भोपाल, 29 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सियासत तेज है। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस आमने-सामने हैं। इसी क्रम में दोनों दलों के बीच एक बार फिर वार-पलटवार देखा गया है।
कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शनिवार को मतदाता सूची में सुधार के लिए चल रहे अभियान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अनेक स्थानों से इस बात की शिकायतें आ रही हैं कि कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर हो रहा है।
जीतू पटवारी ने जानकारी दी कि कांग्रेस पार्टी मतदाता के अधिकार की रक्षा के लिए ‘वोट रक्षक’ नियुक्त कर रही है, जो हर वार्ड में जाकर नाम की बारीकी से जांच करेंगे।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मध्य प्रदेश इकाई के प्रमुख हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस पर सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि एसआईआर की शुरुआत जवाहरलाल नेहरू ने की और यह इंदिरा गांधी ने भी कराया, तो क्या वे लोग गलत थे।
हेमंत खंडेलवाल ने कहा, “सच्चाई यह है कि कांग्रेस को लगातार हार मिल रही है और वह अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए एसआईआर का विरोध कर रही है।”
इधर, एसआईआर प्रक्रिया की आड़ में साइबर फ्रॉड की आशंका भी जोर पकड़ने लगी है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा ने मतदाताओं को सतर्क करते हुए कहा है कि एसआईआर की प्रक्रिया में निर्वाचन विभाग या किसी अधिकारी की ओर से फोन, मैसेज पर ओटीपी, आधार नंबर और मोबाइल नंबर आदि मांगना प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। अगर कोई इस तरह की जानकारी मांगता है तो वह ‘साइबर फ्रॉड कॉल’ हो सकता है।
उन्होंने बताया है कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क है। किसी भी प्रकार की फीस, प्रोसेसिंग चार्ज, या भुगतान करने के लिए कहे जाने पर ध्यान दें। ऐसे संदेश कॉल धोखाधड़ी करने वाले हो सकते हैं। व्हॉट्सऐप या सोशल मीडिया पर मिले लिंक न खोलें।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने मतदाताओं से जल्द एसआईआर फॉर्म भरने की भी अपील की। इसके साथ ही साइबर कैफे का इस्तेमाल करते हुए सतर्क रहने को कहा है।




