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कविता

 

हिंदू चरमपंथियों को परोक्ष रूप से बढ़ावा दे रही है सरकार : रामानुन्नी

निखिल एम. बाबू नई दिल्ली, 21 फरवरी (आईएएनएस)। साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखक के. पी. रामानुन्नी का कहना है कि भाजपानीत केंद्रीय सरकार अप्रत्यक्ष रूप से हिंदू सांप्रदायिक चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई करने से बच...

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श्रद्धांजलि: दूधनाथ सिंह, निश्छिल, भोले, पारदर्शी, शैतान और जि़द के साथ जीते हुए लगते थे

रामप्रकाश त्रिपाठी दूधनाथ सिंह ऐसे विलक्षण कथाकार थे जिन्होंने कहानी-उपन्यास लेखन की क्षमता के साथ ही कविता, नाटक और आलोचना के क्षेत्र में काम किया। कहानी की साठोत्तरी पीढ़ी के प्रमुख क थाकारों में शुमार...

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पूनम की रात को भी चाँद गायब हो गया

अरुण कान्त शुक्ला अमावस की रात को चाँद का गायब होनाकोई नई बात नहींजहरीली हवाओं की धुंध इतनी छाईपूनम की रात को भी चाँद गायब हो गया|दिल में सभी के मोहब्बत रहती हैकोई नई बात...

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नाव में पतवार नहीं

अरुण कान्त शुक्ला हुजूर, आप जहां रहते हैं,दिल कहते हैं,उसे ठिकाना नहीं,शीशे का घर हैसंभलकर रहियेगा, हुजूरटूटेगा तो जुड़ेगा नहीं,यादों की दीवारे हैंइश्क का जोड़बेवफाई इसे सहन नहीं,ओ, साजिशें रचने वालोघर तुम्हारा हैक्या इसका एतबार...

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पीढ़ियाँ पर बढेंगी इसी राह पर आगे

अरुण कान्त शुक्ला कोट के क़ाज में फूल लगाने सेकोट सजता हैफूल तो शाख पर ही सजता है,क्यों बो रहे हो राह में कांटेतुम्हें नहीं चलनापीढ़ियाँ पर बढेंगी, इसी राह पर आगे,तुम ख़ूबसूरत हो, मुझे...

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तैरना आना पहली शर्त है

अरुण कान्त शुक्ला नाव भी मैं, खिवैय्या भी मैंलहरों से सीखा है मैंनेतूफां-ओ-आंधी का पता लगाना,जो बहे लहरों के सहारे, डूबे हैंतैरना आना पहली शर्त हैसमंदर में उतरने की,धारा के साथ तो बहते, शव हैं  ...

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हारी, मैं हारी

नैना शर्मा हारी, मैं हारी,दुनिया से नही, किसी और से नही,ख़ुद से हारी,हारी मैं हारी।हारी ख़ुद की ख़्वाहिशों से,तमन्नाओं से,तमन्नाओं से, महत्त्वकांछाओं से,जिसने वरण कर लिया मेरे,विश्वास का, विश्वास का स्वाभिमान का,हार गईं मैं मुझसे,...

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संदीप नाईक की कविता "तटस्थ"

संदीप नाईक एक दिन और बूढ़ा हो जाऊंगाउम्र से परे और कालातीतफिर सोचूंगा जीवन के बारे मेंतुम्हारे और उस सबके बारे मेंजो बीतते गया मेरे साथ और घटता गया कदम कदम परबूढ़ा होने पर स्मृति...

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न जाने क्यूँ

नैना राहुल शर्मा न जाने क्यूँ आज ये मन भर गया है,इसका भर जाना ही मन को साल रहा है,कोई अंजानी सी दहशत मन में मकाँ बना ली है,कोई डर आज मन को दहला रहा...

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बेटियाँ

नैना शर्मा क्यों समाज की हर कसौटी पर,कसी जाती हैं बेटियाँ,क्यों हर ग़ुनाह की,गुनहगार होती हैं बेटियाँ,फ़ितरत ही अज़ीब है इस जहाँ की,ग़लत करते हैं बेटे,पर सज़ा भुगतती हैं बेटियाँ।।क्यों बाँध के रखा है इन्हें,रस्मों...

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कोविड-19

 

कोविड-19 : ब्रिटेन में 359 नई मौतें, अब तक 39 हजार से अधिक की गई जान

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