नई दिल्ली, 29 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की अहमदाबाद स्थित विशेष अदालत ने शनिवार को ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, राजकोट के पूर्व सीनियर डिविजनल मैनेजर महेंद्र ए. लूनकर को रिश्वत लेने के मामले में दोषी करार देते हुए तीन साल की सख्त कैद (आरआई) और एक लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत का यह फैसला करीब 13 साल पुराने भ्रष्टाचार मामले पर आया है।
सीबीआई ने यह मामला 11 जुलाई 2012 को दर्ज किया था। आरोपों के मुताबिक, उस समय सीनियर डिविजनल मैनेजर के पद पर कार्यरत महेंद्र ए. लूनकर ने शिकायतकर्ता (जो एक प्राइवेट कंपनी में पार्टनर थे) से उनके कर्मचारी के एक्सीडेंट और चोट से जुड़े इंश्योरेंस क्लेम को पास करने के एवज में 15,000 रुपए की रिश्वत मांगी और स्वीकार की थी। शिकायत तत्काल दर्ज होने के बाद सीबीआई ने आरोपी को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के साथ ही उनके घर और कार्यालय सहित कई स्थानों पर तलाशी अभियान भी चलाया गया था।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 3 दिसंबर 2012 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें आरोपी पर न सिर्फ रिश्वत मांगने और लेने के आरोप लगाए गए, बल्कि सरकारी कर्मचारी होते हुए आपराधिक कदाचार करने का भी मामला दर्ज किया गया।
लंबी सुनवाई और सबूतों का मूल्यांकन करने के बाद विशेष सीबीआई अदालत ने महेंद्र ए. लूनकर को सभी आरोपों में दोषी पाया और तीन साल की कठोर कैद और एक लाख रुपए के अर्थ दंड की सजा सुनाई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा रिश्वत मांगना और लेना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सार्वजनिक विश्वास को ठेस पहुंचाने वाला गंभीर अपराध भी है।
इससे पहले, सीबीआई की कोर्ट ने पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह नगर में 7.8 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड मामले में सात आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। मामले के मुख्य आरोपियों मनीष जैन और रमेश कुमार जैन को तीन साल की कठोर कारावास (आरआई) और प्रत्येक पर 35,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया, जबकि अन्य आरोपियों रचना जैन, भूपिंदर सिंह, प्रतीपाल सिंह, संजीव कुमार जैन और अनीता जैन को तीन साल की जेल की सजा और प्रत्येक पर 15,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है।




