दुनिया में भारतीय तकनीक की धूम : सीएम मोहन यादव

0
13

भोपाल, 30 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय संस्कृति स्वदेशी की भावना पर आधारित है। आज तकनीक का दौर है, मगर भारतीय तकनीक की दुनिया में धूम है। राजधानी भोपाल के कुशाभाउ ठाकरे सभागार में आयोजित स्वदेशी से स्वावलंबन संगोष्ठी में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आज हर देश यह समझ रहा है कि इस दौर में स्वदेशी की भावना ही सबसे आवश्यक है। सारे उलझे-सुलझे प्रश्नों का उत्तर केवल एक है, स्वदेशी की भावना।

उन्होने भारतीय संस्कृति की चर्चा करते हुए कहा, “परमात्मा की दया है कि हमारा कल्चर शुरू से ही स्वदेशी की भावना पर आधारित रहा है। जिसे जो आवश्यकता होती थी, वह सब गांव में ही मिल जाता था। आज टेक्नोलॉजी बदली है, लेकिन तब भी भारतीय टेक्नोलॉजी धूम मचा रही है।”

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मौके पर संकल्प दिलाया कि देश को समृद्ध एवं विकसित राष्ट्र बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करेंगे। स्वदेशी से स्वावलंबी संकल्प शक्ति हेतु स्वदेशी उत्पादों की खरीदेंगे। उनका उपयोग करने के लिए जागरूकता लाएंगे। स्वदेशी उत्पादों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जनसंचार के माध्यमों का उपयोग करेंगे।”

भारत की आर्थिक समृद्धि को लेकर मुख्यमंत्री यादव ने कहा, “आज जब हम दुनिया की तीसरी आर्थिक ताकत बनने की ओर बढ़ रहे हैं, तो इसमें देश के अंदर सबसे बड़ा योगदान जीवनशैली का है। आजादी के पहले से ही स्वदेशी की भावना के बल पर हमने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी। स्वदेशी की भावना में समय-समय पर अवरोध आते रहते हैं, लेकिन समय उन्हें अपने आप ठीक कर देता है। आजादी की लड़ाई में जब तक गणपति जी नहीं आए थे तब तक आनंद नहीं आया था। गणपति जी के आगमन के बाद बाल गंगाधर तिलक ने जो लड़ाई लड़ी, वही स्वदेशी की भावना थी।”

राज्य सरकार द्वारा स्वदेशी के आंदोलन को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार ने भी वह सब करने का प्रयास किया है जो स्वदेशी के लिए आवश्यक है। हमारे राज्यों की सीमाएं चाहे सीमित हों, लेकिन हमारी सांस्कृतिक धारा हमें स्वदेशी के भाव के आधार पर उस दौर में ले जाती है और देश की आंतरिक ताकत को मजबूत करती है। विदेशी आक्रमणों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “1235 में जब हम कमजोर थे, तो महाकाल का मंदिर तोड़ दिया गया था। हमारे शासक मजबूत हुए तो ढाई सौ साल बाद मंदिर पुनः बन गया। पिछले साल का आंकड़ा है कि 7 करोड़ लोग अकेले उज्जैन में आए। राज्य में पर्यटन को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि एक ओर हमने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास किया और दूसरी ओर अपने जंगलों को जानवरों से आबाद कर रहे हैं।

–आईएएनएस

एसएनपी/एएस