मप्र भाजपा का आग्रह : पोलिंग एजेंट की व्यय राशि को उम्मीदवार के खर्च में न जोड़ा जाए

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भोपाल, 6 मई (आईएएनएस )। भारतीय जनता पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई ने चुनाव आयोग से पोलिंग एजेंट पर खर्च होने वाली राशि को उम्मीदवार के खाते में न जोड़ने का आग्रह किया। भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को सौंपे एक ज्ञापन में पोलिंग एजेंट को भुगतान की जाने वाली राशि का प्रत्याशी के खर्च में शामिल नहीं करने की मांग की।

भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में कहा है कि राजनीतिक दलों द्वारा संबंधित अधिकारी से प्रति पोलिंग 4 पोलिंग एजेंटों को नियुक्त करने का अनुरोध किया गया है। भाजपा ने पोलिंग एजेंट के रूप में अपने कार्यकर्ताओं को नियुक्त करने के लिए नाम अधिकारियों को सौंप दिए हैं। भाजपा कार्यकर्ता स्वेच्छा से पोलिंग एजेंट का कार्य करते हैं, पार्टी द्वारा उन्हें किसी भी प्रकार का मानदेय नहीं दिया जाता। वे अपने लिए खाना घर से लाते हैं और स्वल्पाहार भी पार्टी द्वारा नहीं दिया जाता।

ज्ञापन में कहा गया है कि मध्यप्रदेश में 29 लोकसभा क्षेत्रों में 2200 से 2600 मतदान केंद्र प्रति लोकसभा क्षेत्र में हैं। अगर प्रशासन द्वारा 400 रुपये प्रति पोलिंग एजेंट भुगतान का निर्धारण किया है, उसके तहत 17 लाख 60 हजार से 20 लाख 80 हजार रुपये तक का व्यय प्रत्याशी के खाते में जोड़ा जाएगा। लोकसभा चुनाव के लिए अधिकतम व्यय 95 लाख रुपये निर्धारित किया गया है। अगर पोलिंग एजेंटों को भुगतान करने के प्रावधान को विलोपित नहीं किया जाता तो व्यय पर्यवेक्षकों द्वारा इस मद की राशि को भाजपा प्रत्याशियों के व्यय मद में जोड़ दिया जाएगा और प्रत्याशियों का चुनाव खर्च बढ़ेगा।

भाजपा ने भारत निर्वाचन आयोग से मांग की है कि कलेक्टर्स द्वारा पोलिंग एजेंट के लिए निर्धारित व्यय राशि को विलोपित किया जाए, ताकि प्रचार-प्रचार पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।