राहुल गांधी के हिंदुओं पर दिए गए बयान से नाराज संत समाज का दिल्ली में ‘हिंदू शक्ति संगम’ कार्यक्रम

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नई दिल्ली, 9 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा हिंदुओं को लेकर संसद में दिए गए बयान से नाराज संत समाज ने मंगलवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में ‘हिंदू शक्ति संगम’ कार्यक्रम कर अपना विरोध प्रकट किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, संत समाज, महिला समन्वय, दुर्गा वाहिनी, मातृ शक्ति, पूर्व सैनिक सेवा परिषद, हिंदू जागरण मंच, वनवासी कल्याण आश्रम, आर्य समाज प्रतिनिधि सभा दिल्ली, सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा दिल्ली, कालकाजी मंदिर, 108 फूटा हनुमान मंदिर जैसे कई हिंदू संगठनों और संत समाज के प्रतिनिधियों ने इस ‘आक्रोश सभा’ में शामिल होकर राहुल गांधी के बयान की कड़ी निंदा की।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि गुजरात में एक बयान दिया गया कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन को हरा दिया, लेकिन हम कहना चाहेंगे कि वे फैजाबाद जीते हैं, लेकिन अयोध्या हमारी है, हमारी थी और हमारी ही रहेगी। अभी काशी और मथुरा भी लेंगे। ये हमारा संकल्प है। हिंदू समाज ने ढांचा भी गिराया और देश की सर्वोच्च अदालत के निर्णय द्वारा श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर भी बनाया।

वैदिक मंत्रोच्चार से प्रारंभ हुए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद के दिल्ली प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना ने कहा कि हम (हिंदू समाज) उत्सव मनाने जाते हैं, शोभायात्रा निकालते हैं तो चारों तरफ से घेरकर प्रहार किया जाता है।

जैन संत साध्वी दीप्ति ने कहा कि हम पहले हिंदू हैं और बाद में जैन। वाल्मीकि पंचायत के अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि मुसलमान राजा ने ताजमहल बनवाकर हिंदू कारीगरों के हाथ कटवा दिए। जबकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर बनाने वाले कारीगरों के चरण धोए।

विश्व हिंदू परिषद के दिल्ली प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि समाज की जो इम्यूनिटी कमजोर हुई है, उस पर भी चर्चा होनी चाहिए।

कार्यक्रम में शामिल हुए सर्व हिंदू समाज से जुड़े अन्य वक्ताओं ने भी राहुल गांधी के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि सभी हिंदू विरोधी ताकतों को जो संसद के बाहर एवं अंदर लगातार हिंदू समाज एवं सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं, उन्हें आज अपने आक्रोश सभा के माध्यम से स्पष्ट चेतावनी दे दिया गया है कि वे हिंदू समाज के धैर्य की परीक्षा ना लें, उसकी सहनशीलता एवं बंधुत्व की भावना को उसकी कमजोरी नहीं समझा जाए, क्योंकि युद्ध भी हम हैं और बुद्ध भी हम हैं।