लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव : अमित शाह ने मंत्रियों और एनडीए सहयोगियों के साथ बनाई रणनीति

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नई दिल्ली, 25 जून (आईएएनएस)। लोकसभा अध्यक्ष पद पर चयन को लेकर सरकार और विपक्षी दलों के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण बुधवार को सदन में चुनाव होना तय माना जा रहा है।

केंद्र में पीएम मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार एनडीए सरकार के गठन के बाद लोकसभा में सरकार और विपक्ष के बीच यह पहला शक्ति प्रदर्शन होने जा रहा है। इसलिए भाजपा के रणनीतिकार अपने उम्मीदवार ओम बिरला को ज्यादा से ज्यादा सांसदों के समर्थन के साथ बड़ी जीत दिलवाने के मिशन में जुट गए हैं और इसकी कमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं संभाल ली है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को पहले पार्टी नेताओं एवं वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए होने वाली चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा की।

बताया जा रहा है कि अमित शाह ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, भूपेंद्र यादव, प्रल्हाद जोशी, अर्जुन राम मेघवाल, धर्मेंद्र प्रधान और अन्य मंत्रियों के साथ बैठक कर अन्य दलों को साधने की रणनीति पर चर्चा की। इसके बाद शाह ने शाम को एनडीए गठबंधन में शामिल सहयोगी दलों के नेताओं के साथ भी बैठक की।

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा विपक्षी गठबंधन में शामिल कई ऐसे दलों के संपर्क में भी है, जो कांग्रेस द्वारा अपना उम्मीदवार खड़ा करने से सहमत नहीं है। वहीं, पार्टी के नेता ऐसे दलों का भी समर्थन हासिल करने के लिए प्रयास कर रहे हैं, जो कांग्रेस वाले विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।

बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर सबसे पहले उन नवनिर्वाचित सांसदों का नाम पुकारा जाएगा, जिन्होंने अब तक संसद सदस्यता की शपथ नहीं ली है। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी सदन में नए लोकसभा अध्यक्ष के तौर पर ओम बिरला के नाम का प्रस्ताव रखेंगे और सभी दलों से उन्हें निर्विरोध सर्वसम्मति से चुनने का आग्रह करेंगे। अगर सरकार द्वारा किए गए आग्रह को स्वीकार कर विपक्ष की तरफ से के. सुरेश का नाम लोकसभा अध्यक्ष के उम्मीदवार के तौर पर प्रस्तावित नहीं किया जाएगा तो ओम बिरला निर्विरोध लोकसभा अध्यक्ष चुन लिए जाएंगे।

अगर विपक्ष की तरफ से अपने उम्मीदवार का नाम प्रस्तावित किया जाएगा तो फिर सदन में चुनाव करवाया जाएगा। यह बताया जा रहा है कि अगर लोकसभा अध्यक्ष पद को लेकर मतदान होता है और विपक्षी दल मत विभाजन की मांग करते हैं तो ज्यादा संभावना इस बात की है कि यह मतदान कागज की पर्ची द्वारा करवाया जाएगा।

शपथ ले चुके नवनिर्वाचित सांसद मतदान के जरिए यह तय करेंगे कि लोकसभा के नए स्पीकर कौन होंगे – ओम बिरला या के. सुरेश। हालांकि, सदन में संख्या बल की बात करें तो एनडीए गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर ओम बिरला का आसानी से चुनाव जीतना तय माना जा रहा है। लेकिन, भाजपा इसे बड़ी जीत में बदलना चाहती है।