30 मई 1826 : जब ‘उदन्त मार्तण्ड’ के रूप में हिंदी को मिली आवाज,...

नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। पत्रकारिता एक ऐसा शब्द, जो समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति को भी आगे बढ़ने, लड़ने की ताकत या हौसला दे सकता है। हर साल 30 मई को देशभर में ‘हिन्दी पत्रकारिता दिवस’ मनाया जाता है। यह दिन हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1826 में हिंदी का पहला समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ प्रकाशित हुआ था।

‘यूं ही कोई बेवफा नहीं होता’ कहा और दुनिया को अलविदा कह पाठकों संग...

नई दिल्ली, 28 मई (आईएएनएस)। उर्दू अदब का एक नरम लहजा हमेशा के लिए खामोश हो गया। अपनी सादगी भरी शायरी से करोड़ों दिलों में जगह बनाने वाले शायर बशीर बद्र अब इस दुनिया में नहीं रहे। पद्मश्री से सम्मानित बशीर बद्र ने गुरुवार को भोपाल स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही उर्दू शायरी का एक ऐसा खूबसूरत और नरम लहजा खामोश हो गया, जिसने आम आदमी की भावनाओं को बेहद आसान शब्दों में दुनिया के सामने रखा। उनके निधन से प्रशंसक कसक के साथ बस इतना ही कह पाए "फिर से खुदा बनाएगा कोई नया जहां, दुनिया को यूं मिटाएगी इक्कीसवीं सदी...।"

शिवराज सिंह चौहान की किताब ‘अपनापन’ का विमोचन, पीएम मोदी के सच्चे और अनुकरणीय...

नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने दशकों लंबे संबंधों और उनके सार्वजनिक जीवन की झलक पेश करने वाली पुस्तक 'अपनापन: नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव' का मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में विमोचन किया गया।

सरकारी नौकरी छोड़ साहित्य की सेवा करने वाले शरद जोशी, जो मानते थे ‘लेखन...

मुंबई, 20 मई (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य और व्यंग्य लेखन की दुनिया में शरद जोशी एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अपनी प्रभावशाली लेखनी से समाज, राजनीति और व्यवस्था पर गहरी चोट की। सरकारी नौकरी की सुरक्षित जिंदगी छोड़कर उन्होंने साहित्य सृजन को अपना जीवन बना लिया। शरद जोशी मानते थे कि “लिखना जिंदगी जी लेने की एक तरकीब है” और इसी सोच के साथ उन्होंने जीवनभर लेखन किया।

हजारी प्रसाद द्विवेदी पुण्यतिथि विशेष: हिंदी साहित्य को समृद्ध करने वाले विचारक और आलोचक...

नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति के क्षेत्र में आज भी जब किसी महान साहित्यकार की चर्चा होती है तो हजारी प्रसाद द्विवेदी का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। 19 मई 1979 को इस संसार से विदा हुए द्विवेदी अपनी रचनाओं के जरिए हर पीढ़ी के बीच अमर रहे।

कवि मंगलेश डबराल की रचनाओं में सामाजिक अन्याय और पाखंड के खिलाफ उठती थी...

नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। आधुनिक हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर, कवि, गद्यकार और वरिष्ठ पत्रकार मंगलेश डबराल हिंदी साहित्य जगत का एक ऐसा नाम है, जिनकी कविताएं पाठक को एक अलग अपनी दुनिया में ले जाती हैं, जो उसे अपनी ही लगती है। सरल, सौम्य और विनम्र व्यक्तित्व वाले कलमकार ने अपनी कविताओं में इंसानी संवेदनाओं को गहराई से उकेरा।

जगदीशचंद्र माथुर: हिंदी नाटक और रेडियो युग के वह शिल्पकार, जिन्होंने साहित्य को दी...

नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य के इतिहास में कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने सिर्फ लेखन नहीं किया, बल्कि पूरे एक युग की सोच और अभिव्यक्ति को दिशा दी। ऐसे ही महान साहित्यकार थे जगदीशचंद्र माथुर, जिनका जन्म 16 जुलाई 1917 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हुआ था।

भागलपुर: 11614 पांडुलिपियों का किया गया सर्वेक्षण, ज्ञान भारतम ऐप पर ग्रंथ-दस्तावेज अपलोड

भागलपुर, 11 मई (आईएएनएस)। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, कला एवं संस्कृति विभाग और बिहार सरकार के साझा प्रयास से ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत भागलपुर जिले की कुल 11614 पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। चम्पापुर दिगंबर जैन मंदिर, भगवान पुस्तकालय, शाह मार्केट के पीर दमड़िया, तिलकामांझी विश्वविद्यालय के सेंट्रल लाइब्रेरी, भागलपुर संग्रहालय एवं अन्य स्थानों से प्राप्त अनेकों प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों एवं दस्तावेजों को जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञान भारतम मोबाइल ऐप पर अपलोड किया जा चुका है।

मेरे अंदर की अबोध लड़की… स्त्री विमर्श की शुरुआती मुखर आवाज स्नेहमयी चौधरी

नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। "मेरे अंदर की अबोध लड़की..." स्नेहमयी चौधरी की ये पंक्तियां सिर्फ एक कविता का हिस्सा नहीं हैं बल्कि जीवन की उन परतों को खोलती हैं जिन्हें अक्सर हम रोजमर्रा की भागदौड़ में महसूस तो करते हैं, लेकिन शब्द नहीं दे पाते। उनकी कविताएं पढ़ते हुए लगता है जैसे कोई बहुत साधारण-सी दिखने वाली बात अचानक हमारे भीतर गहरे उतर गई हो। यही उनकी कविता की सबसे बड़ी खूबी है। वे बड़ी-बड़ी बातों को बिना किसी भारी भाषा या जटिल प्रतीकों के, बहुत सहज तरीके से कह देती थीं।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर पुस्तक ‘ऑपरेशन सिंदूर: 100 सर्वश्रेष्ठ कविताएं’ का लोकार्पण

नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के समवेत हॉल में एक भव्य साहित्यिक समारोह संपन्न हुआ। इस आयोजन में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने प्रसिद्ध लेखक डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल द्वारा संपादित एवं देश के प्रतिष्ठित 'प्रभात प्रकाशन' द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'ऑपरेशन सिंदूर: 100 सर्वश्रेष्ठ कविताएं' का लोकार्पण किया।

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