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2013 में जब्त किए गए क्षतिग्रस्त लैपटॉप में व्यापम के प्रमुख डेटा पर सवालिया निशान

Sep
27 2022

भोपाल, 24 सितम्बर/ मध्य प्रदेश पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) द्वारा 2013 में जब्त किया गया एक लैपटॉप व्यापम घोटाले में अहम भूमिका निभाने वाला था। हालांकि, चिंता यह थी कि, क्या क्षतिग्रस्त लैपटॉप अदालत में पेश किए जाने पर काम करेगा या नहीं। पूरे व्यापम मामले का आधार व्यापम के एक कर्मचारी नितिन महेंद्र के कंप्यूटर से बरामद एक एक्सेल शीट है, जो इस मामले के मुख्य आरोपियों में से एक है। वह परीक्षा के निदेशक और नियंत्रक- पंकज त्रिवेदी के साथ घोटाले में शामिल थे। तब उस लैपटॉप को जब्त करना अपने आप में एक कहानी थी, जिसने व्यापम मामले में एसटीएफ की जांच पर भी सवाल खड़े कर दिए थे। बहुत शोर-शराबे के बाद महेंद्र का लैपटॉप क्षतिग्रस्त हालत में बरामद किया गया था। बाद में उस लैपटॉप की हार्ड डिस्क को गुजरात की फॉरेंसिक लैबोरेटरी भेज दिया गया।

एक विश्वसनीय सूत्र ने शर्त पर कहा, यह चिंता का विषय था कि, क्या वह लैपटॉप और उसकी हार्ड डिस्क जब भी अदालत में पेश की जाएगी तो वह काम करेगी या नहीं। न केवल लैपटॉप बल्कि कई अन्य तकनीकी उपकरण जिन्हें सबूत के रूप में जब्त किया गया था, मामले के लिए महत्वपूर्ण हैं। यही वजह है कि एसटीएफ की भूमिका पर सवाल खड़े हुए और मामले की जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में मामले को सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। इस घोटाले में जालसाजी, प्रतिरूपण, रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और कार्यालय का दुरुपयोग शामिल है। यह और भी चौंकाने वाला है क्योंकि घोटाले में राज्यपाल कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, मंत्री, वरिष्ठ नौकरशाह, बिचौलिए और परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवार शामिल हैं। इस घोटाले में मेडिकल छात्रों और राज्य सरकार के कर्मचारियों, जैसे खाद्य निरीक्षक, परिवहन कांस्टेबल, पुलिस कर्मियों, स्कूल शिक्षकों, डेयरी आपूर्ति अधिकारियों, वन रक्षकों और अन्य के चयन के लिए व्यावसायिक शिक्षा मंडल (व्यापम) द्वारा आयोजित 13 अलग-अलग परीक्षाएं शामिल थीं।

हर साल लगभग 3.2 मिलियन छात्रों द्वारा परीक्षा दी जाती थी, जिनमें से कई को वास्तव में अन्य अयोग्य छात्रों के लिए प्रॉक्सी का भुगतान किया जाता था। इसमें एक इंजन-बोगी प्रणाली भी शामिल थी जिसमें बैठने की व्यवस्था में हेरफेर किया गया था ताकि एक भुगतान करने वाले होशियार छात्र को दो अन्य लोगों के बीच बैठाया जा सके ताकि नकल आसानी से हो सके।

विश्वसनीय सूत्रों ने आईएएनएस को बताया, उन्होंने (आरोपियों) सब कुछ चालाकी से किया, लेकिन वे ओएमआर शीट में छेड़छाड़ के कारण पकड़े गए। कई मामलों में, अंतिम परिणाम शीट में सीधे हेरफेर भी किया गया था। जांच से पता चला कि ओएमआर शीट पर छेड़छाड़ या हेरफेर रात में गुप्त रूप से किया जाता था। रिपोटरें के अनुसार, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तब राज्य विधानसभा में स्वीकार किया था कि 2007 से राज्य सरकार द्वारा की गई 1,47,000 भर्तियों में जालसाजी, झूठी पहचान के कम से कम 1000 मामले सामने आए।

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