बिहार विधानसभा चुनाव: गौरा बौराम में बाढ़ और पलायन प्रमुख मुद्दे, समझें सियासी समीकरण

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नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। दरभंगा जिले का गौरा बौराम विधानसभा बिहार की राजनीति में एक अहम स्थान रखता है। यह विधानसभा क्षेत्र 2008 के परिसीमन आयोग की सिफारिश पर अस्तित्व में आया और तब से अब तक तीन चुनाव देख चुका है।

इस विधानसभा में गौरा बौराम और किरातपुर प्रखंडों के साथ-साथ बीरौल प्रखंड के 12 ग्राम पंचायत शामिल हैं। यह क्षेत्र पूरी तरह ग्रामीण और कृषि प्रधान है। पास से बहने वाली कमला नदी खेती को सहारा देती है, लेकिन हर साल की मौसमी बाढ़ यहां की खेती और विकास दोनों को प्रभावित करती है। औद्योगिक इकाइयों की अनुपस्थिति के कारण इसे कम औद्योगीकृत क्षेत्र माना जाता है, जिससे पलायन की समस्या भी बढ़ी हुई है।

इस सीट के राजनीतिक इतिहास पर अगर हम नजर डालें तो 2010 और 2015 में यहां जेडीयू ने जीत हासिल की थी। इसके बाद 2020 के चुनाव में वीआईपी प्रत्याशी स्वर्णा सिंह ने आरजेडी के अफजल अली खान को हराकर सीट अपने नाम की। हालांकि, 2022 में स्वर्णा सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया, जिसे उनकी पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए स्वाभाविक कदम माना गया। लोकसभा चुनावों में भाजपा इस क्षेत्र में लगातार बढ़त बनाए हुए है, जिससे आगामी विधानसभा चुनाव 2025 में पार्टी की स्थिति और मजबूत मानी जा रही है।

गौरा बौराम विधानसभा दरभंगा मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर और पटना से 158 किलोमीटर दूर स्थित है। आसपास के प्रमुख शहरों में झंझारपुर, सुपौल, सहर्सा और रोसड़ा आते हैं। यहां रेलवे स्टेशन नहीं है और सबसे नजदीकी स्टेशन दरभंगा जंक्शन है।

चुनाव आयोग के 2024 के आंकड़ों के अनुसार यहां की कुल जनसंख्या 4,41,617 है। कुल मतदाता 2,61,037 हैं, जिनमें 1,36,597 पुरुष और 1,24,440 महिलाएं शामिल हैं।

पिछले चुनावी रुझानों के अनुसार भाजपा यहां मजबूत स्थिति में है। स्वर्णा सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी को अतिरिक्त बढ़त मिली है। वहीं आरजेडी मुस्लिम-यादव समीकरण पर भरोसा करती है, लेकिन राह आसान नहीं है। जनता के बीच बाढ़, रोजगार और पलायन सबसे बड़े मुद्दे हैं। ग्रामीण मतदाता भाजपा को एक स्थिर विकल्प मानते हुए उसकी ओर झुकते नजर आ रहे हैं।

कुल मिलाकर देखा जाए तो 2025 के विधानसभा चुनाव में गौरा बौराम सीट पर भाजपा का पलड़ा भारी दिख रहा है।