जालंधर, 29 नवंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर जोनल ऑफिस ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत पंजाब के पटवारी चमकौर लाल की 2.76 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति जब्त की।
प्रवर्तन निदेशालय की जांच के अनुसार, चमकौर लाल ने 1 अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2023 के बीच अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की थी। वह पंजाब सरकार की डेरा बस्सी और खरड़ तहसीलों में पटवारी के तौर पर तैनात था और अपने पद का दुरुपयोग कर रहा था। जांच में यह सामने आया कि उसने अपनी और अपने परिवार के सदस्य की जायज आय से कहीं ज्यादा संपत्ति जमा की थी।
यह कार्रवाई सतर्कता ब्यूरो, पंजाब द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत की गई जांच के आधार पर की गई है।
चमकौर लाल ने अपनी अवैध कमाई को चल और अचल संपत्तियों में निवेश किया था। इसके अलावा, उसने अपने और परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खातों में गैर-कानूनी पैसे डाले और इन पैसों को रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों से लिए गए लोन के रूप में दिखाया।
इस तरह, उसने अपनी अवैध संपत्ति को वैध बताने की कोशिश की थी। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, इस पूरे मामले में लगभग 2.76 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित की गई थी, जिसे अब अटैच कर लिया गया है।
वहीं, इससे पहले 16 नवंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) नियमों के उल्लंघन के मामले में बड़ा एक्शन लिया था। केंद्रीय एजेंसी ने पंजाब के फगवाड़ा में चार जगहों पर छापे मारे और 22 लाख रुपए जब्त किए थे। छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी बरामद किए गए थे।
ईडी के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने बताया था कि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के प्रावधानों के तहत पंजाब के फगवाड़ा में चार स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया था। इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में शामिल फगवाड़ा स्थित फर्म मेसर्स ओपल इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (ओईसी) से जुड़े परिसरों में तलाशी ली गई थी।
ईडी की जांच से पता चला था कि ओपल इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन ने सीरिया, ईरान, तुर्की, कोलंबिया आदि देशों को माल निर्यात किया था। हालांकि, निर्यात आय फेमा-1999 और आरबीआई मैटर सर्कुलर के तहत निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार हासिल नहीं हुई थी।




