भोपाल, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। 77 वें स्वतंत्रता दिवस पर शुरू की गई पीएम विश्वकर्मा योजना समाज के निचले तबके के कारीगरों, शिल्पकारों और अन्य लोगों के लिए जीवन बदलने वाली पहल साबित हो रही है। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में इस योजना से लोग लाभान्वित हो रहे हैं। शहडोल के कुछ लाभार्थियों ने आईएएनएस से बात की और अपने कौशल में सुधार के बारे में अपने अनुभव साझा किए।
भैया लाल सेन ने बताया, “हमें पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ मिला है। समाचार पत्रों और रेडियो के माध्यम से योजना के बारे में जानकारी मिली। फिर नगर पालिका में जाकर इसके लिए आवेदन किया। इसके बाद सात दिनों की ट्रेनिंग के बाद उन्हें सरकार की ओर से दो किस्तों में 4,000 रुपये की राशि मिली।”
योजना की तारीफ करते हुए उन्होंने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना से उनके हेयर कटिंग व्यवसाय में वृद्धि हुई है और इसके लिए वह सरकार के आभारी हैं।
एक अन्य लाभार्थी गोविंद प्रजापति ने बताया, “नगर पालिका में योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था, जिसके बाद छह दिवसीय ट्रेनिंग दिया गया। सरकार ने खाते में 4,000 रुपये भेजे। अधिकारियों ने बताया कि करीब तीन महीने के अंदर किट मिल जाएगा।”
स्थानीय निवासी जीवनलाल प्रजापति ने भी योजना की तारीफ करते हुए सरकार का आभार प्रकट किया। विज्ञापन के जरिए योजना के बारे में पता चलने की बात करते हुए उन्होंने बताया, “छह दिवसीय प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सरकार ने उन्हें 6,000 रुपए दिए।”
बता दें कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना का 17 सितंबर, 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अनावरण किया गया। यह योजना समाज के आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े वर्ग के कारीगरों की क्षमताओं को बढ़ाने का काम कर रही है। यह योजना न केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाओं का आयोजन करके कौशल विकास को बढ़ावा दे रही है, बल्कि कारीगरों को अपने पारंपरिक कौशल को बढ़ाने, नई तकनीक हासिल करने और बेहतर उत्पाद बनाने में सक्षम बना रही है।