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मानव जाति के साझे भाग्य वाले समुदाय की स्थापना पर शी चिनफिंग के भाषण

Sep
20 2020

बीजिंग, 20 सितम्बर (आईएएनएस)। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने हाल में एलान किया कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग वीडियो माध्यम से संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मनाने के सिलसिलेवार उच्च स्तरीय सम्मेलनों में भाग लेंगे और भाषण भी देंगे। पाँच साल पहले, शी चिनफिंग ने संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ से जुड़े श्रृंखलाबद्ध शिखर सम्मेलनों में भाग लिया था। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस में सहयोग और उभय जीत वाले नए साझेदार बनाएं और मानव जाति के साझे भाग्य वाले समुदाय की स्थापना की जाए शीर्षक महत्वपूर्ण भाषण दिया।

इधर के सालों में शी चिनफिंग कई अंतर्राष्ट्रीय स्थानों पर साझे भाग्य वाले समुदाय की विचारधारा की व्याख्या करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि चीनी जनता विश्व के विभिन्न देशों की जनता के साथ मिलकर एक और सुन्दर पृथ्वी घर का निर्माण करना चाहती है।

सितंबर 2015 में शी चिनफिंग ने अमेरिका की यात्रा के दौरान संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ से जुड़ी श्रृंखलाबद्ध शिखर सम्मेलनों में भाग लिया। अपने पहले पड़ाव सिएटल में दिए भाषण में उन्होंने बड़े देशों के बीच नए संबंधों की व्याख्या की और कहा कि विकसित बड़े देश और उभरने वाले बड़े देश के बीच जरूर एक युद्ध होता है। शी चिनफिंग ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस में भाग लेते समय मानव जाति के साझे भाग्य वाले समुदाय की स्थापना की विचारधारा पेश की थी।

अपने भाषण में शी चिनफिंग ने बल देते हुए कहा कि शांति, विकास, न्याय, निष्पक्षता, लोकतंत्र और स्वतंत्रता मानव जाति का समान मूल्य है, यह संयुक्त राष्ट्र का महान और उच्च उद्देश्य भी है। वर्तमान दुनिया में विभिन्न देश एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं, एक दूसरे का भाग्य जोड़ता है। विभिन्न पक्षों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और सिद्धांत का पालन करते हुए सहयोग और उभय जीत वाले नए अंतरराष्ट्रीय संबंधों की स्थापना करनी चाहिए। बड़े देशों के बीच और छोटे देशों के बीच के अस्तित्व को पारस्परिक सम्मान, सहयोग और उभय जीत को कोर बनाया जाना जरूरी है।

दो साल बाद, यानी 2017 में शी चिनफिंग ने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में मानव जाति के साझे भाग्य वाले समुदाय का सह-निर्माण किया जाए शीर्षक पर भाषण दिया। उन्होंने कहा कि देशों के बीच मुकाबले के बजाए बातचीत करने वाले संबंध स्थापित किया जाना चाहिए। बड़े देशों को एक दूसरे के मूल हितों और अहम चिंताओं का सम्मान करना चाहिए। अंतर-विरोध और मतभेद का प्रबंधन और नियंत्रण करना चाहिए। मुठभेड़ न होने, आपसी सम्मान, सहयोग और उभय जीत वाले नए संबंध की स्थापना की जाए।

लहरों का सामना करते समय शांत बंदरगाह में वापसी न हो। मानव जाति के साझे भाग्य समुदाय वाली विचारधारा की व्याख्या करने के दौरान शी चिनफिंग ने कई बार बल देते हुए कहा कि खुले वैश्विक अर्थतंत्र का अविचल रूप से विकास किया जाना चाहिए। खुलेपन के दौरान सुअवसरों और लाभ को साझा किया जाए, आपसी लाभ और उभय जीत को साकार किया जाए।

सभ्यता के आदान-प्रदान और आपसी सीख पर डटे रहना, एक खुले और समावेश दुनिया की स्थापना करना मानव जाति के साझे भाग्य वाले समुदाय की स्थापना का मूल अर्थ है। मार्च 2014 में, पेरिस में संयुक्त राष्ट्र युनेस्को के मुख्यालय में शी चिनफिंग ने भाषण देते हुए कहा कि विश्व में 200 से अधिक देश और क्षेत्र हैं, 2500 से अधिक जातियां और कई धर्म मौजूद हैं। अगर केवल एक ही जीवन तरीका अपनाया जाए, एक ही भाषा का प्रयोग किया जाए, एक ही संगीत का मजा लिया जाए और एक ही वस्त्र पहनाया जाए, तो स्थिति अकल्पनीय होगी। हमें विभिन्न सभ्यताओं में बुद्धि की खोज करनी चाहिए, ताकि इंसान को आध्यात्मिक समर्थन प्राप्त किया जा सके और मानव जाति के सामने मौजूद विभिन्न चुनौतियों का हाथ मिलाकर समाधान किया जा सके।

मानव जाति के साझे भाग्य वाले समुदाय की स्थापना एक सुन्दर लक्ष्य है, जिसे साकार करने के लिए एक के बाद एक पीढ़ी का प्रयास चाहिए। चीन विभिन्न पक्षों के साथ मिलकर संवाद और सलाह मशविरा, सह-निर्माण और साझा करना, सहयोग और उभय जीत, आदान-प्रदान और आपसी सीख, हरित और कम कार्बन पर डटा रहना चाहता है। ताकि मानव जाति के साझे भाग्य समुदाय के सह-निर्माण वाली प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके, ताकि एक स्थाई शांति, आम सुरक्षा, समान समृद्धि, खुलापन व समावेशी, स्वच्छ और सुनदर दुनिया की स्थापना की जा सके।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

-- आईएएनएस

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