यूपी से ज्यादा तमिलनाडु अहम, भाजपा मजबूती से बढ़ रही है : प्रदीप गुप्ता (आईएएनएस इंटरव्यू)

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नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। देश के जाने माने चुनाव विश्लेषक और सर्वे एजेंसी एक्सिस माई इंडिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. प्रदीप गुप्ता ने आईएएनएस से खास बातचीत करते हुए लोकसभा चुनाव से जुड़े कई सवालों पर अपना जवाब दिया। इस साक्षात्कार में प्रदीप गुप्ता ने तमिलनाडु में भाजपा की स्थिति के बारे में भी खुलकर अपनी राय रखी।

उन्होंने कहा कि जिन 102 सीटों पर पहले चरण के लिए मतदान हो रहा है। इसमें से इस बार तमिलनाडु का चुनाव में सबसे ज्यादा महत्व है। एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों के लिए इस राज्य की सीटों का महत्व सबसे ज्यादा है। तमिलनाडु की 39 और पुडुचेरी की 1 यानी कुल 40 लोकसभा सीट पर दोनों ही गठबंधन की निगाह है। उसकी खास वजह यह है कि 2019 के चुनावों में इन 40 सीटों में से 39 सीटों के ऊपर कांग्रेस या डीएमके गठबंधन ने जीत हासिल की थी और केवल एक सीट पर एआईडीएमके जोकि उस समय एनडीए का हिस्सा थी, जीत हासिल कर पाई थी।

उन्होंने आगे कहा कि लेकिन इस बार एआईडीएमके एनडीए का पार्ट नहीं है। बीजेपी इस बार अपने दम पर यहां चुनाव लड़ रही है और छोटी-छोटी पार्टियों के साथ उन्होंने गठबंधन किया है और एक नया एनडीए यहां के लिए बनाया है। और, इन सब राज्यों की बात करें जिन जगहों पर आज चुनाव हो रहे हैं, यह सभी के सभी हाई वोटर टर्नआउट के लिए जाने जाते हैं। चाहे आप बंगाल की बात कर लीजिए, चाहे नॉर्थ ईस्ट के सारे स्टेट्स की बात कर लीजिए। असम में भी वोटिंग हो रही है। महाराष्ट्र जरूर लोअर टर्नआउट होता है पर वह यह सीटें नहीं हैं। यह ईस्टर्न विदर्भ का इलाका है, जिसके अंदर पांच सीटें हैं, जिसमें नागपुर जरूर आता है। एक सिटी के लिहाज से गोंदिया चंद्रपुर जिसमें पिछली बार इकलौती सीट 48 में से एक सीट चंद्रपुर में कांग्रेस ने जीती थी और राजस्थान जो है दूसरे नंबर पर तो वहां पर भी हाई वोटर टर्नआउट और अच्छा वोटर टर्नआउट होता है। जहां पर कि 12 सीटों पर चुनाव हो रहा है।

उन्होंने कहा कि इतना जरूर बता दूं कि राजनीतिक दृष्टिकोण से तमिलनाडु इस बार बहुत महत्वपूर्ण स्टेट रहने वाला है, जो कि पहले शायद कभी नहीं रहता था। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु पर काफी फोकस किया है, ‘मिशन साउथ’ ऐसे नाम से तमाम हेडलाइंस चल रही थी तो उनको भी यह पता ही था जो आप कह रहे हैं कि यूपी से ज्यादा इंपॉर्टेंट तमिलनाडु हो चुका है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी काफी एनर्जी यहां लगाई है और अन्नामलाई के नेतृत्व में, जो कि एक यंग लीडर हैं और उन्होंने पिछले छह महीने की बात कर लें तो जमीन के ऊपर बहुत ज्यादा काम किया हुआ है, जो सबको नजर आ रहा है। तमिलनाडु में ऐसा कोई भी नहीं होगा आज की डेट में जो अन्नामलाई को नहीं पहचानता है, यानी उन्होंने एक अपनी पहचान बनाने में सफलता हासिल की है। दूसरी जो वजह है, वह वजह यह है कि डीएमके पार्टी आज की डेट में लोकसभा चुनाव के नजरिए से और जो विगत असेंबली चुनाव हुए और वहां पर उनकी सरकार है, इन दोनों के हिसाब से आज की डेट में एंटी इनकंबेंसी पोजीशन पर है।

तमिलनाडु में हमेशा लोकसभा की बात कर लें। ऐसा हुआ है कि एक डीएमके और एआईएडीएमके को लगातार 30 से 35 सीटों के बीच एक के बाद एक बारी-बारी से सीटें मिलती आई है। पिछली बार जैसे मैंने बताया, डीएमके गठबंधन को ऑलरेडी 39 में से 38 सीट मिल चुकी है और अभी राज्य में सरकार भी जो है, डीएमके की है तो एंटी इनकंबेंसी की पोजीशन बनी है। डीएमके और कांग्रेस इस समय साथ हैं। ऐसे में एक समय पर आप जब रूल करते हैं, कोई भी पार्टी हो तो एक एंटी इनकंबेंसी या सरकार के खिलाफ माहौल बनना स्वाभाविक होता है। लेकिन, उसके दूसरी तरफ तीसरा पहलू एआईडीएमके है। जे. जयललिता के जाने के बाद जो दो मुख्यमंत्री बने ओपीएस और ईपीएस। उनके बाद जो एआईडीएमके में और तीसरे टीटीवी दिनाकरण तो तीन भाग में एआईडीएमके पार्टी बंटी हुई नजर आती है तो जमीन के ऊपर उसका वर्चस्व बहुत कम हुआ है क्योंकि नेचुरली तीन धड़ों में बंट गई है पार्टी और उससे जो स्पेस क्रिएट हुआ सो कॉल्ड अपोजिशन का स्पेस, वह साफ-साफ नजर आ रहा है। बीजेपी ने इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अपनी सारी की सारी एनर्जी और रिसोर्सेज वहां पर लगा दी है। इन्क्लूडिंग आप जब नई लोकसभा हुई तो सेंगोल की भी जो बात की, उसके बाद समागम की बात की वाराणसी और तमिल समागम और इस तरह के बहुत सारे प्रयास समय-समय पर किए जाते रहे हैं। पिछले दो साल की हम बात कर लें तो आपको साफ-साफ नजर आ रहा है कि इस बार जो सबसे बड़ी बैटल फिल्ड है वह तमिलनाडु है।

उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु में तमिल आइडेंटिटी या अस्मिता है, वह अपनी भाषा को लेकर बहुत ज्यादा इमोशनल होते हैं और बहुत ज्यादा उसकी वह वकालत करते हैं और तमिल सबसे पुरानी भाषा भी है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भी तमिल भाषा को सम्मान दिया और पूरी तरह से उसकी चर्चा की। यह सब उसी श्रृंखला में शामिल है जो मैंने कहा कि यदि आपको तमिलनाडु में कुछ करना है तो इन सब रास्तों से होकर गुजरना पड़ेगा, तभी इसका फायदा मिल सकता है।

भाजपा को इसका फायदा जरूर मिल सकता है और इन सब की बहुत सारी चीजों में उसमें एक पीएम को खोजते किया। एंटी इनकंबेंसी की बात कर लेना द्रमुक के खिलाफ एआईडीएमके के खिलाफ है। वहां पर है तो उसका और एआईडीएमके बंट गई है भी। उसमें तो इसका एंटी इनकंबेंसी का जो वोट पड़ेगा, उसके खिलाफ वह किसको जाएगा? वही, मैंने जैसे आपको बताया कि जनता यह देखती है।

उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु में खासकर ब्राह्मण समाज रिलीजियस आइडेंटिटी के लिए जाना जाता है। ऐसे में वहां के लिए राम मंदिर भी एक जरूर मुद्दा है जो कि तमिलनाडु में वह अट्रैक्ट करता है जैसे कि पूरे देश में करता है। और, सेंगोल जो कि उनकी एक हिस्टॉरिकल आइडेंटिटी की बातें और भाषा इन सभी का समागम है। ऐसे में आज की डेट में यह कह पाना कि कौन सा मुद्दा कितना काम कर रहा, बड़ा मुश्किल है। लेकिन, इन सभी चीजों का समावेश होगा यदि यहां पर बीजेपी अच्छा प्रदर्शन करती है।

उन्होंने कहा कि अंत में यह सब जानते हैं, रामचंद्र जी का जो वनवास था तो तमिलनाडु और सिर्फ उनके जरिए श्रीलंका में जाकर ही वह खत्म हुआ था। जो बड़ा पोर्शन और जो असली कर्म हुए रामचंद्र जी के भी वह तमिलनाडु के इर्दगिर्द ही थे। इसीलिए वहां पर मंदिर होना और रामचंद्र जी के बारे में चर्चा होना बड़ी स्वाभाविक बात है।