नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। उनके इस बयान ने सियासी हलकों में हंगामा मचा दिया है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे लेकर टीएमसी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।
शुक्रवार को नदिया जिले में पत्रकारों द्वारा अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर सवाल पूछे जाने पर मोइत्रा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने महुआ मोइत्रा के बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह टीएमसी और कांग्रेस नेताओं की हताशा और बौखलाहट को दर्शाता है।
प्रदीप भंडारी ने कहा, “महुआ मोइत्रा और राहुल गांधी जैसे तथाकथित ‘राजनीतिक शहरी नक्सली’ इस बात से परेशान हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों के उत्थान के लिए काम कर रहे हैं। उनकी हताशा और आक्रोश का नतीजा है कि वे गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि ये नेता अहिंसा की बात करते हैं, लेकिन उनके बयान प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ युवाओं को भड़काने का प्रयास करते हैं।
भंडारी ने राहुल गांधी के एक पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने युवाओं से कहा था कि प्रधानमंत्री को “डंडे से पीटना चाहिए।” यह “पॉलिटिकल अर्बन नक्सली” की मानसिकता है, जो भारतीय संस्कारों के खिलाफ है।
प्रदीप भंडारी ने यह भी कहा कि महुआ मोइत्रा और राहुल गांधी जैसे नेताओं की नीति और नियत देश के खिलाफ है। ये लोग चुने हुए प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ गाली-गलौज और हिंसा भड़काने का प्रयास करते हैं, जो देशहित में नहीं है। इनके बयान गरीबों का अपमान करते हैं और संविधान के मूल्यों के खिलाफ हैं।
इस बीच, कांग्रेस नेता अजय राय के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर दिए गए एक आपत्तिजनक बयान ने भी विवाद को और हवा दी। जवाब में प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेता इस बात से बौखलाए हुए हैं कि देश एकजुट है और उनके “झूठ” सामने नहीं आ रहे।
वहीं, राहुल गांधी ने सत्य और अहिंसा की बात करते हुए कहा कि असत्य और हिंसा इसके सामने टिक नहीं सकती। प्रदीप भंडारी ने इस पर पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस और टीएमसी का “सत्य और अहिंसा” प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल और हिंसा भड़काना है? यह बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान में विश्वास न करने वालों की सोच है, जो देश को खंडित करना चाहती है।