Kharinews

'मुफ्त उपहार' के बचाव में सुप्रीम कोर्ट पहुंची आप ने कहा- 'कल्याणकारी योजनाओं ने जीवन को मौलिक रूप से बदल दिया है'

Aug
09 2022

नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)| आम आदमी पार्टी (आप) ने 'मुफ्त उपहार' के नियमन (रेगुलेशन) की मांग वाली एक जनहित याचिका में हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। आप ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर 'मुफ्त उपहार/मुफ्त रेवड़ियां' बांटने पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर पुरजोर विरोध जताया। पार्टी ने शीर्ष अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय के भाजपा से मजबूत संबंध हैं और वे ऐसी कल्याणकारी योजनाओं का विरोध करना चाहते हैं, जिन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के जीवन को मौलिक रूप से बदल दिया है। आप ने कहा कि ऐसी योजनाओं को याचिकाकर्ता ने 'मुफ्तखोरी' के तौर पर दिखाया है।

पार्टी ने कहा है कि वंचित वर्ग को मुफ्त पानी, बिजली, ट्रांसपोर्ट, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि की सुविधाएं देना मुफ्त रेवड़ी बांटना नहीं कहा जा सकता।

राजनीतिक दल ने कहा, "मुफ्त शिक्षा, पेयजल और स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है, हालांकि कॉर्पोरेट ऋण माफ करना मुफ्तखोरी है।"

आप की याचिका में कहा गया है, "याचिकाकर्ता की प्रार्थना राजनीतिक दलों को इस जनादेश को पूरा करने के तरीके के बारे में वादा करने या कोई दावा करने से रोकने के लिए न केवल अस्थिर है, बल्कि दुर्भावनापूर्ण भी है।"

इसमें कहा गया है कि इस तरह के समाजवादी और कल्याणवादी एजेंडे को चुनावी विमर्श से हटाकर, याचिकाकर्ता लोगों के कल्याण के लिए अपील के बजाय जाति और सांप्रदायिक अपील पर निर्भर एक अलग, अधिक संकीर्ण प्रकार की राजनीति के हितों को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है। राजनीतिक दल ने कहा, "याचिका, 'मुफ्तखोरी' के लिए अस्पष्ट रूप से संदर्भित करते हुए, स्पष्ट रूप से जनता के लिए समाजवादी और कल्याणकारी उपायों पर राजकोषीय व्यय को लक्षित करके आर्थिक विकास के एक विशेष मॉडल के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई की मांग करती है।"

आम आदमी पार्टी ने ये भी कहा कि याचिका में राजकोषीय घाटे को लेकर चिंता जताई गई है लेकिन इसमें बड़े उद्योगों और व्यापारों को केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा टैक्स में छूट देने व अन्य तरह की रुटीन में दी जाने वाली सब्सिडी की मुप्त रेवड़ियों से होने वाले बड़े वित्तीय घाटे को नजरअंदाज किया गया है

याचिका में कहा गया है, "यह बता रहा है कि याचिकाकर्ता, राजकोषीय घाटे के बारे में चिंतित होने का दावा करने के बावजूद, बड़े उद्योगों और व्यवसायों को नियमित रूप से प्रदान किए जाने वाले कर छूट, सब्सिडी और अन्य ऐसी 'मुफ्तखोरी' के कारण राजकोष को भारी राजकोषीय नुकसान की अनदेखी कर रहे हैं।"

इसमें आगे कहा गया है कि याचिकाकर्ता राष्ट्र की आर्थिक सेहत सुधारने का जिम्मा महज वंचित वर्ग पर डाल रहा है और यह याचिका दायर करने के पीछे राजनैतिक उद्देश्य हैं, क्योंकि इसमें की गई मांग वित्तीय घाटे के बारे में या 'मुफ्त रेवड़ियों' पर रोक की नहीं है, बल्कि मांग की गई है कि राजनैतिक दलों को मुफ्त रेवड़ियों की नीतियां घोषित करने से रोका जाए। इस तरह की मांग करते वक्त याचिकाकर्ता ने संविधान में दिए गए सामाजिक और कल्याणकारी एजेंडे के सिद्धांत की अनदेखी की है।

आप ने दावा किया कि उसे संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार है, जिसमें चुनावी भाषण और दलितों के उत्थान के वादे शामिल हैं।

इसमें कहा गया है, "इस तरह के भाषण को प्रतिबंधित करना किसी भी वित्तीय सुधार के लिए अप्रासंगिक होगा, और चुनाव और नीति-निर्माण के स्वस्थ लोकतांत्रिक कामकाज के लिए भी हानिकारक होगा।"

आप ने कहा कि जब भी कॉर्पोरेट क्षेत्र की सहायता करने और अमीरों को और समृद्ध करने की बात आई है, केंद्र ने सरकारी खजाने से महत्वपूर्ण राशि खर्च की है।

पार्टी ने विकसित देशों द्वारा अपनाई गई कल्याणकारी योजनाओं का भी हवाला दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने उपाध्याय की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्वीकार किया था कि गरीबों को कुछ मदद की जरूरत है, लेकिन वह यह भी जानना चाहता है कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर मुफ्त में बांटी जाने वाली चीजों या सुविधाओं का क्या प्रभाव पड़ता है? शीर्ष अदालत ने हितधारकों से सुझाव मांगे थे और तर्कहीन मुफ्तखोरी से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए एक विशेषज्ञ पैनल स्थापित करने की सिफारिश की थी।

बता दें कि वकील अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि चुनाव प्रचार के दौरान मुफ्त की योजनाओं की घोषणा को मतदाताओं को रिश्वत देने की तरह देखा जाए। उन्होंने मांग की है कि चुनाव आयोग अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ऐसी घोषणाएं करने वाली पार्टी की मान्यता रद्द करे।

Related Articles

Comments

 

केटीआर की आरजीयूकेटी यात्रा के दौरान छात्रों को बंद नहीं किया गया: तेलंगाना सरकार

Read Full Article

Subscribe To Our Mailing List

Your e-mail will be secure with us.
We will not share your information with anyone !

Archive