अयोध्या में प्रभु श्रीराम का मंदिर ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना का प्रत्यक्ष प्रतीक, राम मंदिर पर लोकसभा का संकल्प

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नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। राम मंदिर के ऐतिहासिक निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पर लोकसभा में हुई चर्चा के बाद राम मंदिर से जुड़ा संकल्प सदन में पेश करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि अयोध्या में प्रभु श्री राम का मंदिर ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना का प्रत्यक्ष प्रतीक है।

बिरला ने सदन में राम मंदिर को लेकर संकल्प पढ़ते हुए कहा कि,” हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान राम से जुड़े इस पावन अवसर पर पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने में अतुलनीय भूमिका निभाई है। उन्होंने श्री रामलला के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा के अनुष्ठान के लिए पूरे समर्पित भाव से कठिन यम-नियमों का पालन किया। इस दौरान वे नासिक से लेपाक्षी और त्रिप्रयार से लेकर रामेश्वरम तक प्रभु श्रीराम से जुड़े महत्वपूर्ण तीर्थ स्थानों पर भी गए और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। इस यात्रा ने देशवासियों को एक बार फिर विविधता में एकता की अपनी शक्ति का अनुभव कराया है, और इससे एक अद्भुत, आध्यात्मिक चेतना की जागृति समग्र जनमानस में हुई है।”

प्रस्ताव में कहा गया है, “प्राचीन पावन नगरी अयोध्या में प्रभु श्री राम की जन्मस्थली पर उनके भव्य-दिव्य मंदिर का निर्माण देश के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली उपलब्धि है। हम सभी सांसद पूरी एकता, श्र‌द्धा और भक्तिभाव से इस अवसर पर देशवासियों के उल्लास और उमंग में शामिल हैं, साथ ही इस प्रस्ताव के जरिए इसकी सराहना करते हैं। देश की विकास यात्रा में ये एक अविस्मरणीय क्षण है, जो भारत के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारतीय सभ्यता और संस्कृति के कण-कण में प्रभु श्री राम, माता सीता और रामायण रचे-बसे हैं। हमारे लोकतांत्रिक मूल्य और सभी के लिए न्याय को समर्पित हमारा संविधान, रामराज्य के आदर्शों से प्रेरित रहा है। रामराज्य का आदर्श पूज्य बापू के भी हृदय में बसा था। ये हमारा परम सौभाग्य है कि हम सभी अयोध्या के मनोहारी मंदिर में रामलला के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा के साक्षी बने हैं।

अयोध्या में बन रहा प्रभु श्री राम का मंदिर सिर्फ पत्थरों का ढांचा भर नहीं है, बल्कि आस्था और भक्ति के अनंत भावों से परिपूर्ण है। 22 जनवरी, 2024 पूरे भारतवर्ष के लिए एक ऐसी तिथि है, जिसने देश के कोने-कोने को अ‌द्भुत आनंद और उत्साह से भर दिया। दुनियाभर की अलग-अलग संस्कृतियों में भी राम मंदिर की खूब चर्चा रही। हर ओर आस्था का सागर उमड़ता दिखा। यह एक राष्ट्रीय पर्व का दिन बन गया है, जिसको लेकर युग-युगांतर तक हमारी पीढ़ियां अभिभूत होती रहेंगी।”

संकल्प को पढ़ते हुए बिरला ने आगे कहा, “22 जनवरी को प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में माननीय प्रधानमंत्री जी ने बहुत विस्तार से देश की इस आध्यात्मिक चेतना के जागृत होने की बात कही है। इस अवसर ने ये भी सिद्ध किया है कि एक राष्ट्र के रूप में हमारी चेतना निरंतर सशक्त हो रही है। समाज के हर वर्ग ने पूरी एकता और स‌द्भावना का परिचय देते हुए प्रभु श्रीराम का हृदय से स्वागत किया है। अयोध्या में प्रभु श्री राम का मंदिर ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना का प्रत्यक्ष प्रतीक है। इस अवसर ने ये भी दिखाया है कि समाज में समरसता बढ़ाने में हमारे सामूहिक प्रयासों का कितना बड़ा योगदान है।

इस पल के साकार होने में हमारी न्यायपालिका और समाज के एक बड़े हिस्से की भूमिका भी उतनी ही अहम रही है। जनमानस का हमारे कानून और लोकतंत्र पर विश्वास, ये दिखाता है कि हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव कितनी सशक्त और गहरी है। जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, तब प्रधानमंत्री के वक्तव्य ने समग्र देश में जय-पराजय की भावना की जगह शांति बनाए रखने की अ‌द्भुत प्रेरणा समाज को दी। कोर्ट के आदेश पर चलते हुए सरकार ने तुरंत ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया। इससे मंदिर निर्माण का कार्य तेज गति से चला और 4 वर्ष में ही प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन संपन्न हुआ।

सदियों की तपस्या के बाद अयोध्या में बन रहे भगवान श्रीराम के मंदिर से देश में सुशासन और जन-कल्याण के नए युग का शुभारंभ हुआ है। भगवान श्रीराम ने हमेशा समाज के सभी वर्गों का सम्मान किया और लोगों के कल्याण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। जन-आकांक्षाओं को पूरा करना उनके लिए सदैव सर्वोपरि रहा। माननीय प्रधानमंत्री ने कहा है कि इस ऐतिहासिक अवसर ने आने वाली कई सदियों के लिए भारत में हमारे परंपराओं के पुनर्जागरण और विकसित भारत की नींव को सशक्त किया है।

उन्होंने कहा है कि ‘राम से राष्ट्र’ और ‘देव से देश’ तक हमारे लिए अपनी चेतना को विस्तार देना जरूरी है। निश्चित रूप से, इससे वर्ष 2047 तक एक विकसित और समावेशी भारत बनाने के हम सभी के संकल्प को और बल मिलने वाला है। आज ये कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि भारतवर्ष प्रभु श्रीराम के पदचिह्नों का अनुसरण कर रहा है। आज समाज का हर वर्ग ये देख रहा है कि उसके जीवन को बेहतर बनाने के लिए कैसे निरंतर एक के बाद एक प्रयास किए जा रहे हैं। आज हर किसी की आकांक्षाओं को ना केवल प्राथमिकता मिल रही है, बल्कि उन्हें पूरा भी किया जा रहा है, ताकि विकास में कोई पीछे न छूट जाए।

अयोध्या में जन-जन की भावनाओं का प्रतीक बने प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर से जुड़े इस प्रस्ताव को पारित करते हुए हम सभी बहुत गौरवान्वित हैं। हमें विश्वास है कि ये ऐतिहासिक उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को आशा, एकता और सामूहिकता के मूल्यों का संदेश देगी। इसके साथ ही ये हमारे देश की विविधता में एकता की भावना को भी और प्रगाढ़ करेगी।”