मोहन भागवत का बयान स्वागत योग्य : महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष

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मुंबई, 29 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे जिया खान ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में इस्लाम नहीं रहेगा, ये सोचने वाला हिंदू नहीं हो सकता है।

प्यारे जिया खान ने कहा कि मोहन भागवत का बयान स्वागत योग्य है, क्योंकि बहुत सारे लोग भारत की एकता को तोड़ना चाहते हैं। ऐसे सभी लोगों के लिए यह एक बड़ा संदेश है। मोहन भागवत इस बात को जानते हैं कि सभी को एकजुट करने में ही देश की भलाई है। जब तक हम एकजुट नहीं होंगे, तब तक यह देश आगे नहीं बढ़ेगा। मैं समझता हूं कि जो लोग मुस्लिम समुदाय के संबंध में बयान देते रहते हैं, ऐसे सभी लोगों को मोहन भागवत से सीखने की जरूरत है।

आरएसएस प्रमुख के इस बयान पर कि अब सभी लोग खुद को हिंदू कह रहे हैं। इस पर प्यारे जिया खान ने कहा कि पहले यहां पर सभी लोग हिंदू ही थे। इसके बाद हमारे देश में इस्लाम का आगमन हुआ। कुछ लोग दावा करते हैं कि इस्लाम राजस्थान से आया है, लेकिन ऐसा नहीं है। मैं खुद भारत की सबसे पहली मस्जिद में गया हूं। यह 1400 साल पुरानी मस्जिद है जिसमें मैं गया था।

उन्होंने अतीत की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ कारणों से स्थिति ऐसी पैदा हो गई कि हिंदुओं पर अत्याचार शुरू हो गया। इसके बाद सभी लोग विभिन्न धर्मों में बंट गए। कुछ लोग दावा करते हैं कि भारत में इस्लाम तलवार की नोक पर आया, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। इस्लाम धर्म की जीवनशैली से प्रभावित होकर लोगों ने इसे स्वीकार किया।

इस्लामिक विद्वान मुफ़्ती वजाहत कासमी ने भी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बेबाकी से अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं। इससे पहले भी वे कई बार इस तरह के मुद्दों पर अपनी बात रख चुके हैं। संघ प्रमुख कई बार यह बता चुके हैं कि उनका संगठन मुस्लिम समुदाय को लेकर किस तरह की राय रखता है। इस देश में विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं और अगर हम चाहते हैं कि इस देश के विकास की गति तीव्र हो, तो इसके लिए हमें विभिन्न धर्मों के बीच में तालमेल स्थापित करना होगा। इसके अलावा यह भी एक सच है कि एक सच्चा हिंदू कभी-भी किसी दूसरे धर्म को छोटी नजरों से नहीं देखता है।