Kharinews

देश में कोरोना से होने वाली मौतों के मामले में मध्यप्रदेश चौथे नम्बर पर

Jun
03 2020

मप्र में 2 जून तक 364 लोगों की हुई मौत
साढ़े 8 हजार है कोरोना पॉजिटिव

रानी शर्मा

"सुख का दाता सब का साथी शुभ का यह संदेश है" वाले मध्यप्रदेश में सब अशुभ ही हो रहा है। हालत ये है कि देश में कोरोना से होने वाली मौतों के मामले में मप्र चौथे नम्बर पर पहुंच गया है। अब तक 364 लोग अपनी जान गवां चुके हैं  और 8420 लोग 2 जून तक कोरोना पॉज़िटिव हो चुके है, फिर भी सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ये कहते नहीं थक रहे है कि कोरोना मामूली सर्दी-जुक़ाम ही तो है ! इन अकाल मौतों की जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ मप्र और देश की भाजपा सरकार की है, जो प्रदेश में कोरोना पर नियंत्रण नहीं कर पाई। 

मप्र में 23 मार्च तक सरकार बनाने के जुनून के चलते मुख्यमंत्री शिवराज चौहान पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए ये कहने से भी नहीं चूके थे कि वो कोरोना का नाटक कर रहे है। मप्र में सरकार बनाने के लिए भाजपा ने विधायकों की जोड़-तोड़ करने के लिए देश और प्रदेश की जनता को कोरोना से बचाने में लापरवाही बरती। सरकार बनने के बाद करीब एक माह तक मुख्यमंत्री अपने हाथ में ही प्रदेश लिए रहे "वन मैन आर्मी " की तरह । मप्र में स्वास्थ्य मंत्री ही नहीं था, फिर 5 विधायकों को 22 अप्रैल को शपथ दिलाई गई , लेकिन अब तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पाया।

सरकार के नाम पर मात्र 6 व्यक्ति जिसमें 1 मुख्यमंत्री और 5 मंत्री ही प्रदेश की साढ़े 7 करोड़ जनता की इस कोरोना काल में देखभाल कर रहे हैं, जो आधे समय तो मीडिया-कैमरे के सामने बैठे रहते हैं। ऐसे में प्रदेश की जनता किन परेशानियों से दो-चार हो रही है,ये देखने वालों की कमी है। वास्तव में सरकार की लापरवाही का ही नतीजा है कि अब तक कोरोना से 364 लोगों की अकाल मौत हो चुकी है और देश में हमारे प्रदेश का नाम कोरोना मौतों के लिए चौथे नम्बर पर पहुँच गया है।

क्या यह संभव है कि प्रदेश की साढ़े 7 करोड़ जनता , जिसे मुख्यमंत्री भगवान मानते है, उसकी देखभाल सरकार के नाम पर मात्र छह व्यक्ति कर सकते हैं? लेकिन आश्चर्य है कि ढाई महीने में जो सरकार मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं कर पाई, वह प्रदेश की जनता की कोरोना काल में क्या रक्षा कर पाएगी?

वास्तव में इस दौर में सरकार को जल्द से जल्द मंत्रिमंडल का विस्तार करना चाहिए था ताकि जिम्मेदारियों का बंटबारा होने से प्रदेश की व्यवस्था सुचारू रूप से चल पाती लेकिन लगता है कि जनता की सरकार को चिंता ही नहीं है, सिर्फ सत्ता पाने की लालसा भाजपा को थी, उसके लिए साम दाम दंड भेद सभी नीति अपनाकर सत्ता हासिल करने में कोई परहेज नहीं किया और जनता को उसके हाल पर ही छोड़ रखा है। सूत्रों की माने तो चर्चा ये भी जोरों पर है कि प्रदेश को कोरोना नियंत्रण के लिए केंद्र से मिले बजट को पूरा खर्च कर लेने के बाद ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। 

मप्र में कोरोना पर समय रहते सही नीति अपनाकर नियंत्रण किया जा सकता था, ये बात मध्यप्रदेश की सीमा से लगी छत्तीसगढ़ सरकार से मप्र को सीखना चाहिए, जहां अब तक कोरोना से मात्र एक मौत हुई है, मध्य प्रदेश में सरकार का ध्यान कोरोना नियंत्रण से ज्यादा शराब की दुकान खुलवाने पर है ताकि ज्यादा से ज्यादा राजस्व सरकार को प्राप्त हो सके। वास्तव में पिछले 15 साल में शिवराज सिंह चौहान  सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया ही नहीं ,अगर स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने पर ध्यान दिया होता तो प्रदेश में कोरोना से अब तक इतने लोगों की जान नहीं जाती।

हालत यह है कि कोरोना नियंत्रण के लिए सरकार के पास पर्याप्त सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं ही नहीं है। कोरोना के मरीज सामने आने के साथ ही सरकार निजी अस्पतालों की शरण में जा बैठी । मुझे इस बात से आपत्ति नहीं है कि निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज करवाया गया। आपत्ति इस बात से है कि 3 कार्यकाल में भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया नहीं करा पाए । इसका नतीजा है कि अधिकांश जिलों में कोरोना मरीजों को इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाओं की कमी है।

राजधानी भोपाल में भी सरकारी मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद पहले कोरोना के मरीजों का इलाज वहां नहीं कराया गया, बल्कि एक निजी अस्पताल को कोरोना मरीजों के इलाज के लिए लाखों रुपये की धनराशि बड़े पैमाने पर दी जाएगी । क्या यह सरकार के लिए शर्म की बात नहीं है कि सरकारी तंत्र पूरी तरह से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा ना देकर निजी अस्पतालों को लाखों रुपए मरीजों के इलाज के लिए लगातार दे रहा है? आखिरकार ये वही पैसा है न, जो टैक्स के रूप में जनता से लिया जाता है और मनमाने तरीके से सरकार इसे खर्च करती है।

आखिरकार क्या वजह है की बड़े-बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेज-सरकारी अस्पताल इन निजी अस्पतालों के सामने बौने साबित हो रहे हैं? क्या सरकार जानबूझकर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को बढ़ावा नहीं दे रही ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को भी पूरी तरह से निजीकरण के रास्ते पर ले जाया जाए और सरकारी अस्पतालों को भी संचालित करने के लिए निजी स्वास्थ्य कंपनियों को बेच दिया जाए।

वास्तव में आज जनता को यह सवाल पूछने की जरूरत है कि हमारा प्रदेश किस ओर जा रहा है ? कोरोना से होने वाली मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ने के बाद भी सरकार चिंतित नहीं है। सरकार की चिंता अभी भी 24 सीटों पर उपचुनाव की तैयारी को लेकर ज्यादा नजर आ रही है, जनता का काम सिर्फ वोट देने तक ही सीमित होता जा रहा है। 

मप्र में कोरोना के मामले फैलने की शुरुआत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से ही हुई थी जिसका खामियाजा प्रदेश और भोपाल की जनता भुगत रही है। अफसोस इस बात का है कि कोरोना मामले सामने आने के बाद भी सरकार समय से रोकथाम नहीं कर पाई। वोट बैंक की खातिर दूसरे प्रदेशों से छात्रों-मजदूरों के आवागमन का सिलसिला जारी रखा। इसका नतीजा है कि प्रदेश के 51 जिलों तक कोरोना संक्रमण फैल चुका है जिसमें 42 जिलों में 10 से ज्यादा कोरोना के मरीज हैं, जबकि 9 जिलों में अभी 10 से कम मरीज सामने आए हैं।

सबसे ज्यादा संक्रमण के मामले इंदौर,भोपाल, उज्जैन,बुराहनपुर में है। इस स्थिति में जबकि मामले बढ़ रहे है, फिर भी इन जिलों से दूसरे जिलों में आवागमन अब बिना पास के किये जाने के नियम बन गए है। सब रोजगार के रास्ते खोलते जा रहे है ताकि सरकार के ऊपर किसी तरह का दवाब न रहे। न कोरोना नियंत्रण के लिए और न ही जनता को आर्थिक मदद का। जनता की ही हर बात के लिए जवाबदेही तय करने की ही रणनीति अपनाई जा रही है, जो एक तरह से प्रदेश की जनता के साथ धोखा है, कि उसे उसके हाल पर छोड़कर कोरोना को बढ़ावा दिया जा रहा है।

About Author

रानी शर्मा

लेखिका www.kharinews.com की सम्पादक हैं.

Related Articles

Comments

 

कोविड-19 के डर से अपने माता-पिता के साथ लोनावला पहुंचे करण टेकर

Read Full Article

Subscribe To Our Mailing List

Your e-mail will be secure with us.
We will not share your information with anyone !

Archive