‘आरंभ – विश्वरंग मुंबई 2025’: भारतीय भाषाओं की परस्परता, सृजन और समन्वय का उत्सव

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मुंबई : 13 नवंबर/ मुंबई विश्वविद्यालय के ग्रीन टेक्नोलॉजी सभागार में ‘आरंभ – विश्वरंग मुंबई 2025’ का भव्य शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस आयोजन की शुरुआत डॉ. सुरुचि मोहता के द्वारा मंगलाचरण से हुई, जिसने पूरे सभागार में भक्ति, शांति और सकारात्मकता का वातावरण निर्मित किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वरंग निदेशक एवं रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलाधिपत श्री संतोष चौबे ने किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति श्री रवीन्द्र कुलकर्णी, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. करुणा शंकर उपाध्याय, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय , कुलपति डॉ. विजय सिंह तथा विशिष्ट अतिथि अपर पुलिस महानिदेशक एवं निदेशक, फोर्स वन, महाराष्ट्र श्री कृष्ण प्रकाश उपस्थित रहे।

विशिष्ट अतिथि श्री कृष्ण प्रकाश ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सभ्यता की जड़ें हमारी भाषाओं में हैं – हर बोली, हर शब्द हमारे अस्तित्व की पहचान है। जब हम अपनी भाषाओं को सम्मान देते हैं, तो हम अपने अतीत, अपनी परंपराओं और अपनी अस्मिता को जीवित रखते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि ‘विश्वरंग’ केवल एक साहित्यिक उत्सव नहीं, बल्कि यह उस भारत का प्रतीक है जो अपनी जड़ों से जुड़कर विश्व के साथ संवाद कर रहा है।

श्री संतोष चौबे, निदेशक – विश्वरंग एवं कुलाधिपति, रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, ने कहा कि विश्वरंग का उद्देश्य भारतीय भाषाओं, कला और संस्कृति के विविध रंगों को एक साझा मंच पर लाना है। मुंबई में यह आरंभ इस बात का प्रतीक है कि भारतीय सृजनशीलता और संवेदना का केंद्र केवल एक भाषा या क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की सामूहिक चेतना है।”

डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, कुलपति – स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, ने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए यह आयोजन प्रेरणा का स्रोत है। भाषा, रचनात्मकता और कौशल के इस समन्वय से भारत की नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़कर वैश्विक परिप्रेक्ष्य में सृजन कर रही है।”

श्री रवीन्द्र कुलकर्णी, कुलपति – मुंबई विश्वविद्यालय, ने कहा कि मुंबई विश्वविद्यालय सदैव ऐसे आयोजनों का स्वागत करता है जो भारतीय भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने का कार्य करते हैं। विश्वरंग ने इस दिशा में सांस्कृतिक समन्वय और शैक्षणिक संवाद की नई परंपरा स्थापित की है।”

उद्घाटन सत्र के पश्चात “भारतीय भाषाओं में परस्परता और समन्वय” विषय पर विचार सत्र आयोजित हुआ, जिसमें अलग अलग भाषाओ के कवि , कहानीकार जैसे ए. अरविंदाक्षन (हिंदी/मलयालम), ओम थानवी (हिंदी), संतोष चौबे (हिंदी), चंद्रकांत भोंजाल (मराठी), लक्ष्मण गायकवाड़ (मराठी) तथा डॉ. करुणा शंकर उपाध्याय (हिंदी) ने अपने विचार रखे।

सत्र का संचालन जवाहर कर्णावट ने किया और इसी दौरान ‘विश्वरंग संवाद – दक्षिण भारतीय भाषा अंक’ का लोकार्पण हुआ।

वरिष्ठ पत्रकार और आलोचक ओम थानवी ने “हिंदी भाषा की आलोचना और दृष्टि” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “भाषा संवाद का माध्यम ही नहीं, बल्कि दृष्टि का विस्तार भी है — और हिंदी इस दृष्टि से सबसे जीवंत भाषा है।”

 

“नई सदी में हिंदी कहानी का परिदृश्य” विषय पर चर्चा

“नई सदी में हिंदी कहानी का परिदृश्य” विषय पर परिचर्चा हुई, जिसमें सूर्यबाला, संतोष चौबे, धीरेन्द्र आस्थाना, मनोज रूपड़ा, मुकेश वर्मा और ओमा शर्मा जैसे साहित्यकारों ने विचार व्यक्त किए। सत्र का संचालन कुणाल सिंह ने किया तथा ‘वनमाली कथा – नवंबर-दिसंबर 2025 अंक’ का लोकार्पण किया गया।

प्रसिद्ध कथाकार सूर्यबाला ने कहा कि “नई सदी की कहानी केवल घटनाओं का बयान नहीं, बल्कि बदलते मनुष्य की जद्दोजहद का दस्तावेज़ है। आज की कहानियाँ हमारे समय की नब्ज़ को पहचानती हैं और पाठक को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती हैं।”

सत्र का संचालन कुणाल सिंह ने किया तथा ‘वनमाली कथा – नवंबर-दिसंबर 2025 अंक’ का विमोचन किया गया।

दो बहुभाषी कविता पाठ

सत्र में दो बहुभाषी कविता पाठ का आयोजन किया गया, जिसमे पहले सत्र की अध्यक्षता विजय कुमार ने की, जिसमें संतोष चौबे, विनोद दास, श्री बद्रीनारायण, सुमन केशरी ,सविता भार्गव ,चित्रा देसाई ,सुलभा कोरे ,मिहिर चित्रे ने अपनी कविताएँ प्रस्तुत की ।

सत्र का संचालन आभा बोधिसत्व ने किया।

दूसरे कविता सत्र की अध्यक्षता ए. अरविंदाक्षन ने की, जिसमें राजेश रेड्डी, प्रफुल्ल शिलेदार, लीलाधर मंडलोई, बलराम गुमास्ता, कमल बोरा, बोधिसत्व तथा कमलाकर भट्ट ने कविता पाठ किया । संचालन सुलभा कोरे ने किया। और साथ ही कहा की अंतर्राष्ट्रीय हिंदी मिशन से हम पुरे विश्व में एक करोड़ लोगो को हिंदी पाठय पठन कार्यक्रम से जुड़े।

सांस्कृतिक समापन – कला और संवेदना का संगम

दिन का समापन मुंबई विश्वविद्यालय की लोककला अकादमी द्वारा प्रस्तुत आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम से हुआ, जिसका स्वागत ज्योति रघुवंशी ने किया।
कार्यक्रम में दर्शकों ने भारतीय कला, भाषा और संस्कृति के इस जीवंत संगम की सराहना की।