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विश्व रंग महोत्सव में उमड़े हजारों लोग, विभिन्न सत्रों में ज्वलंत मुद्दों पर वक्ताओं ने रखे विचार

Nov
08 2019

भोपाल: 08 नवंबर/ टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव विश्व रंग में पांचवें दिन शुक्रवार की शुरुआत ‘टैगोर, फैज और इकबाल’ विषय पर व्याख्यान से हुईं। इसमें वक्ताओं ने भारतीय साहित्य को सही दिशा देने में इन विभूतियों के योगदान को स्पष्ट किया। इसी सत्र में अन्य विषय ‘21वीं सदी में विश्व साहित्य’ पर चर्चा करते हुये वक्ताओं ने विश्व साहित्य की पूर्व अवधारणाओं से परिचित कराते हुये वर्तमान में उसमें आये बदलाव से सभी को रूबरू कराया।

टैगोर, फैज और इकबाल विषय के व्याख्यान के दौरान देश के जाने-माने वरिष्ठ साहित्यकार इंद्रनाथ चौधरी ने कहा अल्लामा इकबाल कहते थे कि खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बन्दे से पूछे तेरी रज़ा क्या है ? आगे बताते हुए उन्होंने कहा कि वही शायर रह जाता है जो दिलों की धड़कन पकड़ता है। वहीं टैगोर की विरासत को याद करते हुए वे कहते हैं कि टैगोर का मानना था कि प्रेम सबसे बड़ा स्वर्ग सुख है। फ़ैज़ की शायरी आज भी रोशन अलाव की तरह है जो कि आज भी हम सभी से सवाल पूछती हैं।

अभिव्यक्ति की आज़ादी के स्त्री स्वर को विश्व के आयामों तक पहुंचाने वाली वरिष्ठ रचनाकार मृदुला गर्ग इकबाल और टैगोर को एक ही मानती हैं क्योंकि दोनों धर्म मज़हब का अलगाव नहीं मानते थे। इसी के साथ सूफी इकबाल हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच कोई फर्क नहीं मानते थे।

वर्तमान समय के साधक आलोचक डॉ. धनंजय वर्मा ने बताया कि टैगोर मानते थे कि हमारा आश्रय मानवता है और हमें अतीत के आतंक से मुक्त स्वत्रंतता की अवधारणा के प्रतीक प्रस्तुत करना है। टैगोर सभ्यताओं के संघर्ष में विश्वास नहीं करते थे। फ़ैज़ के बारे में बताते हुए कहा कि वो एक कौम, एक समय के ही शायर नहीं थे। हमारी सांस्कृतिक विरासत वसुधेव कुटुंबकम को रेखांकित करती है, लेकिन आजकल तथाकथित लोगों ने अपने कुटुंब को ही वसुधेव मान लिया है। सत्र का संचालन टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केंद्र के निदेशक विनय उपाध्याय ने किया।

विश्वरंग : '21 वीं सदी के साहित्य' पर चर्चा

टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव विश्व रंग में पांचवें दिन शुक्रवार को दूसरे सत्र में 21वीं सदी के साहित्य पर चर्चा की गई। इस सत्र के समन्वयक लेखक, चिंतक श्री यादवेंद्र रहे, अध्यक्षता चित्रकार, लेखक प्रभु जोशी ने की और संचालन डॉ संगीता पाठक ने किया।

भारत के लोग विलक्षण प्रतिभा के धनी - मशीले

फिलीपींस से आईं साहित्यकार लेबो मशीले ने कहा कि विश्वरंग में आना मेरे लिए गर्व की बात है। भारत के पास विलक्षण प्रतिभा के धनी लोग हैं, इसलिए यहां का साहित्य इतना धनी है। आजकल के युवा लेखक सहित्य लिखने के तरीके को नया आकार दे रहे हैं, जिसके बारे में हम कभी सोच भी नहीं सकते थे। डिजिटल मीडिया के जरिये अब भाषा की सीमाएं खत्म हो गयी हैं।

जो दिखाया जा रहा है केवल वही सच नहीं – जोशी

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रभु जोशी ने कहा कि सदी के सिर्फ दो दशक साहित्य के परिचायक नहीं हो सकते। हम पश्चिम का स्वप्न देखने लगे हैं, हमारी विचारधारा पश्चिम के जैसे ही हो गई है। हम जो देख रहे हैं और जो दिखाया जा रहा है वह दोनों अलग हैं उनमें बहुत ज्यादा फर्क है। हिंदुस्तान में ग्लोबलाइजेशन अगर अपनी शर्तों पर आता है तो देश में बदलाव आना तय है। दुनिया में अब जो बदलाव आने वाला है वो सांस्कृतिक उद्यमों से आएगा। संस्कृति में परिवर्तन से अब हमारा परिवार और समाज भी बदल रहा है। हम लोग अब स्वप्न भी पश्चिम के देख रहे हैं, हम जो देख रहे हैं वो सत्य नहीं है। लेखकों को आज के परिप्रेक्ष्य को समझना बेहद ज़रूरी है।

दलित, स्त्री और समलैंगिक साहित्य 21वीं सदी के साहित्य की बड़ी उपलब्धि है- विजय शर्मा

वरिष्ठ साहित्यकार विजय शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्य एक सतत प्रक्रिया है और हम साहित्य की विरासत को कभी नकार नहीं सकते। इस सदी के साहित्य में दलित साहित्य, स्त्री साहित्य, समलैंगिक साहित्य की मुखर आवाज सुनाई पड़ती है, जो इस विश्व साहित्य की सबसे बड़ी उपलब्धि है। विश्व रंग पर शर्मा ने कहा कि विश्व रंग जैसा समारोह अब तक नहीं देखा, यह एक महायज्ञ है जिसमें विश्व के कई देशों के लोग शामिल हैं। टैगोर को याद करते हुए विजय शर्मा ने कहा कि टैगोर की आलोचना बहुत से लोगों ने की लेकिन वर्तमान परिदृश्य में उन आलोचकों को कोई नहीं जानता वहीं दूसरी ओर टैगोर विश्व प्रख्यात हैं।

लेखिका किरण सिंह वनमाली विशिष्ट युवा पुरस्कार से सम्मानित

विश्व रंग के पांचवें दिन मिंटो हॉल के मुख्य सभागार में प्रख्यात लेखिका, आलोचक, कथाकार, अनुवादक किरण सिंह को वनमाली विशिष्ट युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विश्वरंग के निदेशक संतोष चौबे ने उन्हें शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह के साथ एक लाख रुपए के नगद पुरस्कार से सम्मानित किया। इस दौरान विजय शर्मा, प्रभु जोशी, लीलाधर मंडलोई भी मंच पर मौजूद रहे। किरण सिंह ने उनको मिले सम्मान को आने वाली पीढ़ी के लेखकों समर्पित किया। उन्होंने कहा कि विश्वरंग से मिली सम्मान राशि को वे लखनऊ की प्रगतिशील लेखन संस्था को देंगी ताकि पठन-पाठन की गतिविधियों को और बढ़ावा मिल सके।

मंगलाचरण : अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों ने किया भक्ति पदों का ध्रुपद गायन

टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव विश्व रंग के पांचवें दिन शुक्रवार को मंगलाचरण में गुरुकुल संस्थान भोपाल के कलाकारों ने भक्ति पदों का ध्रुपद गायन प्रस्तुत किया। करीब 50 कलाकारों के समूह में भारतीय संगीतकारों के साथ कनाडा, इटली, लंदन, फ्रांस आदि देशों के कलाकार भी शामिल हुए। गुरुकुल संस्थान के कलाकारों ने रबींद्र संगीत पर आधारति प्रथम आदि तत्व शक्ति, राग चारुकेशी पर कबीर गान, शंकर गिरिजापति जैसे भक्ति पदों की सुरमय प्रस्तुति दी। तबला, हार्मोनियम, ढोलक, मृदंग, पखावज जैसे वाद्य यंत्रों की सुंदर संगत ने प्रस्तुति को और भी संगीतमय बनाया। गौरतलब है कि गुरुकल संस्थान के सभी कलाकार विश्व ख्याति प्राप्त पद्मश्री गुंदेचा बंधुओं से प्रशिक्षित हैं। इस दौरान गुंदेचा बंधु भी सभागार में मौजूद रहे। उन्हें विश्व रंग के निदेशक संतोष चौबे ने स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।

1000 से ज्यादा विद्यार्थियों ने देखे कला के विविध रूप

विश्व रंग महोत्सव में कला के विविध रूप देखने के लिए भोपाल के करीब 20 स्कूलों के 1000 से ज्यादा विद्यार्थी शुक्रवार को मिंटो हॉल पहुंचे। एक के बाद एक उन्होंने जलियांवाला बाग प्रदर्शनी, पुस्तक प्रदर्शनी, मुखौटा प्रदर्शनी देखने के साथ विभिन्न कार्यक्रमों को देखा। इस दौरान विद्यार्थियों ने देश-विदेश से पधारे हुए वरिष्ठ रचनाकारों से भी मुलाकात की।

बच्चों ने थिएटर वर्कशॉप में सीखी अभिनय की बारीकियां

उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों को कला, रंगमंच, संस्कृति और साहित्य से जोड़ने के उद्देश्य से विश्व रंग महोत्सव में थिएटर कार्यशालाएं भी आयोजित हुईं। भोपाल के प्रसिद्ध रंग निर्देशक मनोज नायर, नीति श्रीवास्तव, प्रेम गुप्ता, सिद्धार्थ वाडे, आकांक्षा ओझा, हेमंत देवलेकर और अन्य ने छात्रों को रंगमंच की बारीकियों से अवगत कराते हुए थियेटर के कई गुर सिखाए। इस दौरान इन्होंने छात्रों को माइम, संगीत, नैपथ्य, क्राफ्ट के बेहतर उपयोग और रंगमंच पर प्रस्तुति देने के बारे में जीवंत प्रस्तुतियों के जरिए बताया गया।

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