कांग्रेस की दो फाड़ होगी, राहुल गांधी का अमेठी छोड़ना गलत फैसला, कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा : आचार्य प्रमोद कृष्णम

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नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आईएएनएस ने खास बातचीत की है। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली के भाजपा में शामिल होने पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस पतन की ओर है।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की कांग्रेस अब मोहम्मद अली जिन्ना के रास्ते पर चल रही है, इसलिए जो सच्चा देशभक्त है, जो भारत माता की जय बोलता है, वंदे मातरम का नारा लगाता है वह कांग्रेस में नहीं रह पाएगा।

उन्होंने कहा कि यह दौर कांग्रेस के पतन का है। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में जो ज्वालामुखी धधक रही है, वह 4 जून के बाद फटेगी और पार्टी की दो फाड़ हो जाएगी। एक फाड़ राहुल गांधी की कांग्रेस और दूसरी फाड़ प्रियंका गांधी की कांग्रेस, यानी कांग्रेस ‘आर’ और कांग्रेस ‘पी’।

प्रियंका गांधी की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को शहंशाह कहने पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश की जनता के सबसे बड़े और प्रथम सेवक के रूप में स्थापित हो चुके हैं, इसलिए प्रधानमंत्री पर ऐसा आरोप लगाना ठीक नहीं है।

शशि थरूर की ओर से प्रधानमंत्री द्वारा हिंदू हृदय सम्राट की छवि गढ़ने वाले बयान पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भारत ह्रदय सम्राट है, हिंदुस्तान ह्रदय सम्राट हैं। पीएम मोदी ने कभी नहीं कहा है कि वह सिर्फ हिन्दूओं के नेता हैं। उन्होंने हमेशा यही कहा कि मैं 140 करोड़ लोगों को प्रतिनिधित्व करता हूं और 140 करोड़ लोग मेरे परिवार हैं। पीएम मोदी को किसी कम्युनिटी से जोड़ना ठीक नहीं है, वह पूरे भारत के हृदय सम्राट हैं।

राहुल गांधी के अमेठी से चुनाव नहीं लड़ने पर उन्होंने कहा कि उन्हें रायबरेली की जगह रावलपिंडी से चुनाव लड़ना चाहिए था, क्योंकि पाकिस्तान में उनकी लोकप्रियता बढ़ रही है। वहां के लोगों में उनके प्रति मोहब्बत जाग रही है। राहुल भी पाकिस्तान को बहुत पसंद करते हैं।

उन्होंने कहा कि रायबरेली से राहुल गांधी का चुनाव लड़ने के पीछे कोई राजनीति नहीं है, यह गलत फैसला है। सेनापति जब पलायन करता है तो सेना भी साथ छोड़ देती है। उन्हें अमेठी छोड़ना नहीं चाहिए था। इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट गया है, क्योंकि वे मानते थे कि राहुल गांधी लड़ते हैं, वह फाइटर हैं, वह कहते भी थे कि डरो मत। जो आदमी सबसे कहता था कि डरो मत, वह आदमी चुनाव हारने के डर से डर गया, इससे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा है।