उज्जैन: त्रिपुंड और त्रिशूल से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती के बाद दिए भक्तों को अद्भुत दर्शन

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उज्जैन, 9 नवंबर (आईएएनएस)। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में अगहन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बाबा महाकाल ने भस्म आरती के बाद भक्तों को दिव्य दर्शन दिए।

बाबा महाकाल ने रविवार की भस्म आरती के बाद माथे पर दिव्य त्रिशूल सजाकर भक्तों को मनमोहक दर्शन दिए। बाबा का त्रिशूल धारी रूप देखकर भक्तों ने मंदिर परिसर में बाबा के नाम के जयकारे लगाए। मंदिर में उनके दर्शन के लिए श्रद्धालु लंबी लाइनों में लगे दिखे।

अगहन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन बाबा का अद्भुत शृंगार किया गया। पहले प्रात:काल मंदिर में बाबा वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए। फिर घी, फलों के रस, दही, दूध और मीठे पदार्थों से बाबा का अभिषेक किया गया। सुबह 4 बजे हुई भस्म आरती में बाबा महाकाल के शिवलिंग पर महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई और श्वेत वस्त्र बाबा को पहनाकर भस्म आरती की शुरुआत हुई।

बाबा की भस्म आरती बहुत खास होती है, क्योंकि भस्म आरती में बाबा भोलेनाथ निराकार रूप में होते हैं। ऐसे में भक्तों को कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। महिलाओं और पुरुषों को शालीन कपड़े पहनने होते हैं और अपने सिर को वस्त्र से ढकना पड़ता है। भस्म आरती के बाद रविवार को बाबा महाकाल को त्रिपुंड और त्रिशूल से सुसज्जित किया गया।

बाबा के माथे पर त्रिपुंड बनाकर माथे पर त्रिशूल धारण करवाया गया और मुकुट पहनाकर फूल-मालाओं से सजाया गया। बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए भक्त देर रात से ही लाइन में लगे दिखे और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गूंजता रहा।

पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, रात तीन बजे से ही भक्त मंदिर में पहुंचना शुरू कर देते हैं और लाइनों में लगकर बाबा के दर्शन का इंतजार करते हैं। बता दें कि बाबा महाकाल की पूरे दिन में 6 आरती होती हैं, जिसमें सबसे पहले सुबह की भस्म आरती, जिसके बाद 7 बजे बालभोग आरती, 10 बजे भोग आरती, शाम 5 बजे संध्या पूजन, शाम 7 बजे संध्या आरती और रात के समय शयन आरती की जाती है। इन सभी आरती में शामिल होने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं।