श्रीनगर, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल द्वारा 48 जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (जेकेएएस) अधिकारियों के स्थानांतरण पर कड़ा ऐतराज जताया है।
उन्होंने इस मुद्दे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के नेतृत्व वाली सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता की आलोचना की। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुफ्ती ने मौजूदा सरकार को कमजोर बताते हुए कहा कि यह सिविल सेवकों के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है।
महबूबा मुफ्ती ने चेतावनी दी कि निर्वाचित सरकार से परामर्श किए बिना किए गए ये व्यापक तबादले जम्मू-कश्मीर के लोकतांत्रिक ढांचे और संस्थानों की स्वायत्तता को कमजोर करते हैं। उन्होंने कहा, “यह सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं और अधिकारों का प्रतिनिधित्व करने में नाकाम रही है। छह महीने बीत जाने के बावजूद जेलों में बंद युवाओं, नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हुई है।”
मुफ्ती ने मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि क्षेत्र में डर, दमन और छापेमारी का माहौल बना हुआ है।
पीडीपी प्रमुख ने एनसी पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया और कहा कि यह सरकार भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। उन्होंने अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण को भी एनसी की सहमति से लागू हुआ कदम करार दिया। मुफ्ती ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और क्षेत्र को प्रभावित करने वाले हर मुद्दे पर मुखर रहेगी।
वहीं, वक्फ बोर्ड से संबंधित मुद्दे पर मुफ्ती ने केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी निंदा की।
उन्होंने कहा, “वक्फ अल्पसंख्यकों और मुसलमानों की संस्था है। इस पर हमला करना और इसे संसद में पारित करना डकैती के समान है। यह बेहद गलत है और ऐसा नहीं होना चाहिए।”
महबूबा मुफ्ती ने एनसी सरकार से इन प्रशासनिक चुनौतियों का जवाब देने और लोगों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की।