नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने बुधवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर तेलंगाना सरकार पर यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद की 400 एकड़ जमीन को नीलाम करने का आरोप लगाया। बीवीपी के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि यह जमीन छात्रों की है और इस पर उनके अधिकार हैं। इस मुद्दे को लेकर एबीवीपी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को ज्ञापन भी सौंपा।
एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री श्रवण वी. राज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि हाल ही में तेलंगाना सरकार ने यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद की 400 एकड़ भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की। यह जमीन हैदराबाद के शहर के दिल में स्थित है, जहां विविध पौधों और जीवों की प्रजातियां पाई जाती हैं। यह क्षेत्र न केवल प्राकृतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि शहर के अन्य हिस्सों से भी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि यह स्थान पर्यावरण के लिए एक कार्बन सिंक की तरह है और यहां कई पक्षी, हिरण और अन्य जीव-जंतु रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह जगह रेवंतरेड्डी जैसे नेताओं के लिए केवल एक रियल एस्टेट व्यवसाय बन गई है, जो इस भूमि को निजी कंपनियों को बेचने की योजना बना रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जब विश्वविद्यालय के छात्र इस मुद्दे पर विरोध कर रहे थे, तो तेलंगाना पुलिस ने विश्वविद्यालय परिसर में घुसकर छात्रों को गिरफ्तार किया। श्रवण ने कहा कि तेलंगाना सरकार ने छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह बताया कि कुछ वरिष्ठ मंत्री, जो विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं, इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं और वे सरकार के इस कृत्य को जायज़ ठहरा रहे हैं।
एबीवीपी की राष्ट्रीय मंत्री शिवांगी खरवाल ने कहा कि तेलंगाना सरकार द्वारा विश्वविद्यालय की जंगल वाली भूमि और जैविक विविधता से संपन्न भूमि को निजी कंपनियों को सौंपने का यह कदम एक बड़ा घोटाला है। उन्होंने केंद्रीय सरकार से मांग की कि इस मामले की तुरंत जांच हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि विश्वविद्यालय की भूमि का गलत उपयोग न हो। शिवांगी ने यह भी कहा कि एबीवीपी इस मुद्दे को लेकर लगातार विरोध कर रही है और आने वाले समय में एक बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है, जो न केवल हैदराबाद, बल्कि देशभर के छात्रों को इस मामले में आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित करेगा।
उन्होंने कहा कि उनका संगठन इस मुद्दे को लेकर निरंतर संघर्ष करेगा, क्योंकि यह केवल तेलंगाना या हैदराबाद का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश के छात्रों और नागरिकों का मुद्दा है। जब छात्रों की शक्ति एकजुट होती है, तो सत्ता के बड़े फैसले बदल सकते हैं। एबीवीपी का उद्देश्य केवल इस भूमि के बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इस तरह के गलत कदमों से भारत का संविधान और शैक्षिक व्यवस्था सुरक्षित रहे।