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एम्स के डॉक्टर ने कहा, आक्रामक जांच से दिल्ली में कोरोना मामलों में आई कमी

Jul
25 2020

नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली में कोविड-19 मामलों में संकटग्रस्त उछाल के बाद, मामलों की संख्या में कुछ कमी से राहत की सांस ली जा सकती है और अब ऐसा प्रतीत होता है कि इसपर जल्द ही काबू पा लिया जाएगा। एम्स के एक डॉक्टर ने इसके कारण आक्रामक जांच बताया और कहा की इसी वजह से दिल्ली इस स्वास्थ्य संकट से निकल पाई।

साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को इस वायरल संक्रमण के खिलाफ अपनी सुरक्षा में कमी नहीं करनी चाहिए।

एम्स में डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल ने आईएएनएस से कहा, यह स्पष्ट है कि जांच, पहचान, अलगाव और संक्रमण की जांच की नीति ने कोरोना की संख्या में कमी ला दी। यही दिल्ली में हो रहा है, मामलों की संख्या कम हो रही है।

उन्होंने कहा, मैं संक्रमण में कमी के लिए एक और जरूरी कारण बताना चाहूंगा और वह है लोगों की भागीदारी। अधिकतर लोग काफी अच्छे से सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन करते हैं, जिसने कहीं न कहीं इसमें मदद मिलती है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में एक बयान में कहा था, हमने दिल्ली में जांच को बढ़ा दिया है। शुरुआत में 100 लोगों में 31 कोरोना संक्रमित पाए जा रहे थे और 100 में से केवल 13 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए जा रहे हैं। ये चीजें दिखाती हैं कि स्थिति नियंत्रण में है और यह अब उतनी खतरनाक नहीं है, जितना एक माह पहले था।

दिल्ली में हाल ही में किए गए सिरो-जांच के तत्वाधान में हर्ड इम्युनिटी की संभावना के बारे में पूछे जाने पर निश्चल ने जोर देकर कहा कि अब जबकि मामलों में कमी आ रही है, लोगों को मॉल्स में जाने से बचना चाहिए या भी भीड़ इकट्ठा नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा, लोगों को यह जानने के बाद कि यहां स्थिति में सुधार आ रहा है, वायरस के खिलाफ सुरक्षा उपायों में ढील नहीं बरतनी चाहिए। हर्ड इम्युनिटी विकसित होने के लिए, आबादी की बड़ी संख्या को संक्रमित होना होता है, जो अब तक दिल्ली में नहीं हुआ है।

दिल्ली के 11 में से आठ जिलों में 20 प्रतिशत से अधिक सिरो प्रसार है। मध्य दिल्ली, उत्तर और शहादरा जिले में, सिरो प्रसार 27 प्रतिशत है।

दिल्ली के दक्षिणपश्चिम में 12.95 प्रतिशत सिरो प्रसार है, जो कि शहर में सबसे कम है। वही दक्षिण और पश्चिमी दिल्ली में यह प्रतिशत क्रमश: 18.61 और 19.13 है।

27 जून से 5 जुलाई के दौरान, यह पाया गया कि 24 प्रतिशत लोगों में कोविड-19 वायरस के खिलाफ एंटीबॉडिज विकसित हो गई है, जिसका मतलब है कि 24 प्रतिशत लोग वायरस से संक्रमित हुए हैं और स्वस्थ्य हो गए हैं।

सिरो प्रसार के बारे में पूछे जाने पर, निश्चल ने कहा, इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हूं कि ये एंटीबॉडिज कितने दिनों तक रहेगी। यह बहस का विषय है कि ये एंटीबॉडिज कितना सुरक्षित है, इसलिए लोगों को लगातार एहतियात बरतना चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहंी किया तो, शहर में मामलों में एक बार फिर उछाल आ सकता है।

उन्होंने कहा, वैक्सिन का भविष्य सुनहरा है। लेकिन उस भविष्य को देखने के लिए हमें वर्तमान में सर्वाइव करना होगा। समय की जरूरत सोशल वैक्सिन है। सोशल डिस्टेंस बनाए रखना, फेस मास्क पहनना और हाथों का साफ रखना लोगों को न सिर्फ कोविड-19 बल्कि और बीमारी से भी बचाएगा।

--आईएएनएस

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