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कला और साहित्य महोत्सव ‘विश्वरंग’ का हुआ भव्य आगाज़, पद्मश्री राशिद खान ने बांधा समां

Nov
25 2021

- विश्वरंग का हुआ शुभारंभ, मंत्री प्रहलाद पटेल संग रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी के चांसलर संतोष चौबे ने किया दीप प्रज्वलन
- चिल्ड्रेन सिनेमा पर सिनेराइटर संजय चौहान ने की बच्चों से बात
- रैली और कला जागरुकता से संबंधित नुक्कड़ के साथ हुआ विश्वरंग का शुभारंभ
- तनुश्री शंकर बैले डांस ग्रुप ने दी मनमोहक प्रस्तुति के साथ दिया पर्यावरण बचाओ का संदेश
- पद्मश्री उस्ताद राशिद खान के रविन्द्र गीतों ने जीता श्रोताओं के दिल

भोपाल : 25 नवंबर/ मध्य भारत में कला और साहित्य के सबसे बड़े उत्सव विश्वरंग का आगाज आज हो गया है। रबींद्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी में महोत्सव का शुभारंभ बड़ी धूमधाम से यात्रा के साथ हुआ। यह विश्वरंग महोत्सव का तीसरा संस्करण है। समारोह का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री श्री प्रहलाद पटेल की गरिमाई  उपस्थिति में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।  इसके साथ ही उन्होंने विश्वरंग की वेबसाइट के साथ गुरुदेव रबिंद्रनाथ की प्रतिमा का भी अनावरण किया। गुरु रबिन्द्र नाथ टैगोर द्वरा 1905 में लिखा गया बांग्ला देश भक्ति गीत 'एकला चलो रे' की भी प्रस्तुति हुई। मंच पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और विश्वरंग के महानिदेशक संतोष चौबे सहित विश्वरंग की निदेशक अदिति वत्स भी उपस्थित रहीं। 

मध्य भारत का कला और साहित्य महोत्सव ‘विश्वरंग’ आज विश्वव्यापी हो चुका है, 26 देशों में विश्वरंग का आयोजन हो रहा है। इस बार कोरोना महामारी के कारण विश्वरंग के कुछ सत्रों का आयोजन वर्चुअल मोड में किया जा रहा है। 

विश्वरंग के बारे में माननीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि, विश्वरंग अपने नाम अनुसार ही काम कर रहा है। इस अनूठे समारोह की वजह से कई देशों में भारतीय कला, संस्कृति और साहित्य की गूंज पहुंच रही है। मैं उम्मीद करता हूं की हमारे कला संस्कृति पूरी दुनिया तक पहुंचे। मैं विश्वरंग परिवार को बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। इस महोत्सव में जानी मानी हस्तियां शिरकत करने जा रहीं हैं। कला और साहित्य पसंद करने वाले जनमन के लिए अलग अलग प्रकार की कला और कलाकारों को देखने, सुनने का यह बेहतरीन मौका है।    

उद्घाटन सत्र के बाद ‘तनुश्री शंकर बैले डांस ग्रुप’ ने रविन्द्र गीतों पर मनमोहक प्रस्तुति दी। गुरु रबिन्द्र नाथ टैगोर के गीतों को रविंद्र गीतों के नाम से जाना जाता है। मनोरम नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल जीत लिया। इस खूबसूरत और मन मोहने वाले परफॉरमेंस के बाद भारतीय शास्त्रीय संगीतकार पद्मश्री उस्ताद राशिद खान ने अपने रविन्द्र गीतों से समा बांध दिया। राशिद खान रविंद्र गीत पहले भी प्रस्तुत कर चुके हैं। उनकी मधुर आवाज और संगीत ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। 

स्टोरीटेलिंग एंड चिल्ड्रेन सिनेमा
आज के पहले लाइव सत्र स्क्रीनप्ले राइटिंग एंड स्टोरी टेलिंग फॉर चिल्ड्रन में साक्षात्कार हुआ जाने माने स्क्रीनप्ले राइटर संजय चौहान से। संजय चौहान ने 'आई एम कलाम' , 'हजारों ख्वाहिशें ऐसी' , 'पान सिंह तोमर' जैसी बेहतरीन फिल्में बॉलीवुड के लिए लिखी हैं। संजय चौहान ने बच्चों को खूब पढ़ने , घूमने और ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिलने की और बात करने की हिदायत दी है। उन्होंने कहा क्रिएटिव राइटिंग करने के लिए यही सबसे महत्वपूर्ण बातें है। उन्होंने कहा की गोल सेट करने बेहद ज़रूरी है। उन्होंने जोड़ा की आजकल के बच्चे बेहद स्मार्ट है वे जानते हैं कि उन्हें जिंदगी में आगे क्या करना है। 

बैले में दिखा शिव तांडव और पर्यावरण बचाओ संदेश
उद्घाटन सत्र के बाद तनुश्री शंकर बैलट डांस ग्रुप ने रविन्द्र गीतों पर बेहद सुंदर प्रस्तुति दी। गुरुदेव रबिन्द्र नाथ टैगोर के गीतों को रविंद्र गीतों के नाम से जाना जाता है। बैले डांस 2 भागों में हुआ , पहले भाग में वातावरण के प्रति जागरूकता , जानवरों के प्रति सदभावना , मन मयूरी और शिव तांडव की झलक देखने को मिली । दूसरे भाग में तनुश्री शंकर के मार्गदर्शन में नृत्य की प्रस्तुति गुरुदेव रबिन्द्र की सबसे पहली और इकलौती अंग्रेजी कविता 'The child' के ऊपर मनोरम एवं दिल छू लेने वाली प्रस्तुति दी । इस कविता को अपनी आवाज विक्टर बेनर्जी ने दी है।

विश्वरंग में युवाज़ की भी दिखी सहभागिता
यूनिवर्सिटी के कम्युनिटी रेडियो 'युवाज यूथ की आवाज' ने विश्वरंग महोत्सव में बढ़ चढ़ कर भाग लिए , उन्होंने कार्यक्रम में आए हुए लोगों से जाना कि विश्वरंग उन्हें किस तरह प्रभावित करता है। युवाज़ पर विश्वरंग महोत्सव को लाइव सुन ने के लिए प्ले स्टोर से युवराज आईसेक्ट रेडियो को डाउनलोड किया जा सकता है।

5 ऑनलाइन सत्र आयोजित किये गए
आज ऑनलाइन 5 सत्र आयोजित किये गए। पहले सत्र में जाने माने साहित्यकार पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित रस्किन बॉन्ड से साक्षात्कार किया पल्लवी चतुर्वेदी ने। रस्किन बॉन्ड ने विश्वरंग के मंच पर होने पर खुशी जताई, उन्होंने बाल साहित्य पर चर्चा को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने बताया की बदलाव के लिए वे कई साल पहले पहाड़ों में आकर कॉटेज में रहने लगे। 10 साल जंगल में बिताने के बाद वे की प्रकृति के बेहद करीब आए। यही वजह थी कि पंछी ,जानवर , पेड़ और  फूल उनकी कहानी का हिस्सा बनते गए।आगे बात करते हुए कहा, जो बच्चें क्रिएटिव राइटिंग करना चाहते हैं, उन्हें उनकी भाषा पर पूरा आत्मविश्वास होना चाहिए, उन्हें किसी को देखकर या किसी की तरह लिखने की कोशिश नही करनी चाहिए और हर रोज लिखना चाहिए। साथ ही दूसरे सत्र में गुरु रविंद्र नाथ टैगोर के रविंद्र संगीत पर बेहद मनमोहक प्रस्तुति क्षमा मालवीय और ग्रुप के द्वारा दी गयी।

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