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शहरों से निराश मजदूरों को धरती माता के पास तो जाने दो

May
16 2020
प्रधानमंत्रीजी कुछ तो महसूस करिये मजदूरों की पीड़ा

कोरोना से पीड़ित होने से पहले भूख से नहीं मरना चाहता मजदूर

कोरोना से ज्यादा तो सड़क हादसों में मर रहे है मजदूर-गरीब

आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी प्रणाम।

देश में लॉकडाउन के 53वें दिन आज फिर आपको पत्र लिख रही हूँ। आशा है कि आप मेरे पत्र पर जरूर ध्यान देंगे।

प्रधानमंत्री जी देश में 53 दिन में गरीबों-मजदूरों की तमाम परेशानियों से भरी जो तस्वीर उभरकर सामने आई है, क्या उसका दर्द थोड़ा भी आप महसूस नहीं कर पा रहे हैं? कुछ तो महसूस करिए प्रधानमंत्री जी ! कोरोना के कारण अचानक लगाए गए लॉक डाउन के कारण ही पिछले 53 दिन से देश में अफरा तफरी का माहौल बना हुआ है। कोरोना से जितने लोगों की अब तक मौत नहीं हुई है, उससे ज्यादा गरीबों -मजदूरों की मौत तमाम सड़क हादसों का शिकार होकर सड़कों पर हो गई है। इसकी वजह सिर्फ एक है कि जो मजदूर अपनी धरती माता, जहां उसका जन्म हुआ था, वहां से दूर शहरों के पास बहुत सारे सपने लेकर आया था लेकिन कोरोना के कारण रोटी -रोटी के लिए मोहताज हो गया। ऐसे में उसके पास वापस अपने गांव की धरती माता के पास जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। यही वजह है कि करोड़ों प्रवासी मजदूर (वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकी संख्या 8 करोड़ बताई है) शहरों की चकाचौंध भरी दुनिया, जो उसको इस संकट में दो वक्त की रोटी कुछ दिन सम्मान से नहीं दे पाई, उससे दूर वापस अपने गांव की शांति वाली दुनिया में जाने के लिए सड़कों पर निकल पड़ा है। इन 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को 5 किलो अनाज और 1 किलो चना प्रति व्यक्ति 2 माह देने की घोषणा सरकार ने 50 दिन बाद की है, आख़िरकार 50 दिन कैसे बीते होंगे इनके ? क्या सरकार को ख्याल आया इस बात का, कि "आत्मनिर्भर" मजदूर भूखे पेट कैसे पैदल चले जा रहे है ?

प्रधानमंत्री जी आप तो भारत की 135 करोड़ जनता को भारत के विश्व गुरु बनने का सपना लंबे समय से दिखा रहे हैं। क्या विश्व गुरु बनने का सपना देखने लायक स्थिति हमारी है ? जब हम अपने देश के मजदूरों-गरीबों को उनके गांव तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं? तब क्या हम विश्व गुरु बन पाएंगे ? क्या मजदूरों को उनके घर पहुंचाना इस देश की सरकार के लिए इतनी बड़ी चुनौती थी, जिसे सरकार पूरी करने में सक्षम नहीं थी या फिर इस देश के गरीब और मजदूर के जीवन की सरकार की नज़र में कोई कीमत नहीं है ? सिर्फ विदेशों में बसे भारतीय लोगों को ही देश में उनके घरों तक पहुंचाने की चिंता थी सरकार की।

प्रधानमन्त्री जी आज हमारे देश की जो तस्वीरें मीडिया में सामने आ रही है। क्या पूरी दुनिया में इससे हमारे देश की छवि धूमिल नहीं हो रही है ? क्या इस देश के वह नागरिक जो 53 दिन से घरों में रहकर लॉक डाउन का पालन कर रहे हैं उनको देश की ऐसी हालत देखकर दुख नहीं हो रहा है? निश्चित ही घरों में रहने वाले लोग समाचार चैनलों पर मजदूरों की इतनी बुरी हालत देखकर खुद को रोने से रोक नहीं पा रहे हैं।

प्रधानमंत्री जी 24 मार्च को जब आपने अचानक लॉक डाउन की घोषणा की थी, तक संभव था कि आपको यह उम्मीद नहीं होगी कि देश में अलग-अलग प्रदेशों की सरकारें व्यवस्था नहीं कर पाएगी और मजदूरों को दो वक्त का खाना भी उन तक नहीं पहुंचा पाएंगे जिसके कारण भूख से परेशान मजदूर शहरों से निराश होकर धरती माता की ओर लौटने के लिए बेचैन हो जाएगा। एक नागरिक होने के नाते मुझे लगता है कि अभी भी वक्त है मोदीजी कि आप कोरोना पर नियंत्रण के लिए ठोस योजना बना सकते हैं। अभी देश में 85 हजार लोगों को कोरोना संक्रमण हुआ है, 85 लाख को नहीं हुआ है। देश में 85 लाख लोगों तक कोरोना संक्रमण नहीं फैल पाए और मौतों का आंकड़ा हमारे देश में लाखों तक ना पहुंच पाए। इसके लिए अगर अभी भी जाग जाएंगे और ठोस योजना बनाएंगे तब संभव है कि हमारे देश से कोरोना का नामोनिशान खत्म हो जाए । ठीक है जो 2 माह का वक्त लापरवाही में बीत गया उसको नहीं बदला जा सकता लेकिन अपने आज को तो हम बदल सकते हैं । इसके लिए आपको ही निर्णय लेने होंगे ।

प्रधानमंत्री जी मुझे लगता है कि देश के बेकाबू हो रहे हालात पर नियंत्रण करने के लिए आपको देश में 1 हफ्ते का लॉक डाउन खोल देना चाहिए । जिसमें सभी ट्रेनें पहले की तरह चला दी जानी चाहिए ताकि मजदूर या अन्य जो भी लोग कहीं फंसे हुए हैं अपने घरों से दूर, वो अपने-अपने घरों तक पहुंच जाएं। उसके बाद कम से कम 21 दिन के लिए देश में सख्त लॉकडाउन लागू किया जाना चाहिए, जिसमें अगर कोई भी निकलने की कोशिश करता है तो उसे सीधे सरकार द्वारा चिन्हित क्वारंटीन सेंटर भेज दिया जाए, इससे संभव है कि अब तक जो कोरोना का संक्रमण फैला है, वह जहां है वही थम जाए और पूरे देश के सामने कोरोना से प्रभावित होने की स्थिति ना आ जाए । हालांकि आप की सरकार विदेशों से बड़े पैमाने पर लाखों लोगों को वापस लेकर आ ही रही है, देश में लाखों मजदूर पैदल या जो भी साधन उनको मिल रहा है उससे यहां से वहां जा ही रहे हैं ऐसे में कोरोना पर नियंत्रण तो नहीं हो पा रहा है बल्कि हर दिन देश के ऊपर कोरोना का संकट बढ़ ही रहा है. रोज लगभग 150 लोग कोरोना से से मर रहे है और करीब 4 से 5 हजार नए मामले सामने आ रहे है। इस तरह खतरा बढ़ता ही जा रहा है. इस दौर में आपको सभी प्रदेशों की सरकार से चर्चा करके, मुझे लगता है यही निर्णय लेना चाहिए ताकि जो गलती पहले की जा चुकी है, उसको सुधार कर हम कोरोना महामारी पर नियंत्रण पा सके। इसके साथ ही राहत घोषणा देश में 20 लाख करोड़ की गई है यह घोषणा जमीन पर आने में समय लगने वाला है जबकि जरूरत आज मजदूर का पेट भरने की है। ऐसे में आपके द्वारा देश में जो हर मजदूर का गरीबों का जनधन खाता बनाया गया था उसमें गरीबों के खाते में सीधे इतनी राशि कम से कम दी जानी चाहिए ताकि वह इस कठिन समय में अपना और अपने परिवार का पेट तो भर पाए।

प्रधानमंत्री जी इस देश के नागरिक आपको भगवान की तरह पूजते रहे हैं, उनकी उम्मीदों पर आपको खरा उतरने के लिए कुछ कठोर निर्णय करने ही होंगे अन्यथा इतिहास में जब कोरोना काल के दर्द की दास्तान लिखी जाएगी, तब आपका नाम भी जरूर इस बात के लिए उसमें लिखा जाएगा कि आपने समय रहते जो निर्णय एक देश के जिम्मेदार प्रधानमंत्री को लेने चाहिए थे, वह नहीं लिए और देश में गंभीर महामारी फैल गई। आने वाली पीढ़ी आपको शायद इसके लिए माफ नहीं कर पाएगी।
धन्यवाद।

रानी शर्मा

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रानी शर्मा

लेखिका www.kharinews.com की सम्पादक हैं.

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