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केरल उच्च न्यायालय के नियम अलग, पत्नी को एमटीपी के लिए पति की सहमति की आवश्यकता नहीं

Sep
27 2022

कोच्चि, 27 सितम्बर (आईएएनएस)। केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को अपने पति से अलग होने का दावा करने वाली एक महिला को 21 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति वी.जी. अरुण ने कहा कि गर्भपात के लिए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट (एमटीपी एक्ट) के तहत पति की सहमति जरूरी नहीं है।

एमटीपी अधिनियम के नियमों के अनुसार, 20 और 24 सप्ताह के गर्भ के बीच समाप्ति की अनुमति देने वाले कारकों में से एक चल रही गर्भावस्था (विधवा और तलाक) के दौरान वैवाहिक स्थिति में बदलाव है। अदालत ने यह भी बताया कि भले ही गर्भवती महिला कानूनी रूप से तलाकशुदा या विधवा नहीं थी, लेकिन उसके पति के साथ उसके रिश्ते अच्छे नहीं हैं। उसके खिलाफ आपराधिक शिकायत, और तथ्य यह है कि पति और पत्नी एक साथ नहीं रहना चाहते। उसके साथ जारी रखने की इच्छा का कोई झुकाव नहीं दिखाया। यह उसके वैवाहिक जीवन में भारी परिवर्तन है।

इसने आगे कहा कि अधिनियम में एक महिला को गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए अपने पति की सहमति प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है।

याचिकाकर्ता ने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी कर ली थी, जब वह स्नातक की पढ़ाई कर रही थी और वह बस कंडक्टर था। हालांकि, शादी के बाद याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पति और उसकी मां ने दहेज की मांग के साथ उसके साथ खराब व्यवहार किया। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके पति ने अजन्मे बच्चे के पितृत्व पर सवाल उठाया और आर्थिक या भावनात्मक सहायता देने से इनकार कर दिया।

जब उसने अपनी गर्भावस्था को समाप्त करने की मांग की, तो वह जिस स्थानीय क्लिनिक में गई, डॉक्टरों ने उसे मना कर दिया क्योंकि उसके पति से अलग होने/तलाक को साबित करने के लिए कोई कानूनी दस्तावेज नहीं थे। इसके बाद उसने अपने पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जब वह वापस क्लिनिक गई, तो डॉक्टरों ने एक बार फिर उसके अनुरोध को मानने से इनकार कर दिया, जिससे उसे अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

नियम के अवलोकन से पता चलता है कि, वो महिलाएं, जिनकी वैवाहिक स्थिति गर्भावस्था के दौरान बदल गई है, वो भी इसमें शामिल हैं। निर्विवाद रूप से, गर्भावस्था के दौरान याचिकाकर्ता का वैवाहिक जीवन पूरी तरह से बदल गया है, कोर्ट ने देखा और महिला को अबॉर्शन की अनुमति दी और उसी के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए।

--आईएएनएस

केसी/एएनएम

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