काका हाथरसी: ऐसे कवि जो लोगों को हंसाने के बाद सामाजिक समस्याओं को लेकर...

नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य में कुछ रचनाकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने लोगों को हंसाते-हंसाते समाज की गंभीर सच्चाइयों से रूबरू कराया। काका हाथरसी उन्हीं नामों में शामिल हैं। उनकी कविताएं सुनकर श्रोता ठहाके लगाते थे, लेकिन कविता के अर्थ पर गौर किया जाता, तो उसमें समाज, व्यवस्था और आम जिंदगी की कई विसंगतियां नजर आती थीं। यही उनकी लेखनी की खासियत थी। हास्य को उन्होंने सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं बनाया, बल्कि उसके जरिए सामाजिक कमियों और अव्यवस्थाओं पर भी तीखा कटाक्ष किया।

‘हिंदी में शुद्ध-अशुद्ध जैसा कुछ नहीं’, भाषा के बदलते रूप पर पत्रकार और लेखक...

नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी को लेकर अक्सर एक बहस सुनने के लिए मिलती है कि हिंदी का शुद्ध रूप क्या है? कौन-सा शब्द हिंदी का है और कौन-सा नहीं? क्या अंग्रेजी या दूसरी भारतीय भाषाओं के शब्दों के इस्तेमाल से हिंदी कमजोर हो रही है? क्या सोशल मीडिया और रोमन लिपि हिंदी के भविष्य के लिए चुनौती बन रहे हैं? इन सवालों पर पत्रकार और लेखक अनंत विजय की राय कुछ अलग है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि हिंदी को शुद्ध और अशुद्ध के खांचे में बांटना ही सही तरीका नहीं है। हिंदी में शुद्ध-अशुद्ध जैसा कुछ नहीं, बल्कि परिचित और अपरिचित शब्द होते हैं।

हिंदी दिवस विशेष: लेखिका अंकिता जैन बोलीं- फोन या लैपटॉप के एक सिस्टम की...

नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रज, अवधी, मैथिली, राजस्थानी और भोजपुरी जैसी समृद्ध लोक बोलियों की विरासत को अपने साथ जोड़ने वाली हिंदी भाषा ने देश की बहुसंख्यक आबादी तक अपनी पहुंच बनाई। हिंदी दिवस पर आईएएनएस ने लेखिका अंकित जैन से बातचीत की।

हिंदी दिवस विशेष: नई हिंदी को जन्मे 13-14 वर्ष हो गए हैं, वह अपने...

नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष भी सोमवार को धूमधाम से हिंदी दिवस मनाया गया। वैश्विक स्तर पर हिंदी, तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी, सांस्कृतिक और जमीन से जुड़ी ऐसी भाषा है, जिसने कई स्थानीय भाषाओं को खुद में समाहित किया हुआ है। इस खास मौके पर आईएएनएस ने लेखक शैलेश भारतवासी से विशेष बातचीत की।

हिंदी से हिंग्लिश तक : लेखिका ने बताया- क्या यह क्षरण है या किसी...

नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की स्मृतियों, भावनाओं, अनुभवों और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। समय के साथ समाज बदला, लोगों की जीवनशैली बदली, संचार के माध्यम बदले और उसके साथ हिंदी भी बदलती गई। कभी साहित्य और संस्कृतनिष्ठ शब्दावली से पहचानी जाने वाली हिंदी आज अंग्रेजी, उर्दू, फारसी, अरबी, स्थानीय बोलियों और इंटरनेट की भाषा के साथ कदमताल करती दिखाई देती है। ऐसे में यह सवाल उठना भी स्वाभाविक है कि क्या यह हिंदी का क्षरण है या फिर किसी जीवित भाषा का स्वाभाविक विकास?

जब दूसरी भाषाओं से शब्द उधार लेती रही है हिंदी, तो आखिर क्या है...

नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। पहले 'शुद्ध' और 'सही' हिंदी की चाबी कुछ गिने-चुने संपादकों, आचार्यों और पाठ्यपुस्तक निर्माताओं के हाथ में थी। भाषा ऊपर से नीचे तय होती थी। आज नए शब्द और नई शब्दावली लोग सोशल मीडिया पर खुद गढ़ रहे हैं।

हिंदी से ‘हिंग्लिश’ तक, क्या हम एक ‘नई हिंदी’ के जन्म के दौर में...

नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। भाषा ही एक ऐसी कड़ी है, जो हमें अपनी मिट्टी, अपने इतिहास और अपनी संस्कृति से जोड़ती है। हर भाषा एक इतिहास, लोक परंपरा और जीवन-दृष्टि को लेकर चलती है, जो नई पीढ़ी के संस्कार को भी आगे बढ़ाती है। यही भाषाई बहुलता भारत की 'विविधता में एकता' की भावना को सशक्त बनाती है।

किसी भी दौर में भाषा नई होती जाती है, अगर ऐसा नहीं होगा तो...

नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी, सांस्कृतिक और जमीन से जुड़ी हुई ऐसी भाषा है, जिसने कई स्थानीय भाषाओं को खुद में समेटा है। हिंदी साहित्य ने ब्रज, अवधी, मैथिली, राजस्थानी और भोजपुरी जैसी समृद्ध लोक बोलियों की विरासत को अपने साथ जोड़ा, जिससे इसकी जड़ें गांवों और आम जन तक पहुंचीं। हिंदी दिवस के अवसर पर आईएएनएस ने लेखक और कवि नीलोत्पल मृणाल से खास बातचीत की।

हिंदी दिवस : बदलते दौर के साथ बदलने वाली ‘हिंदी’, आज ‘उर्मिला-विषयक उदासीनता’ की...

नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। भाषा केवल प्रचार या प्रसार का विषय नहीं है, वह तो अभिव्यक्त करने की रचनाशीलता, संवाद करने, संवेदना जताने और संबंधों का सही रेखांकन करने का जरिया है।

तमिल विद्वान सोलोमन पप्पैया का राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

चेन्नई, 12 सितंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि प्रसिद्ध तमिल विद्वान और प्रोफेसर सोलोमन पप्पैया का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। सोलोमन पप्पैया का शुक्रवार को मदुरै के एक निजी अस्पताल में उम्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया था। वे 90 वर्ष के थे।

खरी बात