रांची, 12 मार्च (आईएएनएस)। झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद में वायु प्रदूषण और अवैध खनन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को फटकार लगाई है।
वायु प्रदूषण से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने धनबाद के उपायुक्त, एसएसपी, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और धनबाद नगर आयुक्त को 2 अप्रैल को सशरीर अदालत में तलब किया है।
कोर्ट ने बीसीसीएल के सीएमडी को भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है ताकि वे प्रदूषण कम करने के लिए अपने सुझाव दे सकें। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि धनबाद में वायु की गुणवत्ता का निम्न स्तर पर होना और अवैध माइनिंग व इसके बेधड़क परिवहन की खबरें आना बेहद चिंताजनक है।
अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अवैध खनन रोकने की दिशा में पुलिस की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हो रही है। खंडपीठ ने नाराजगी जताई कि कोल डस्ट (कोयले की धूल) के कारण धनबाद में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम लोगों को सांस लेने में परेशानी और कई गंभीर बीमारियां हो रही हैं।
इससे पहले बीसीसीएल की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार दास ने कोर्ट को जानकारी दी कि कंपनी अपनी बंद पड़ी खुली खदानों को भरकर वहां पार्क विकसित कर रही है। बीसीसीएल ने यह भी आरोप लगाया कि अवैध खनन रोकने के लिए कंपनी ने कई प्राथमिकी दर्ज कराई हैं, लेकिन पुलिस ने उन पर कोई ठोस एक्शन नहीं लिया है।
बीसीसीएल ने इस संबंध में एक अलग याचिका भी दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने ‘ग्रामीण एकता मंच’ की मुख्य जनहित याचिका के साथ संलग्न करने का आदेश दिया। बता दें कि पूर्व की सुनवाई में अदालत ने जिला खनन पदाधिकारी से धनबाद में अवैध खनन को रोकने के लिए की गई कार्रवाई पर जवाब मांगा था।
वहीं, सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में प्रदूषण रोकने के दावे तो किए गए थे, लेकिन अवैध खनन के मुद्दे पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी। प्रार्थी ‘ग्रामीण एकता मंच’ की ओर से अदालत को बताया गया कि धनबाद नगर निगम और स्थानीय प्रशासन प्रदूषण को नियंत्रित करने में विफल रहा है।
प्रार्थी का कहना है कि प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए कदम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं और धरातल पर कोई सुधार नहीं दिख रहा है। दूसरी ओर, बीसीसीएल ने दावा किया कि कोयले की ढुलाई पूरी तरह ढंककर की जा रही है और धूल को दबाने के लिए लगातार पानी का छिड़काव व मॉनिटरिंग की जाती है, हालांकि कोर्ट इन दलीलों से संतुष्ट नजर नहीं आया और अब आला अधिकारियों से सीधी जवाबदेही तय की है।

