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देश का प्रतिष्ठित "राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान समारोह" का रवीन्द्र भवन भोपाल में भव्य आगाज

Apr
15 2022

- वनमाली कथाशीर्ष सम्मान से अलंकृत हुए प्रो. धनंजय वर्मा

- वनमाली राष्ट्रीय कथा सम्मान से सम्मानित हुई वरिष्ठ कथाकार गीतांजलि श्री

- वनमाली प्रवासी भारतीय कथा सम्मान से अलंकृत हुई दिव्या माथुर (लंदन)

- वनमाली विज्ञान कथा सम्मान से अलंकृत हुए देवेन्द्र मेवाड़ी 

भोपाल : 15 अप्रैल/ सुप्रतिष्ठित कथाकार, शिक्षाविद् तथा विचारक स्वर्गीय जगन्नाथ प्रसाद चौबे 'वनमाली जी' के रचनात्मक योगदान और स्मृति को समर्पित संस्थान 'वनमाली सृजन पीठ' द्वारा तीन दिवसीय राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान समारोह का आगाज रबीन्द्र भवन, भोपाल में किया गया। 'विश्व रंग' टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव के अंतर्गत वनमाली सृजन पीठ, भोपाल रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय , आईसेक्ट पब्लिकेशन, टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में  आयोजित वनमाली कथा सम्मान समारोह में प्रथम 'राष्ट्रीय वनमाली कथाशीर्ष  सम्मान' से सुप्रसिद्ध समालोचक प्रोफेसर धनंजय वर्मा (उज्जैन) और 'वनमाली राष्ट्रीय कथा सम्मान' से वरिष्ठ कथाकार सुश्री गीतांजलि श्री (दिल्ली) को शॉल श्रीफल,प्रशस्ति पत्र एवं एक–एक लाख रुपये सम्मान राशि प्रदान कर अलंकृत किया गया।

इसके अतिरिक्त 'वनमाली कथा मध्यप्रदेश सम्मान' वरिष्ठ कथाकार श्री हरि भटनागर (भोपाल), 'वनमाली युवा कथा सम्मान' युवा कथाकार श्री चंदन पांडेय,(बंगलौर), 'वनमाली कथा आलोचना सम्मान' युवा आलोचक श्री वैभव सिंह (दिल्ली), 'वनमाली साहित्यिक पत्रिका सम्मान' दिल्ली से प्रकाशित चर्चित मासिक पत्रिका 'कथादेश' को प्रदान किये गये।

उल्लेखनीय है कि वनमाली कथा सम्मान में इस बार से वनमाली कथाशीर्ष सम्मान के साथ ही पहली बार दो और श्रेणियों में रचनाकारों को सम्मानित किया गया। पहला 'वनमाली प्रवासी भारतीय कथा सम्मान' वरिष्ठ कथाकार सुश्री दिव्या माथुर (लंदन) को प्रदान किया गया तथा पहला 'वनमाली विज्ञान कथा सम्मान' वरिष्ठ विज्ञान लेखक श्री देवेंद्र मेवाड़ी (दिल्ली) को प्रदान किया गया।

वनमाली कथा मध्यप्रदेश सम्मान, वनमाली युवा कथा सम्मान, वनमाली कथा आलोचना सम्मान, वनमाली साहित्यिक पत्रिका सम्मान, वनमाली प्रवासी भारतीय कथा सम्मान, वनमाली विज्ञान कथा सम्मान से सम्मानित रचनाकारों को शॉल–श्रीफल, प्रशस्ति–पत्र एवं इक्यावन– इक्यावन हजार रुपये सम्मान राशि प्रदान कर अलंकृत किया गया।

इस अवसर पर वनमाली सृजन पीठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ कवि एवं कथाकार श्री संतोष चौबे ने कहा कि विगत 30 वर्षों से वनमाली सृजन पीठ राष्ट्रीय स्तर पर वनमाली कथा सम्मान का आयोजन करता आ रहा है और हिंदी एवं भारतीय भाषाओं के विस्तार के लिए लेखनरत साहित्यकारों को सम्मानित कर रहा है। आगे उन्होंने कहा कि आज हिंदी के सामने अंतरराष्ट्रीय भाषा बनने के बड़े अवसर खुले हैं, इस दिशा में वनमाली सृजन पीठ एवं विश्वरंग टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव निरंतर जमीनी स्तर से लेकर वैश्विक स्तर पर कार्यरत है।  

वनमाली सृजन पीठ, भोपाल के अध्यक्ष वरिष्ठ कथाकार श्री मुकेश वर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि 'विश्व रंग' के अंतर्गत वनमाली सृजन पीठ द्वारा प्रदान किए जाने वाले 'वनमाली कथा सम्मान' समकालीन कथा परिदृश्य में लोकतांत्रिक एवं मानवीय मूल्यों की तलाश में जुटे कथा साहित्य की पुनःप्रतिष्ठा करने एवं उसे समुचित सम्मान प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित द्विवार्षिक पुरस्कार है।

पूर्व रंग में कबीर के पदों की सांगीतिक प्रस्तुति

इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व रंग में कबीर पदों की सांगीतिक प्रस्तुति से हुई। इसमें श्री राजीव सिंह एवं साथीगण द्वारा प्रस्तुति दी गई। पूर्व रंग में कबीर के निर्गुण पदों का गायन कर राजीव सिंह ने शब्द संस्कृति के इस उत्सव में अनूठा रंग बिखेरा। उन्होंने अपने गायन में “चदरिया झीनी रे...”, “मो को कहां ढूंढे रे बंदे...” सहित कबीर की उन रचनाओं को चुना जो सदियों से मनुष्यता का संदेश मुखरित करती रही हैं। इसके अलावा “रंगों से रंग मिले, नए नए ढंग मिले...” की मनमहोक प्रस्तुति दी। इस अवसर पर टैगोर विश्व कला और संस्कृति केन्द्र के निदेशक विनय उपाध्याय ने पूर्व रंग सभा का संचालन करते हुए उत्सव के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला।

'वनमाली' पत्रिका का लोकार्पण 

नई सदी की नई रचनाशीलता को सम्यक एवं समुचित स्थान देने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई लोकतांत्रिक मूल्यों की समावेशी पत्रिका 'वनमाली' ने अपने प्रवेशांक से ही साहित्य जगत में रचनात्मक उपस्थिति दर्ज कराई  है। वनमाली पत्रिका का ताजा अंक भी वनमाली कथा सम्मान समारोह में लोकार्पित किया गया। इस अवसर पर रंग संवाद, विश्व रंग एवं इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए पत्रिकाओं के ताजा अंकों को भी लोकार्पित किया गया।

कथा भोपाल का लोकार्पण

आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा भोपाल के लगभग 200 कथाकारों की कहानियों को 'कथा भोपाल' के रूप में चार वृहद खंडों में संकलित, संपादित एवं प्रकाशित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। 

विज्ञान कथाकोश का लोकार्पण

आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा देश के लगभग 200 कथाकारों की विज्ञान कथाओं को विज्ञान कथाकोश के रूप में छः वृहद खंडों में संकलित, संपादित एवं प्रकाशित करने का रचनात्मक कार्य किया है। इस महत्वपूर्ण विज्ञान कथाकोश के प्रधान सम्पादक श्री संतोष चौबे एवं सम्पादक श्री सुख देव प्रसाद है।

वनमाली कथा सम्मान समारोह के अंतर्गत नाटक “आदमी और कुत्ता” का मंचन 

नाटक में रेल का डिब्बा वो स्थान है जहां अपरिचित लोग एक दूसरे के साथ लंबा समय बिताते है और उसी दौरान एक दूसरे के व्यवहार आचार-विचार से परिचित हो जाते हैं। रेल में पुरा संसार चलता है। भांति- भांति के लोग। एक समय था जब यात्रा के दौरान यात्रियों से परिचय, उनसे खेल, राजनीति, धर्म  की चर्चा यहां तक की आपसी सुख- दुख जैसी व्यक्तिगत बातों को सांझा किया जाता था। एक दूसरे के घर से लाए गए खानों को बांट कर खाया जाता था, लेकिन परिस्थितियां बदल चुकी है। वर्तमान में व्यक्ति अकेले यात्रा करता है अपने आस-पास की घटनाओं से अनभिज्ञ। अपने मोबाइल और लैपटॉप में व्यस्त रहता है। ऐसे में इस कहानी की परिस्थिति मुझे जीवंत लगी। कहानी को पूर्वाभ्यास के दौरान कलाकारों द्वारा इंप्रोवाइज कर नाटक की शक्ल देने की कोशिश है जबकि कहानी अपने आप में संपूर्ण है।

जगन्नाथ प्रसाद चौबे नवमाली जी की कहानी आदमी और कुत्ता, मनुष्य के पशु के अंतर को प्रस्तुत करता है। इंसान बने रहने की कोशिश, सदियों से मनुष्य सिर्फ स्वयं के ही नफे नुकसान को देखता आ रहा है। नफा पाने के लिए या नुकसान से बचने के लिए एक दुसरे के सामने गिड़गिड़ाता है। हक हो या सुविधा अपने कद अनुसार कुछ कीमत देकर उसे पाने की कौशिश करता रहा है। वर्तमान में भी हम अपने आस पास इस तरह की घटना को अक्सर घटता हुआ पाते है और मूक दर्शक बन देखते हैं और हस्तक्षेप करने के बजाय परिस्थिति का आस्वादन लेते हैं जैसे हम उस दायरे से बाहर हो।

कहानी आदमी और कुत्ता में दो संवाद जिसे मुझे नाट्य प्रस्तुति के लिए प्रेरित करती है। एकः आदमी तो कुत्ता है, रोटी का टुकड़ा डाल दिया उसका भौंकना बंद। दूसरा: यह कैसा भयानक विश्वास है जो आदमी को कुत्ता समझने को मजबूर करता है।

प्रस्तुत नाटक में लेखक के माध्यम से आदमी के भीतर आदमी से मिलने की एक कवायद है। 

मनोज नायर वर्तमान में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक है। आप पिछले 30 वर्षों से रंगमंच में सक्रिय है। रंगमंडल भारत भवन से लेकर श्री हबीब तनवीर के सानिध्य में रहकर लगभग 35 नाटकों में अभिनय किया और देश-विदेश में प्रस्तुतियां दी है। 2001 में शैडो नाट्य संस्था का गठन किया जो मध्यप्रदेश में मूकाभिनय पर काम करने वाली एक मात्र संस्था है। अब तक 30 से भी अधिक नाटकों का निर्देशन। 5 नाटकों, 20 लघु नाटकों का लेखन और मंचन। विभिन्न आकारों का आयामों के जीवन में हस्तक्षेप को लेकर नाटकों का लेखन और मंचन, जिसमें बाक्स, लास्ट एंगल, बिग बैंग उल्लेखनीय है। 15 वर्षों से विभिन्न संस्थाओं के लिए नाट्य कार्यशालाओं का संचालन। कविताओं और गीतों के मंचन में तानाबाना, मुक्ति का महायज्ञ, कविता यात्रा, बालगीत, हमारी सारी दुनिया, अंर्तलय आदि शामिल है।

वनमाली हिन्दी के कथा जगत के एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर थे। 1934 में उनकी पहली कहानी जिल्दसाज कलकत्ता से निकलने वाले विश्वामित्र मासिक में छपी और उसके बाद लगभग पच्चीस वर्षों तक वे प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं सरस्वती, कहानी, विश्वामित्र, विशाल भारत, लोकमित्र, भारती, माया, माधुरी आदि में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहे। अनुभूति की तीव्रता, कहानी में नाटकीय प्रभाव, सूक्ष्म मनौवैज्ञानिक समझ और विश्लेषण की क्षमता के कारण उनकी कहानियों को व्यापक पाठक वर्ग और आलोचकों दोनों से ही सराहना प्राप्त हुई। आदमी और कुत्ता कहानी को आचार्य नंददुलारे वचाजपेयी ने अपनी श्रेष्ठ के संकलन में स्थान दिया था। 

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