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इतालवी मरीन मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मुआवजा मिलने पर ही मुकदमा बंद होगा

Aug
07 2020

नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। इटली के दो नौसैनिकों द्वारा केरल के मछुआरों की हत्या मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि जब इटली की ओर से पीड़ितों को मुआवजा मिल जाएगा, तब वह मुकदमे को वापस लेने की अनुमति दे सकते हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह पीड़ितों के परिवार का पक्ष सुने बिना इस मामले को बंद नहीं करेंगे।

प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रह्मण्यन ने केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, चेक (मुआवजे की राशि) और पीड़ितों के परिजनों को यहां लाएं।

पीठ ने उल्लेख किया कि शीर्ष अदालत तब तक इतालवी नौसैनिकों के लिए किसी राहत के बारे में नहीं सोच सकती है, जब तक कि उनके अभियोजन को केरल की अदालत में वापस नहीं लिया जाता है। मेहता ने कहा कि केंद्र दोनों नौसैनिकों के खिलाफ मुकदमा वापस लेने के लिए याचिका दायर करने को तैयार है।

प्रधान न्यायाधीश ने जवाब दिया, लेकिन पीड़ितों के परिवार को एक समस्या होगी। उन्हें सुनना होगा।

मेहता ने शीर्ष अदालत के समक्ष दलील दी कि केंद्र भारत में इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ मुकदमा वापस लेने के पक्ष में है, क्योंकि इटली उन पर मुकदमा चलाने के लिए तैयार है। पीठ ने कहा कि मृतक के परिजन को सुने बिना वह मामला बंद नहीं कर सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल मेहता को एक सप्ताह के भीतर पीड़ितों के परिवारों को मामले में शामिल करने के लिए आवेदन दायर करने के लिए कहा। शीर्ष अदालत ने दो इतालवी नौसैनिकों - मैसिमिलियानो लाटोरे और सल्वाटोर गिरोन द्वारा दायर लंबित याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी।

उल्लेखनीय है कि 15 फरवरी, 2012 को मछली पकड़ने के जहाज सेंट एंटोनी में सवार दो भारतीय मछुआरों को कथित तौर पर केरल के तट से दूर इतालवी टैंकर एनरिका लेक्सी में सवार दो इतालवी नौसैनिकों ने मार डाला था।

इसके बाद भारतीय नौसेना ने इतालवी टैंकर को रोक दिया और दोनों नौसैनिकों को हिरासत में ले लिया। इन नौसैनिकों में एक सैनिक दो साल और एक सैनिक चार बाद रिहा हुआ, जिसके बाद वह अपने देश इटली लौटे। यह मामला भारत की अदालत से होता हुआ अंतर्राष्ट्रीय अदालत तक भी पहुंचा।

--आईएएनएस

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