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केरल में थरूर की स्वीकार्यता बढ़ने से दूसरे कांग्रेसी हुए परेशान

Dec
05 2022

तिरुवनंतपुरम, 5 दिसम्बर (आईएएनएस)। जब केरल कांग्रेस में सब कुछ शांत दिखाई दे रहा था, तब पार्टी के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य शशि थरूर का पार्टी के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का फैसले से पार्टी के कई बड़े नेता बेचैन हो गए हैं।

राज्य के पार्टी अध्यक्ष के. सुधाकरन के नेतृत्व वाले कांग्रेस के वर्तमान नेतृत्व को पहला झटका जब विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन समेत राज्य के 16 कांग्रेस नेताओं ने थरूर के नामांकन को समर्थन दिया।

थरूर का समर्थन करने वालों में हबी ईडन, तीन-बार के लोकसभा सदस्य एम.के. राघवन, दो बार विधायक रह चुके के.एस. सबरीनाथन और थम्पनूर रवि जैसे दिग्गज भी शामिल थे। जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेता ए.के. एंटनी, सतीशन, रमेश चेन्निथला, कोडिकुन्निल सुरेश और बड़ी संख्या में अन्य लोगों ने मलिकार्जुन खड़गे का समर्थन किया।

हालांकि चुनाव में थरूर हार जरूर गए, लेकिन युवाओं, पढ़े-लिखे लोगों, महिलाओं आदि में थरूर की स्वीकार्यता बढ़ी। इससे पार्टी का दूसरा धड़ा परेशान हो गया।

अपनी बढ़ती लोकप्रियता को भुनाने के लिए थरूर ने राज्य भर में अपने दौरे की योजना की घोषणा करते हुए। इससे पार्टी के राज्य अध्यक्ष सतीशन और अन्य बेचैन हो गए।

थरूर का मनोबल तब और बढ़ गया जब खराब स्वास्थ्य के बावजूद दो बार के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने उनके समर्थन की घोषणा की। इससे थरूर विरोधी खेमे की बेचैनी बढ़ती गई।

सप्ताहांत में जब थरूर चांडी के गढ़ कोट्टायम और पठानमथिट्टा पहुंचे तो उनका जोरदार स्वागत हुआ।

जबकि सतीशन और चेन्निथला से जुड़े लोग उनसे दूर रहे। कार्यक्रमों में चांडी के समर्थन बड़ी संख्या में आए।

नाम न छापने की शर्त पर एक मीडिया समालोचक ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का सबसे बड़ा अभिशाप यह है कि उन्हें हर चुनाव में 18 से 23 आयु वर्ग के मतदाताओं का समर्थन नहीं मिला है।

समालोचक ने कहा उत्तर केरल में और सप्ताहांत के दौरान कोट्टायम और पठानमथिट्टा में थरूर की बैठक में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। क्या एंटनी या अन्य नेता इन युवाओं को आकर्षित कर पाएंगे। दीवार पर इबारत स्पष्ट रूप से लिखी है कि चांडी की गिरती सेहत के कारण अब केरल में कांग्रेस के पास भीड़ खींचने वाला नेता थरूर के अलावा और कोई नहीं है। पार्टी का जितनी जल्दी, इसका एहसास हो जाए, उसके लिए उतना ही अच्छा है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो पार्टी के समक्ष संकट गहरा सकता है।

--आईएएनएस

सीबीटी

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