Kharinews

कोरोना : जंग जीतने के लिए रणनीति बदली जाये अन्यथा परिणाम हो सकते घातक

Mar
28 2020

राकेश अचल

प्राणघातक विषाणु कोरोना से निबटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई राष्ट्रव्यापी जंग जन सहयोग के बावजूद कतिपय खामियों की वजह से नाकाम हो इससे पहले ही जंग की नीति बदल ली जाना चाहिए अन्यथा परिणाम अप्रत्याशित रूप से घातक हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 मार्च को कोरोना के खिलाफ एक दिन के लॉक डाउन के आव्हान को जैसा प्रतिसाद मिला था वो अभूतपूर्व था लेकिन बिना तैयारी के किये गए आव्हान की वजह से सफलता के वजूद इस लड़ाई को आगे नहीं बढ़ाया जा सका और जो गलती एक दिन के लाकडाउन की घोषणा के समय हुई उसे ही तीसरे दिन 25 मार्च को देश व्यापी लाकडाउन की घोषणा के समय दोहरा दिया गया, नतीजा ये हुआ कि सोशल डिटेन्सिंग की सारी योजना धरी की धरी रह गयी। लाखों, करोड़ों असहाय लोग अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए पैदल मार्च को विवश हो गए और रास्ते में ही लाखों मालवाही ट्रक फंस गए इससे न चाहते हुए भी अराजक स्थिति पैदा हो गयी।

मौजूदा स्थिति को सुधारने के लिए केंद्र के साथ राज्य सरकारों ने भरपूर प्रयास शुरू कर दिए हैं किन्तु इन्हें अमलीजामा पहनाने में काफी समय लग सकता है।केंद्र ने आज ही जिस स्टेंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर का नया प्रारूप जारी किया है, इसे ही यदि देशव्यापी लाकडाउन के एक दिन पहले से लागू कर दिया गया होता तो मुमकिन था कि अराजक स्थिति पैदा न होती।

गृह सचिव अजय कुमार भल्ला की ओर से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और अधिकारियों को पत्र लिखा गया है जिसमें आवश्यक चीजों की सप्लाई बनाए रखने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रोसिजर (SOP) के तहत कुछ लोगों और चीजों को इस लॉकडाउन से छूट दी गई है। केंद्र की ओर से जारी इस पत्र के जरिए कोरोना के प्रसार को रोकने और लॉकडाउन के दौरान लोगों को किसी तरह की कोई दिक्कत न आने पाए को लेकर निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य और खाने-पीने की चीजों समेत आवश्यक चीजों की सप्लाई को बनाए रखने को कहा गया है।

दुनिया जानती है कि कोई भी जंग भूखा आदमी नहीं लड़ सकता, लेकिन इसका ख्याल देशव्यापी लाकडाउन की घोषणा के समय नहीं रखा गया, मुमकिन है कि ये गलती हड़बड़ी या घबड़ाहट में हुई हो लेकिन इससे पूरी रणनीति पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। देश में शायद एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो इस लड़ाई में ईमानदारी से शामिल न होना चाहता हो किन्तु लड़ाई में जनता को निहत्था तो नहीं उतारा जा सकता ? चिकित्सा प्रबंधों से पहले जहाँ-तहाँ फंसे लोगों को गंतव्य तक भेजने और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की श्रृंखला को सुनिश्चित करने के बाद यदि देश लाकडाउन में शामिल किया जाता तो परिणाम कुछ और होते।बहरहाल जो हुआ सो हुआ अब सब मिलकर स्थिति को सम्हालने का प्रयास कर रहे हैं। सभी सरकारों को मिलकर मौजूदा स्थिति को आने वाले एक-दो दिन में दुरुस्त कर सम्पूर्ण लाकडाउन पर अमल करना चाहिए। लखनऊ जिला प्रशासन ने इस मामले में सराहनीय प्रयोग किया है उसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है।

आम जनता की जान बचने के इस धर्मयुद्ध में जनता को शामिल किये बिना जंग का ऐलान कर दिया गया। अकेले सरकार इस लड़ाई को नहीं जीत सकती इसलिए इसमें पहले से समाज में सक्रिय संस्थाओं को भी विश्वास में लिया जाना था। देश में अनेक संस्थान ऐसे हैं जिन्हें प्रतिदिन हजारों लोगों को भोजन उपलब्ध करने का अनुभव है। अनेक धार्मिक और सामाजिक संस्थान ऐसे हैं जिनके पास अकूत सम्पत्ति है यदि उन सबसे बात कर ली जाती तो सरकार को और जनता को कठिनाई का सामना न करना पड़ता।

आज हम जिस मोड़ पर खड़े हैं वहां आरोप-प्रत्यारोप के लिए कोई जगह नहीं है। जिसकी जो भूमिका है उसे चुन लेने की छूट दी जाना चाहिए, लोग जान हथेली पर रखकर इस राष्ट्रयज्ञ में आहुति देने के लिए तैयार हैं। सरकार को स्वीकार करना होगा कि देश व्यापी लाकडाउन केवल पुलिस या सेना के बूते लागू नहीं कराया जा सकता इसके लिए जनता को भी मानसिक रूप से तैयार करना होगा, समय कम है इसलिए जो भी किया जाना है फौरन किया जाये, देरी से नुक्सान ही नुक्सान है।

ये तय है कि कोरोना पूरी दुनिया को नष्ट नहीं कर सकता लेकिन उसने दुनिया की अर्थ व्यवस्था को तो नुक्सान पहुंचा ही दिया है। कोरोना से लड़ते हुए अंतत: जीत दुनिया की ही होगी इसलिए आइये देशकाल परिस्थिति के अनुरूप कोरोना के खिलाफ रणनीति में तब्दीली कर इस पर आज और अभी से अमल आरम्भ कर दें। एक लेखक के नाते मै 22 मार्च से ही घर में लाकडाउन हूँ औरों से मैं तभी लाकडाउन में धैर्यपूर्वक शामिल होने की अपील भी कर रहा हूँ। इस युद्ध में सभी चिकित्सा पद्धितियों के विशेषज्ञों को अनुसांधान और चिकित्सा करने की छूट भी दी जाना चाहिए। देश के पास जितनी अधिक सुविधाएं होंगी, हम उतना अधिक इस लड़ाई में कामयाब हो सकते हैं।

Category
Share

About Author

राकेश अचल

लेखक वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार हैं.

Related Articles

Comments

 

चुनाव आयोग से मिलती जुलती वेबसाइट का पर्दाफाश, एक पकड़ा गया

Read Full Article

Subscribe To Our Mailing List

Your e-mail will be secure with us.
We will not share your information with anyone !

Archive