मैं राम मंदिर के निर्माण के लिए पीएम मोदी का ताल ठोककर समर्थन करता हूं : देवकीनंदन ठाकुर (आईएएनएस साक्षात्कार)

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नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। भागवत कथा वक्ता, जाने-माने कथा वाचक, आध्यात्मिक नेता, धर्मरत्न एवं पीस एंबेसडर के तौर पर मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित देवकी नंदन ठाकुर ने आईएएनएस के साथ साक्षात्कार में बहुत से मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मैं राम मंदिर के निर्माण के लिए पीएम मोदी का खुलकर समर्थन करता हूं।

देवकीनंदन ठाकुर ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत में कहा कि मैं भविष्यवक्ता नहीं हूं कि बता पाऊं कि देश का प्रधानमंत्री कौन बनेगा। इन सवालों का जवाब भविष्य में छिपा हुआ है। लेकिन, सभी सनातनी यह चाहते हैं कि जिन्होंने राम मंदिर बनवाकर दिया है, जिन्होंने 500 सालों का कलंक मिटाया है। उसे ही देश का प्रधानमंत्री बनना चाहिए। सभी सनातनियों के साथ मौजूदा समय में देश की भी यही मांग है कि हमारे प्रधानमंत्री मोदी ही बनें।

उन्होंने साफ कहा कि मैं 2024 के लिए डंके की चोट पर पीएम मोदी का समर्थन करता हूं। जितने लोग मुझे पर्सनली जानते हैं, वो जानते हैं कि मैं कभी भी दिमाग और जुबान से नहीं दिल से बोलता हूं। मेरे मन में जो होता है, मैं वो बोलता हूं। इस चुनाव से पहले मैंने कभी नहीं कहा कि मैं इस पार्टी का समर्थन कर रहा हूं। सनातन संत संसद मंच से मैंने खुलेआम कहा था कि मैं 2024 का वोट नरेंद्र मोदी और बीजेपी सरकार को दूंगा। क्योंकि बीजेपी की सरकार ने हमको राम मंदिर बनाकर दिया है। मैं एहसान फरामोश हिंदू नहीं हूं। अगर मैंने राम और कृष्ण की एक मिनट भी पूजा मन से की है तो मेरा दायित्व बनता है कि जिन्होंने मेरे भगवान श्रीराम को टेंट से निकालकर राम मंदिर तक पहुंचा दिया, उन्हें भारत का भविष्य एक बार और सौंपना चाहिए। अब जो होगा देखेंगे। मेरा 2024 में खुला समर्थन पीएम नरेंद्र मोदी को है क्योंकि उन्होंने राम मंदिर बनाया है। जो कृष्ण मंदिर बनाने में हमारा साथ देगा, उन्हें हम 2029 में वोट देंगे। जो हमारे सनातन को आगे बढ़ाएगा, हम उसके साथ खड़े रहेंगे। यही धर्मगुरु का दायित्व है।

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हिंदू हृदय सम्राट की छवि बनाने का आरोप लगाया है। इसको लेकर देवकीनंदन ठाकुर ने आईएएनएस के सवाल के जवाब में कहा, “देखिए, मुझे नहीं पता किसने क्या कहा है और ना ही मैं जानना चाहता हूं। यह मेरा विषय नहीं है। एक बात मैं मानता हूं कि जब से हमारा देश आजाद हुआ तब से लेकर आज तक इस देश के जितने भी प्रधानमंत्री हुए हैं, उन सभी ने हिंदू समाज को हाशिये पर रखा। अल्पसंख्यक का राग अलापते हुए हम सब बहुसंख्यकों के अधिकारों का हनन किया।”

उन्होंने आगे कहा, “आजाद भारत के बाद जितने बड़े-बड़े सनातनी मंदिर हैं, वह सरकार के अंडर में हैं। मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है। सबके धार्मिक स्थान स्वतंत्र होने चाहिए। सवाल यह है कि सनातनियों के मंदिर ही सरकार के अंडर क्यों रहेंगे? सनातनियों के गुरुकुल बंद क्यों किए गए? सनातनियों की परंपराओं के ऊपर आक्रमण क्यों किया गया? हिंदू हृदय सम्राट अगर किसी को बनना है तो आजादी के पहले उनके पास अवसर था। क्यों नहीं बने। कोई मनाही नहीं थी।

आज जब एक प्रधानमंत्री गंगा स्नान करते हैं। केदारनाथ जाते हैं। बाबा विश्वनाथ में अभिषेक करते हैं तो फिर उन्हें हिंदू हृदय सम्राट बनने की आवश्यकता नहीं है। वो तो हैं ही। मुझे बता दीजिए, इससे पहले कौन सा प्रधानमंत्री मंदिर में जाकर त्रिपुण्ड लगाता था। मुझे बताइए कौन सा प्रधानमंत्री था जो गंगा में स्नान करता था? कौन सा ऐसा प्रधानमंत्री है जो जा-जाकर सनातन धर्म के साधु संतों के चरणों में लोटता है? मुझे बता दीजिए इससे पहले कौन से प्रधानमंत्री ने राम मंदिर बनाने के प्रयास किए।

मैं किसी के वक्तव्य पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा हूं, पर मुझे लगता है व्यक्ति की पहचान कर्म से होती और मोदी ने वह कर्म करके दिखाया है। इसलिए, उन्हें किसी से सर्टिफिकेट लेने की आवश्यकता नहीं। अगर बतौर धर्मगुरु मेरे से पूछा जाएगा तो मेरी दृष्टि में वह हिंदू हृदय सम्राट है, क्योंकि उन्होंने राम मंदिर बनाकर दिया है