंग का तीसरा दिन संगीत, कविता, संवाद और नाट्य मंचन के नाम रहा

"विश्व रंग" महोत्सव में बिखरे रबीन्द्र संगीत के रंग, भारत भवन में सात दिन तक रहेगी चित्रकला प्रदर्शनी

"विश्व रंग" का रंगारंग शुभारम्भ, राज्यपाल ने कहा गुरूदेव को इस आयोजन से बड़ी श्रद्धांजलि नहीं हो सकती

अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव "विश्व रंग" का आगाज आज से, विमर्श, संवाद के साथ होंगे कई रंगारंग कार्यक्रम

टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य-कला महोत्सव की सहयोगी साहित्यिक संस्थाओं के साथ ‘‘विश्व रंग-सृजन संवाद’’

Related Articles

Comments

 

चुनाव आयोग से मिलती जुलती वेबसाइट का पर्दाफाश, एक पकड़ा गया

Read Full Article

Subscribe To Our Mailing List

Your e-mail will be secure with us.
We will not share your information with anyone !

Archive