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केन्द्रीय पुस्तकालय में दुर्लभ सदियों पुरानी तमिल पुस्तकें और ताड़ के पत्तों की पांडुलिपियां

Dec
05 2022

नई दिल्ली, 5 दिसम्बर (आईएएनएस)। सैकड़ों वर्ष पुरानी ऐतिहासिक पुस्तकों में रुचि रखने वाले पुस्तक प्रेमियों के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित काशी तमिल संगमम एक बेहतरीन स्थान है। पुरानी पुस्तकें और उनसे भी बढ़कर ताड़ के पत्तों की पांडुलिपियों यहां देखने को मिल सकती हैं। इतना ही नहीं यहां केंद्रीय पुस्तकालय में 17वीं एवं 18वीं शताब्दी में तमिल ग्रंथ लिपि को भी रखा गया है।

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के केन्द्रीय पुस्तकालय ने 1890 के बाद से विभिन्न तमिल ग्रंथों और 17वीं एवं 18वीं शताब्दी में तमिल ग्रंथ लिपि में लिखी गई 12 पांडुलिपियों को प्रदर्शित किया है। इनमें शुरूआती तमिल नाटकों की पहली प्रतियां और एनी बेसेंट को उपहार में दी गई किताबें, तमिल संगीत तकनीकों की व्याख्या करने वाली किताब, कुमारगुरुबारा की किताबें, शैव दर्शन से संबंधित किताबें, भारती किताबें, रामायण, महाभारत के अनुवाद आदि शामिल हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक इन बहुमूल्य संग्रहों की प्रदर्शनी 5 दिसम्बर से लेकर 16 दिसम्बर तक 12 दिनों के लिए प्रतिदिन प्रात 11 बजे से सायं 7 बजे तक केन्द्रीय पुस्तकालय के केन्द्रीय कक्ष से सटे पाण्डुलिपि एवं दुर्लभ दस्तावेज अनुभाग में चलेगी।

भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष और काशी तमिल संगम के मुख्य संयोजक पद्मश्री चामु कृष्णशास्त्री ने वाराणसी स्थित बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के केन्द्रीय पुस्तकालय में दुर्लभ तमिल पुस्तकों और पांडुलिपियों की इस प्रदर्शनी की शुरूआत की है।

यह प्रदर्शनी विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे काशी तमिल संगम के हिस्से के रूप में सयाजी राव गायकवाड़ केन्द्रीय पुस्तकालय द्वारा आयोजित की गई है।

इस प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कृष्णशास्त्री ने कहा कि यह अत्यंत प्रसन्नता की बात है कि इन प्राचीन एवं दुर्लभ दस्तावेजों को विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में समुचित तरीके से संरक्षित किया गया है। इन दस्तावेजों को जहां उचित रूप से वगीर्कृत किया जाना चाहिए, वहीं इन्हें शोधकतार्ओं के उपयोग के लिए सुलभ होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आज की जरूरत है।

उप-पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. सुचिता सिंह ने शिक्षकों, छात्रों और काशी तमिल संगम में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को इस प्रदर्शनी देखने के लिए आमंत्रित किया।

इस अवसर पर सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल तमिल की निदेशक प्रोफेसर इरा चंद्रशेखरन और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र कुमार सिंह उपस्थित थे।

--आईएएनएस

जीसीबी/एएनएम

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