वक्फ संशोधन विधेयक पर बहस, ज्ञानवापी केस के वादी को उम्मीद ‘आएगी पारदर्शिता’

0
4

वाराणसी, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। ज्ञानवापी केस के मुख्य वादी सोहन लाल आर्या, अधिवक्ता दीपक और वादिनी लक्ष्मी ने वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लेकर अपनी राय साझा की है। आईएएनएस से बातचीत में सोहन लाल आर्या ने कहा कि यह विधेयक देश के लिए जरूरी है, लेकिन इसमें पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने बताया कि आज संसद में इस विधेयक पर चर्चा हो रही है और उम्मीद है कि सच सामने आएगा।

आर्या ने कहा, “वक्फ का मकसद गरीब मुसलमानों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की व्यवस्था करना था, लेकिन इसका सही इस्तेमाल नहीं हुआ।”

उन्होंने बताया कि देश में वक्फ की करीब 10 लाख एकड़ जमीन है, जिसमें से ज्यादातर पर 220 लोगों का कब्जा है। इनकी सालाना आय 120 करोड़ रुपये दिखाई जाती है, जबकि श्री राम जन्मभूमि मंदिर ने एक साल में सरकार को 400 करोड़ रुपये टैक्स दिया।

आर्या ने सवाल उठाया कि वक्फ की संपत्ति में पारदर्शिता क्यों नहीं है? उन्होंने कहा, “रेलवे और सेना की जमीन पर भी वक्फ का दावा है, लेकिन यह पंजीकृत नहीं है। अगर वक्फ का काम साफ-सुथरा हो, तो कोई दिक्कत नहीं, लेकिन अभी इसमें कई खामियां हैं।” उनका मानना है कि विधेयक में पारदर्शिता लाने की जरूरत है।

अधिवक्ता दीपक ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। वे मां श्रृंगार गौरी के दर्शन के लिए एकत्रित लोगों के साथ थे। उन्होंने कहा, “आज संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पेश हो रहा है। यह बिल मुसलमानों, वंचितों और शोषितों के लिए बनाया गया था, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल हुआ। वक्फ ने मंदिरों की जमीन पर भी दावा करना शुरू कर दिया।”

दीपक ने बताया कि भाजपा सरकार ने इसे ठीक करने के लिए कदम उठाया है। उनका कहना है कि यह विधेयक मुसलमानों को समानता और सभी को न्याय दिलाने के लिए है। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि इस संघर्ष में सबको न्याय मिले।

वादिनी लक्ष्मी ने भी विधेयक का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “वक्फ बिल पास हो जाना चाहिए। इससे गरीबों को फायदा होगा। इसका विरोध वही लोग कर रहे हैं, जिनका पेट भरा है। अगर यह बिल पास हुआ, तो सबका कल्याण होगा।” उनका मानना है कि यह विधेयक समाज के कमजोर वर्गों के लिए लाभकारी साबित होगा।

बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि उनकी पार्टी भारत सरकार के साथ है और यह विधेयक बेहतरी के लिए लाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमारा स्टैंड साफ है। यह बिल कानून के दायरे में सही दिशा में लाया जा रहा है। विपक्ष इसका विरोध कर रहा है, लेकिन संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में उनके सुझावों को भी शामिल किया गया है। बिल का मसौदा आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी, लेकिन यह किसी को नुकसान पहुंचाने वाला नहीं है।” सुमन ने विपक्ष के विरोध को उनकी आदत करार दिया।

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने विधेयक को समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहा, “पुराने कानूनों को मजबूत करने का काम हो रहा है, जैसे नई शिक्षा नीति और नया आईपीसी। वक्फ कानून भी बहुत पुराना है। अब इसमें महिलाओं और गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान है, जो आज के परिवेश में जरूरी है।”

जायसवाल ने कहा कि 8 घंटे की संसदीय चर्चा के बाद देशहित में बदलाव होंगे। उन्होंने ट्रिपल तलाक का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे सुधारों से मुस्लिम महिलाओं को फायदा हुआ है और वक्फ संशोधन भी ऐसा ही सकारात्मक बदलाव लाएगा।

भाजपा नेता सी टी रवि ने विधेयक को संवैधानिक दायरे में बताया। उनका कहना है, “पिछले बिल में जमीन कब्जाने का मौका था, जो असंवैधानिक था। अब इसे ठीक किया गया है। कुछ लोग इसे गलत तरीके से प्रचारित कर रहे हैं, जैसे सीएए के वक्त हुआ था। यह धर्म या शरीयत का मामला नहीं, बल्कि संविधान की बात है। संविधान सबको बराबर मानता है।”

रवि ने कहा कि अगर यह बिल पास होता है, तो यह ऐतिहासिक होगा और मुसलमानों सहित सभी के हित में होगा। उन्होंने जोर दिया, “जो जमीन आपकी है, वो आपको मिलेगी। यह किसी के खिलाफ नहीं, सबके पक्ष में है।”