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अफसर ने अधीक्षिका से कहा, "रात को रोज एक छात्रा भेजो सुबह ले जाओ नहीं तो खुद आओ"

Aug
09 2022

मप्र के एक अफसर पर लगा आबरु की मांग का आरोप

शिवपुरी, 9 अगस्त| मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले की सीनियर कन्या छात्रावास की तत्कालीन अधीक्षिका ने एक प्रशासनिक अधिकारी पर आबरु की मांग करने का आरोप लगाते हुए 50 रुपये के शपथ पत्र पर जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों से शिकायत की है।

छात्रावास की तत्कालीन अधीक्षिका राजकुमारी कोली ने कहा है कि, आदिम जाति के तत्कालीन जिला संयोजक एव हाल में पिछोर में पदस्थ एसडीएम बिजेंद्र यादव ने मई माह में छात्रावास का निरीक्षण किया था। जिसके बाद दबाव बनाते हुए उन्होंने कहा था कि रात को एक छात्रा को उनके बंगले पर भेजा करे और सुबह उस छात्रा को वापस ले जाया करे। जब वह इस बात पर तैयार नहीं हुई तो एसडीएम कहा कि जब तक वह छात्राओं को नहीं भेज रही तब तक वह खुद उनके बंगले पर आ जाए।

तत्कालीन अधीक्षिका राजकुमारी का आरोप है कि जब उसने एसडीएम यादव की मंशा को पूरा नहीं किया तो उन्होंने उसे धमकी दी थी कि वह छात्रावास बंद करवा देंगे और उसे आफिस में अटैच कर देंगे।

बकौल राजकुमारी इसी के चलते बिजेंद्र यादव ने नियमों को ताक पर रख कर छात्रावास को बंद करवा कर छात्राओं को 50 सीटर शासकीय अनुसूचित जाति जिला स्तरीय कन्या उत्कृष्ट छात्रावास कमलागंज में शिफ्ट कर दिया, जबकि वहां पर सिर्फ 50 छात्राओं के रहने की ही व्यवस्था है। ऐसे में उस छात्रावास में 100 छात्राएं कैसे रहेंगी?

तत्कालीन अधीक्षिका कहना है कि उसने बिजेंद्र यादव को बताया था कि जिस मकान में छात्रावास चल रहा है वह किराए का मकान है। मकान मालिक के पास एग्रीमेंट में एक माह पहले खाली करवाने की सूचना देने का स्पष्ट शब्दों में लिखा हुआ है, जिसके बाद बिना नोटिस जारी करते हुए छात्रावास को खाली करवा लिया गया। इसके साथ ही जिस रात उन्हें एसडीएम पिछोर का चार्ज मिला था, उसी रात उसका नियमबद्ध ट्रांसफर भी करवा दिया गया।

तत्कालीन अधीक्षिका ने एसडीएम पिछोर पर ये भी आरोप लगाए हैं कि एसडीएम रात के अंधेरे में छात्रावास आ जाते थे, वह निरीक्षण के नाम पर अपने गंदे अरमानों को पूरा करना चाहते थे, जबकि कोई भी पुरूष या पुरुष अधिकारी कन्या छात्रावासों का निरीक्षण करने के लिए नहीं जा सकता है। छात्रावास अधीक्षिका ने इस संबंध में कुछ फोटो भी शिकायत के साथ उपलब्ध करवाए हैं।

इस पूरे मामले में पिछोर के एसडीएम यादव का कहना है कि वह अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने के लिए छात्रावासों के निरीक्षण पर जाते थे। जो आरोप लगाए गए हैं निराधार है। छात्रावास की अधीक्षिका का ट्रांसफर प्रक्रिया का हिस्सा था और इसी बात से नाराज होकर वह इस तरह के उल्टे सीधे आरोप लगा रही है।

एसडीएम के अनुसार उनके द्वारा भी कलेक्टर से निवेदन किया है कि इस मामले की पूरी जांच करवाई जाए और जो भी दोषी हो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं एक छात्रावास अधीक्षिकता द्वारा शिकायत किए जाने के बाद कुछ छात्रावास अधीक्षिकाएं एसडीएम के समर्थन में उतर आई हैं। इन महिला अधीक्षिकाओं ने लिखित में कहा है कि एसडीएम का व्यवहार महिलाओं के प्रति बहुत अच्छा है। वह महिलाओं का सम्मान करते हैं। जो आरोप लगाए गए हैं वह निराधार हैं।

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